तापमान बढ़ने से गेहूं पर खतरे की आशंकाभारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जनवरी में उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक न्यूनतम और अधिकतम तापमान का पूर्वानुमान जारी किया है. आईएमडी के इस पूर्वानुमान ने गेहूं किसानों में चिंता की लहर पैदा कर दी है. किसानों को लगता है कि फरवरी में क्या होगा, जो अनाज में दाने भरने का सबसे अहम समय होता है.
हालांकि, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) को ऐसे किसी भी खतरे से निपटने का भरोसा है क्योंकि गेहूं की फसल 2025 में फरवरी की गर्मी में भी बच गई थी, जब औसत न्यूनतम तापमान 1901 के बाद सबसे अधिक था.
IMD ने कहा है कि जनवरी 2026 में पूरे महीने का न्यूनतम तापमान उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों के साथ-साथ दक्षिण भारत में सामान्य से अधिक रहने की संभावना है. साथ ही, अधिकतम तापमान उत्तर-पश्चिम के अधिकांश हिस्सों और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में "सामान्य से अधिक" रहने की संभावना है.
पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और बिहार प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य हैं जो IMD के सेंट्रल और उत्तर-पश्चिमी हिस्से के अंतर्गत आते हैं. इन राज्यों में तापमान में कोई बड़ा बदलाव गेहूं की पैदावार को संकट में डाल सकता है. इसलिए किसानों में अभी से चिंता है.
भारत में गेहूं का उत्पादन खाद्य सुरक्षा बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी है. फरवरी 2022 में बहुत अधिक तापमान के कारण गेहूं उत्पादन में 19 लाख टन (mt) जैसी "छोटी" गिरावट के कारण निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. इसे पिछले साल 1179 लाख टन के रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद अभी तक हटाया नहीं गया है.
ICAR के उप महानिदेशक डीके यादव ने कहा, "पिछले कुछ वर्षों में गेहूं की किस्मों का पैटर्न बदल गया है. सभी किस्मों में से, उत्तर-पश्चिमी मैदान और केंद्रीय क्षेत्र में 75 प्रतिशत तक के प्रमुख क्षेत्रों में DBW 187, HD 3226 और HD 3086 जैसी किस्मों की बुवाई देखी जा रही है. ये सभी किस्में गर्मी को सहने वाली हैं, खासकर अंतिम चरण में."
यादव ने कहा कि किसान जिन किस्मों को पसंद करते हैं, उनमें मुख्य गेहूं की किस्में हैं-DBW 327, DBW 187, DBW 303, PBW 872, HD 3226, HD 3086, HI 8759, WH 1105 और GW 366. ऐसे में यह देखना होगा कि फसल की ग्रोथ के किस स्टेज पर तापमान बढ़ता है, क्योंकि बुवाई का समय हर क्षेत्र में अलग-अलग होता है.
15 फरवरी से पहले ज्यादा तापमान गेहूं के लिए अधिक खतरा पैदा करता है. इस बारे में यादव ने कहा कि तापमान में कितनी बढ़ोतरी होती है, उस पर ध्यान रखना बहुत ही जरूरी है. उन्होंने कहा कि आम तौर पर 26-27 डिग्री सेल्सियस दिन के तापमान तक कोई समस्या नहीं होगी, और अगर गर्मी 28-29 डिग्री सेल्सियस पर लंबे समय तक बनी रहती है, तो समस्या हो सकती है.
इसके अलावा, उन्होंने बताया कि ICAR ने अक्टूबर में बुवाई के लिए उपयुक्त जल्दी बोई जाने वाली किस्में भी विकसित की हैं, और उन फसलों में फरवरी तक दाना भरने का काम पूरा हो जाएगा, इसलिए अधिक फर्क नहीं पड़ेगा.
देश में गेहूं का सामान्य रकबा 312.35 लाख हेक्टेयर है और पिछले साल बुवाई 328.04 लाख हेक्टेयर के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस साल गेहूं का रकबा एक और रिकॉर्ड बनाएगा. सरकार ने 2025-26 में 1190 लाख टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य तय किया है, जिसकी कटाई अप्रैल से शुरू होगी.
FAQs
1. गेहूं की बुवाई का सही समय क्या है?
उत्तर भारत में अक्टूबर के अंत से नवंबर के तीसरे हफ्ते तक सबसे उपयुक्त समय माना जाता है.
2.गेहूं में पीला पड़ना किस कमी का संकेत है?
ज्यादातर मामलों में यह नाइट्रोजन की कमी या जल प्रबंधन की समस्या होती है.
3.गेहूं में कुल कितनी सिंचाई की जरूरत होती है?
मिट्टी और मौसम के अनुसार 4 से 6 सिंचाई पर्याप्त होती है.
4.गेहूं की फसल में मुख्य रोग कौन-से हैं?
पीला रतुआ, भूरा रतुआ, कंडुआ रोग प्रमुख हैं.
5.गेहूं की कटाई कब करें?
जब बालियां सुनहरी हो जाएं और दाने सख्त हों—आमतौर पर मार्च–अप्रैल में.
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