ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई में गिरावट, धान और मोटे अनाज का रकबा घटा, तिलहनों में बढ़ोतरी

ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई में गिरावट, धान और मोटे अनाज का रकबा घटा, तिलहनों में बढ़ोतरी

कृषि मंत्रालय के अनुसार 6 मार्च 2026 तक देश में ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई 31.69 लाख हेक्टेयर में हुई है. धान और मोटे अनाज के रकबे में कमी जबकि तिलहनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

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ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई में गिरावट, धान और मोटे अनाज का रकबा घटा, तिलहनों में बढ़ोतरीग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई पिछले साल से कम

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत कृषि विभाग के क्रॉप्स डिवीजन द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार देश में ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई पिछले साल की तुलना में थोड़ी कम हुई है. 6 मार्च 2026 तक कुल 31.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 33.38 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई दर्ज की गई थी. इस प्रकार कुल बुवाई क्षेत्र में 1.69 लाख हेक्टेयर की कमी आई है.

धान की बुवाई में सबसे ज्यादा कमी

आंकड़ों के मुताबिक धान की बुवाई में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है. इस वर्ष 6 मार्च तक 25.30 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक 26.89 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी. यानी धान के रकबे में 1.60 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है. हालांकि सामान्य ग्रीष्मकालीन क्षेत्र 31.49 लाख हेक्टेयर माना जाता है, जबकि वर्ष 2025 में धान का अंतिम रकबा 33.28 लाख हेक्टेयर रहा था.

दलहनी फसलों में मामूली बढ़त

दलहन फसलों की बुवाई में हल्की बढ़त देखने को मिली है. इस साल दलहन का रकबा 1.59 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 1.57 लाख हेक्टेयर था. इस प्रकार लगभग 0.01 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

दलहन की प्रमुख फसलों में:

  • मूंग (ग्रीनग्राम) का रकबा 0.95 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 0.98 लाख हेक्टेयर से थोड़ा कम है.
  • उड़द (ब्लैकग्राम) की बुवाई 0.45 लाख हेक्टेयर में हुई, जो पिछले साल 0.46 लाख हेक्टेयर थी.
  • अन्य दलहन का क्षेत्र बढ़कर 0.18 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष 0.13 लाख हेक्टेयर था.

मोटे अनाज (श्री अन्न) की बुवाई में गिरावट

श्री अन्न और मोटे अनाज का कुल रकबा इस वर्ष 2.51 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल इसी समय तक 2.73 लाख हेक्टेयर था. यानी इसमें 0.22 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है.

ज्वार का रकबा 0.15 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष 0.24 लाख हेक्टेयर था. बाजरा की बुवाई 0.46 लाख हेक्टेयर में हुई, जो पिछले साल 0.53 लाख हेक्टेयर थी. रागी का क्षेत्र बढ़कर 0.17 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 0.07 लाख हेक्टेयर था.

मक्का की बुवाई 1.72 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले साल यह 1.88 लाख हेक्टेयर थी. छोटे मिलेट्स का रकबा 0.02 लाख हेक्टेयर पर स्थिर रहा.

तिलहनी फसलों में वृद्धि

तिलहनी फसलों के क्षेत्र में इस साल बढ़ोतरी दर्ज की गई है. 6 मार्च 2026 तक 2.29 लाख हेक्टेयर में तिलहन की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 2.18 लाख हेक्टेयर थी. यानी 0.12 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है.

तिलहन फसलों में मूंगफली की बुवाई 1.58 लाख हेक्टेयर में हुई, जो पिछले वर्ष 1.50 लाख हेक्टेयर थी. सूरजमुखी का क्षेत्र 0.19 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल 0.15 लाख हेक्टेयर था. तिल का रकबा लगभग स्थिर रहा और 0.49 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया, जबकि पिछले वर्ष यह 0.50 लाख हेक्टेयर था. अन्य तिलहन का क्षेत्र 0.03 लाख हेक्टेयर रहा.

सामान्य क्षेत्र के मुकाबले अभी भी कम

कृषि मंत्रालय के अनुसार ग्रीष्मकालीन फसलों का सामान्य क्षेत्र (2022-23 से 2024-25 का औसत) लगभग 75.37 लाख हेक्टेयर है. वर्ष 2025 में अंतिम बुवाई क्षेत्र 83.92 लाख हेक्टेयर रहा था. फिलहाल बुवाई का मौसम जारी है और आने वाले हफ्तों में कुल रकबे में और बढ़ोतरी की संभावना है.

विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम की स्थिति, सिंचाई की उपलब्धता और किसानों की फसल पसंद के आधार पर अगले कुछ सप्ताह में बुवाई के आंकड़ों में और बदलाव देखने को मिल सकता है.

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