बुंदेलखंड के किसानों की चमकेगी किस्मत! मसूर की खेती से एक एकड़ में होगी 90 हजार रुपये तक की कमाई

बुंदेलखंड के किसानों की चमकेगी किस्मत! मसूर की खेती से एक एकड़ में होगी 90 हजार रुपये तक की कमाई

बुंदेलखंड में मसूर की खेती किसानों के लिए मुनाफे का बेहतर विकल्प बन सकती है. डॉ. सुशील कुमार सिंह ने बताया कि उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक तकनीकों से किसान एक एकड़ में 70 से 90 हजार रुपये तक मुनाफा कमा सकते हैं.जानिए मसूर की उन्नत किस्में, बीजोपचार और खेती का तरीका.

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बुंदेलखंड के किसानों की चमकेगी किस्मत! मसूर की खेती से एक एकड़ में होगी 90 हजार रुपये तक की कमाई

बुंदेलखंड के किसानों के लिए रबी सीजन में मसूर की खेती आमदनी बढ़ाने का बेहतर विकल्प बन सकती है. कम लागत, कम सिंचाई की आवश्यकता और बाजार में अच्छी मांग के चलते मसूर की खेती किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी के निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. सुशील कुमार सिंह ने क्षेत्र के किसानों को मसूर की वैज्ञानिक खेती अपनाने की सलाह दी है.उनके अनुसार, उन्नत प्रजातियों और बेहतर फसल प्रबंधन के जरिए किसान प्रति एकड़ लगभग 70 से 90 हजार रुपये तक का मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं.

बुंदेलखंड की मिट्टी मसूर की खेती के लिए अनुकूल

डॉ. सिंह ने बताया कि मसूर भारत की प्रमुख दलहनी फसलों में शामिल है और देश में लगभग 16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती की जाती है. उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड क्षेत्र मसूर उत्पादन के लिहाज से काफी अनुकूल है.

यहां की मार एवं काबर मिट्टी मसूर की खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है.इन मिट्टियों में नमी को लंबे समय तक संचित रखने की क्षमता होती है, जिसके कारण फसल को सामान्य परिस्थितियों में कम सिंचाई की जरूरत पड़ती है. इससे किसानों की उत्पादन लागत कम रखने में मदद मिलती है.

नवंबर का पहला पखवाड़ा बुवाई के लिए बेहतर

मसूर की अच्छी पैदावार के लिए समय पर बुवाई करना बेहद जरूरी है.डॉ. सिंह के अनुसार, नवंबर महीने का प्रथम पखवाड़ा मसूर की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त समय है.किसानों को क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी की स्थिति के अनुसार समय पर खेत तैयार करके बुवाई करनी चाहिए.

मसूर की ये उन्नत किस्में देंगी बेहतर उत्पादन

बुंदेलखंड क्षेत्र के किसानों के लिए कई उन्नत मसूर प्रजातियां उपयोगी साबित हो सकती हैं. डॉ. सिंह ने प्रमुख किस्मों की जानकारी देते हुए बताया कि आईपीएल-220 एक महत्वपूर्ण प्रजाति है, जिसमें आयरन और जिंक की मात्रा अधिक पाई जाती है. इसी वजह से इसे बायोफोर्टिफाइड प्रजाति की श्रेणी में रखा गया है.

इसके अलावा किसान इन उन्नत किस्मों का भी चयन कर सकते हैं:

  •  आईपीएल-315
  • आईपीएल-316
  • आईपीएल-329
  • आईपीएल-534
  • एल-4717
  • एल-4727

इनमें से कई प्रजातियों में प्रमुख रोगों के प्रति सहनशीलता पाई जाती है.किसानों को अपने क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त किस्म का चयन करना चाहिए.

बुवाई से पहले बीजोपचार करना न भूलें

मसूर की फसल को रोगों से बचाने और बेहतर अंकुरण के लिए बीजोपचार जरूरी है.डॉ. सिंह ने किसानों को प्रति किलोग्राम बीज में 5 ग्राम ट्राइकोडर्मा से उपचार करने की सलाह दी है.इसके साथ पीएसबी (फॉस्फेट सॉल्यूबिलाइजिंग बैक्टीरिया) से बीजोपचार करने पर पौधों को मिट्टी में मौजूद फास्फोरस उपलब्ध कराने में मदद मिलती है.इससे पौधों की वृद्धि और विकास बेहतर होता है.

एक एकड़ में कितना बीज और खाद डालें?

डॉ. सिंह के अनुसार, मसूर की बुवाई के लिए प्रति एकड़ 17 से 18 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है. इसके साथ प्रति एकड़ लगभग 40 किलोग्राम डीएपी का प्रयोग लाभकारी हो सकता है.

फसल में दाना बनने की अवस्था पर 2 प्रतिशत यूरिया के घोल का छिड़काव करने से दानों के विकास में सहायता मिलती है और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

दिसंबर में बारिश नहीं हो तो करें हल्की सिंचाई

मसूर की फसल को सामान्यतः अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती.हालांकि, यदि दिसंबर महीने में बारिश नहीं होती है तो किसान फसल की जरूरत के अनुसार बौछारी विधि से हल्की सिंचाई कर सकते हैं.इससे पौधों में पर्याप्त फूल और फलियां बनने में मदद मिलती है.मसूर की फसल सामान्यतः 120 से 130 दिनों में पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती है.

एक एकड़ में 70 से 90 हजार रुपये तक मुनाफे की संभावना

डॉ. सुशील कुमार सिंह के अनुसार, मसूर की खेती में अपेक्षाकृत कम लागत आती है.यदि किसान उन्नत किस्मों का चयन करें और वैज्ञानिक तरीके से फसल प्रबंधन अपनाएं तो प्रति एकड़ 10 से 12 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त करने की संभावना है.इससे किसानों को प्रति एकड़ लगभग 70 से 90 हजार रुपये तक का मुनाफा मिल सकता है.उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा मसूर का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 7,390 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है.

किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने की सलाह

डॉ. सिंह ने बुंदेलखंड के किसानों से अपील की कि वे रबी सीजन में मसूर की उन्नत प्रजातियों का चयन करें और समय पर बुवाई करें. साथ ही बीजोपचार, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, आवश्यकतानुसार सिंचाई और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाएं.

उन्होंने कहा कि बेहतर फसल प्रबंधन के माध्यम से किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं और अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं.बुंदेलखंड की कृषि परिस्थितियों को देखते हुए मसूर की खेती किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बन सकती है.

 

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