
खेतों में गिरी धान और गन्ने की फसलदेश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ली है, जिससे कई राज्यों में तबाही का आलम है. उत्तर प्रदेश के अयोध्या क्षेत्र में पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. कई इलाकों में पककर तैयार होने के करीब पहुंच चुकी धान की खड़ी फसल खेतों में गिर गई है. वहीं, तेज हवा के कारण कई जगह गन्ने की फसल भी जमीन पर लेट गए हैं. निचले इलाकों में बारिश का पानी जमा होने से खेतों में जलभराव की स्थिति बन गई है. ऐसे में किसानों को फसल की क्वालिटी और उत्पादन में नुकसान की चिंता सताने लगी है.
धान की बालियां निकलने के बाद इस समय फसल काफी संवेदनशील होती है. कई किसानों की फसल कटाई के लिए तैयार हो रही थी और किसान मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन लगातार बारिश और तेज हवाओं के कारण कई खेतों में धान की फसल जमीन पर गिर गई. जमीन पर गिरी धान की बालियां अगर लंबे समय तक पानी और नमी के संपर्क में रहती हैं तो दाने खराब होने, अंकुर निकलने, दाने काले पड़ने और सड़ने का खतरा बढ़ सकता है. इससे धान की क्वालिटी के साथ उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है.
जिन खेतों में धान पूरी तरह गिर गया है, वहां किसानों के लिए फसल की कटाई भी मुश्किल हो सकती है. खेत में पानी और कीचड़ होने के कारण कई जगह हार्वेस्टर पहुंचना मुश्किल होगा. ऐसे में मौसम साफ होने के बाद किसानों को कुछ खेतों में हाथ से कटाई करनी पड़ सकती है. किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर बारिश का दौर आगे भी जारी रहा तो जमीन पर पड़ी फसल में नुकसान और बढ़ सकता है, इसलिए मौसम साफ होते ही गिरी हुई धान की फसल की जल्द से जल्द कटाई और सुरक्षित जगह पर सुखाने की जरूरत होगी.

बारिश के साथ चली तेज हवाओं का असर गन्ने की फसल पर भी देखने को मिला है, जिन खेतों में गन्ना ज्यादा लंबा हो गया था, वहां कई जगह पौधे जमीन पर गिर गए हैं. गन्ना गिरने से उसकी बढ़वार और आगे की पैदावार पर असर पड़ सकता है. विशेष रूप से पौधा गन्ना और बीज वाले गन्ने को गिरने के बाद सीधा करके बांधने की जरूरत है. कृषि सलाह के मुताबिक, इन्हें एक साथ बांधने से फसल को दोबारा संभालने में मदद मिल सकती है, क्योंकि बीज वाले गन्ने की जरूरत आगामी बुआई के समय पड़ती है, इसलिए उसे सुरक्षित रखना जरूरी है.
जिन खेतों में बारिश का पानी जमा हो गया है, वहां किसानों को जल निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है. खासकर गन्ने और सब्जियों के खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसल को नुकसान हो सकता है. सब्जियों के खेत में जलभराव रहने पर पौधों की जड़ें प्रभावित हो सकती हैं और फसल पीली पड़ने या गलने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए जहां संभव हो, किसान खेत से अतिरिक्त पानी बाहर निकालने की व्यवस्था करें.
गन्ने के लंबे समय तक जमीन पर पड़े रहने से फसल में नई अनचाही शाखाएं निकलने (वाटर शूट्स) और दोबारा अंकुरण जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इससे गन्ने की क्वालिटी और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहती है. फिलहाल किसानों के लिए जरूरी है कि बारिश रुकने और खेतों की स्थिति सामान्य होने पर गिरी हुई धान की जल्द कटाई करें, खेतों से अतिरिक्त पानी निकालें और गिरे हुए गन्ने को संभव हो तो सीधा करके बांध दें. इससे मौसम की वजह से होने वाले नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता है.
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