
पश्चिमी उत्तर प्रदेश को गन्ना बेल्ट के तौर पर जाना जाता है (सांकेतिक तस्वीर)ग्रेटर नोएडा के इंटरनेशनल ट्रेड शो में चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के स्टॉल पर गन्ने की नवीन उन्नत चार किस्मों का प्रदर्शन किया गया है. उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद (UPCSR) द्वारा विकसित इन किस्मों का उद्देश्य प्रदेश में गन्ने की उत्पादकता और चीनी परता बढ़ाने के साथ किसानों की आय में वृद्धि करना तथा लाल सड़न रोग के प्रभाव को कम करना है. अब योगी सरकार के प्रयास से गन्ने की खेती में ‘मिठास’ बढ़ेगी.
ट्रेड शो में को.शा. 19231, को.शा. 18231, को.शा. 13235 और को.शा. 17231 किस्मों को प्रदर्शित किया गया है. इन किस्मों की उपज क्षमता लगभग 90 से 100 टन प्रति हेक्टेयर है. इन उन्नत किस्मों में गन्ने के प्रमुख रोग लाल सड़न (रेड रॉट) के प्रति रोगरोधी या प्रतिरोधी प्रवृत्ति भी पाई जाती है. इसके साथ ही इनमें अंकुरण और शुरुआती बढ़वार अच्छी होती है. वहीं, मिल में पेराई योग्य गन्नों की संख्या भी अधिक होने से गन्ने की उत्पादकता और चीनी उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है.

इन किस्मों की एक अन्य खासियत अच्छी पेड़ी क्षमता है. पेड़ी फसल का बेहतर उत्पादन होने से किसानों को अगली फसल तैयार करने में लागत कम करने के साथ अच्छा उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिल सकती है. नवीन उन्नत किस्मों के इस्तेमाल से किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ गन्ने की खेती को अधिक लाभकारी बनाने में सहायता मिल सकती है.
बता दें कि यूपी को भारत का 'शुगर का कटोरा' कहा जाता है. खासकर पश्चिमी यूपी में गन्ने की जबरदस्त खेती होती है. बंपर गन्ना पैदावार में यूपी के टॉप 10 जिलों में मेरठ परिक्षेत्र के 6 जिले शामिल हैं. जहां किसानों ने गन्ने का सर्वाधिक उत्पादन किया है. टॉप 10 गन्ना उत्पादक जिलों में मेरठ, हापुड़, गाजियाबाद, बुलंदशहर, बागपत और अलीगढ़ शामिल हैं. इतना ही नहीं टॉप टेन जिलों में लखीमपुर खीरी के अलावा प्रति हेक्टेयर सर्वाधिक उत्पादन में सभी जिले पश्चिमी उत्तरप्रदेश के ही हैं.
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