हरियाणा में विरोध के बाद धान खरीदी में ‘शर्ति‍या राहत’, MSP पर ज्‍यादा उपज बेच सकेंगे किसान

हरियाणा में विरोध के बाद धान खरीदी में ‘शर्ति‍या राहत’, MSP पर ज्‍यादा उपज बेच सकेंगे किसान

हरियाणा सरकार ने खरीफ सीजन 2026-27 में निर्धारित उपज सीमा से अधिक धान की खरीद को मंजूरी दी है. सत्यापन के बाद अतिरिक्त उपज भी MSP पर खरीदी जाएगी. जानिए बदलाव से जुड़ी पूरी जानकारी...

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हरियाणा में विरोध के बाद धान खरीदी में ‘शर्ति‍या राहत’, MSP पर ज्‍यादा उपज बेच सकेंगे किसानहरियाणा में धान खरीदी पर बड़ा अपडेट (सांकेतिक तस्‍वीर)

हरियाणा में धान की सरकारी खरीद को लेकर किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. अब निर्धारित उपज सीमा से अधिक धान भी सत्यापन के बाद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा जाएगा. सरकार ने सभी जिलों के उपायुक्तों (DC) को निर्देश दिए हैं कि किसानों की वास्तविक उपज की जांच कर अतिरिक्त धान की खरीद सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें अपनी पूरी फसल बेचने में परेशानी न हो.

इस आधार पर तय हुई थी लिमिट

खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए हरियाणा में जिलेवार धान की उपज की लिमिट पिछले तीन वर्षों की औसत पैदावार के आधार पर निर्धारित की गई थी. हालांकि, किसानों ने शिकायत की कि इस साल कई मामलों में वास्तविक उत्पादन तय सीमा से अधिक है. ऐसे में निर्धारित सीमा के कारण वे अपनी पूरी उपज सरकारी खरीद केंद्रों पर नहीं बेच पा रहे हैं. किसानों की शिकायतों पर विचार करने के बाद कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने अतिरिक्त उपज की खरीद के लिए प्रक्रिया साफ की है.

आवेदन के बाद 48 घंटे में जांच

कृषि विभाग के निर्देशों के मुताबिक, निर्धारित सीमा से अधिक धान पैदा होने पर किसान संबंधित हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के सचिव को लिखित आवेदन दे सकते हैं. इसके बाद सचिव संबंधित राजस्व अधिकारियों या कृषि विभाग को उपज के सत्यापन के लिए मामला भेजेंगे. 

जांच के दौरान किसान के पिछले उत्पादन और बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड, जहां उपलब्ध हों, उनकी मदद ली जाएगी. संबंधित अधिकारी को 48 घंटे के भीतर सत्यापन पूरा करना होगा. अतिरिक्त उपज की पुष्टि होने पर निर्धारित सीमा से अधिक धान की भी सरकारी खरीद की जाएगी.

BKU चढ़ूनी ने उठाए खरीद प्रक्रिया पर सवाल

हिंदुस्‍तान टाइम्‍स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राज्‍य सरकार के इस फैसले के बावजूद भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने खरीद प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई है. संगठन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कृषि विभाग के निदेशक को पत्र लिखकर MSP पर धान बेचने में आ रही दिक्कतों को दूर करने की मांग की है. 

उन्होंने पिछले तीन वर्षों की औसत उपज को मौजूदा खरीद सीमा का आधार बनाने पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि पिछली कुछ फसलों के दौरान खराब मौसम और अत्यधिक बारिश के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ था. इन नुकसानों का रिकॉर्ड ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर भी उपलब्ध है.

किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने बताया कि चालू खरीफ सीजन में मौसम अनुकूल रहने से धान की पैदावार बढ़ी है. इसके बावजूद निर्धारित सीमा और सत्यापन की जटिल प्रक्रिया के कारण किसानों को अपनी पूरी फसल बेचने में परेशानी हो रही है. उन्होंने खरीद सीमा में 10 प्रतिशत की छूट देने और अतिरिक्त उपज की खरीद के लिए प्रक्रिया आसान बनाने की मांग की है.

MFMB पोर्टल पर जांच के बाद सुधारे गए रिकॉर्ड

रिपोर्ट के मुताबिक, कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि मेरी फसल मेरा ब्यौरा (MFMB) पोर्टल पर पंजीकृत किसानों का भौतिक सत्यापन कराया गया था. इस दौरान परमल धान के नाम पर पंजीकृत हजारों एकड़ क्षेत्र में बासमती की खेती पाए जाने के बाद संबंधित रिकॉर्ड से ऐसी एंट्री हटाई गई हैं. रजिस्‍ट्रेशन में सुधार के बाद सरकार भारतीय खाद्य निगम (FCI) की ओर से निर्धारित 59 लाख मीट्रिक टन के खरीद आवंटन के भीतर किसानों की पूरी उपज खरीदने में सक्षम होगी.

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