हिमाचल प्रदेश में सेब की खेती पर मारहिमाचल प्रदेश के सेब और अन्य गुठलीदार फलों की खेती इस समय गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है. प्रदेश के प्रमुख फल उत्पादक क्षेत्रों में इस बार सर्दियां बेहद सूखी साबित हो रही हैं. लंबे समय से बारिश और बर्फबारी न होने के कारण भूमि में नमी लगभग समाप्त हो चुकी है, जिसका सीधा असर बागवानी पर पड़ रहा है.
बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में फल पौधों को जरूरी चिलिंग ऑवर्स नहीं मिल पा रहे हैं. चिलिंग ऑवर्स की कमी से पौधों में फ्लावरिंग और फ्रूट सेट की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे आने वाली फसल पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है. यही वजह है कि इस समय खाद डालना, स्प्रे करना, पेस्ट लगाना और प्रूनिंग जैसे जरूरी बागवानी कार्य या तो ठप हो गए हैं या फिर विशेषज्ञों की सलाह पर रोके जा रहे हैं.
किसान और बागवान लगातार मौसम के बदलने और बारिश होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं. गांव कलना, पंचायत शिगला की किसान लता का कहना है कि काफी समय से बारिश नहीं हुई है, जिससे बोई गई फसलें प्रभावित हो रही हैं. सूखे के कारण पौधों में बीमारियां बढ़ रही हैं और नए पौधे भी नहीं लगाए जा पा रहे हैं. उन्होंने सरकार से किसानों की मदद करने की मांग की है.
रिटायर्ड डिप्टी रेंजर स्वरूप ठाकुर का कहना है कि यदि पौधों की जड़ों तक नमी नहीं पहुंचेगी तो पौधे मजबूत नहीं बनेंगे. इसका सीधा असर फ्लावरिंग पर पड़ेगा और फसल टूटने की आशंका बढ़ जाएगी. वहीं रिटायर्ड अध्यापक चतर सिंह ने उद्यान विभाग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई बागवान सही जानकारी के अभाव में गलत समय पर स्प्रे कर रहे हैं. उन्होंने सुझाव दिया कि जिस तरह शिक्षकों को छात्रों के परीक्षा परिणाम के आधार पर वेतनवृद्धि और प्रमोशन मिलता है, उसी तरह उद्यान विभाग के अधिकारियों को भी बागवानों के बाग गोद लेकर परिणाम आधारित जिम्मेदारी दी जानी चाहिए.
बागवानी विभाग के विषय विशेषज्ञ संजीव कुमार चौहान के अनुसार जिन क्षेत्रों में ड्रिप इरिगेशन या सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वहां सीमित बागवानी कार्य किए जा सकते हैं. लेकिन जहां सूखे की स्थिति है और पानी की व्यवस्था नहीं है, वहां फिलहाल सभी बागवानी कार्य रोकना ही बेहतर है.
फिलहाल हिमाचल प्रदेश के किसान और बागवान पूरी तरह मौसम पर निर्भर हैं. यदि जल्द बारिश या बर्फबारी नहीं हुई, तो आने वाले समय में सेब और अन्य गुठलीदार फलों की पैदावार को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.(रिपोर्ट: विशेषर नेगी)
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