सोनालीका ने खेत में रचा ‘दम’ का विश्व रिकॉर्डउत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के सिकंदराबाद में सोनालीका ट्रैक्टर्स ने एक अनोखा विश्व रिकॉर्ड बनाया है. कंपनी ने अपने दो गोल्ड सीरीज ट्रैक्टरों की मदद से खेत में हिंदी शब्द ‘दम’ की विशाल आकृति तैयार की. यह आकृति 125 फीट ऊंची और 272 फीट चौड़ी है. इसे बनाने के लिए करीब 34,000 वर्ग फीट जमीन का इस्तेमाल किया गया. इस उपलब्धि को वर्ल्ड रिकॉर्ड्स इंडिया ने मान्यता दी है. कंपनी ने इस रिकॉर्ड के जरिए किसानों की मेहनत, हिम्मत और हर चुनौती का सामना करने की ताकत को दिखाने की कोशिश की है.
सोनालीका ट्रैक्टर्स ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के सिकंदराबाद स्थित एक खेत में यह अनोखा प्रयोग किया. इसके लिए कंपनी की गोल्ड सीरीज के दो ट्रैक्टरों का इस्तेमाल किया गया. इन ट्रैक्टरों ने खेत की जुताई करके हिंदी शब्द ‘दम’ की बड़ी आकृति तैयार की. इस आकृति को बनाने में सोनालीका गोल्ड DI 745 III और सोनालीका गोल्ड DI 55 III ट्रैक्टर लगाए गए. दोनों ट्रैक्टरों के साथ 10 फीट का रोटावेटर जोड़ा गया था. रोटावेटर खेती में मिट्टी को तैयार करने और जुताई जैसे कामों में इस्तेमाल होने वाला उपकरण है.
ट्रैक्टरों की मदद से खेत में इतने बड़े आकार में हिंदी शब्द तैयार करना इस रिकॉर्ड की खास बात रही. कंपनी के मुताबिक, इस आकृति ने 34,000 वर्ग फीट क्षेत्र को कवर किया. वर्ल्ड रिकॉर्ड्स इंडिया ने इसे हिंदी शब्द ‘दम’ का धरती पर बनाया गया सबसे बड़ा स्वरूप मानते हुए रिकॉर्ड के रूप में मान्यता दी.
सोनालीका ट्रैक्टर्स ने इस रिकॉर्ड को अपने ‘जीतने का दम’ अभियान से जोड़ा है. कंपनी के अनुसार, ‘दम’ केवल एक शब्द नहीं है, बल्कि यह किसानों की मेहनत, हिम्मत और अपने लक्ष्य को हासिल करने की ताकत को भी दिखाता है. किसान हर फसल सीजन में नई उम्मीदों के साथ खेतों में काम शुरू करते हैं. मौसम की चुनौतियों, खेती की लागत और फसल की अच्छी पैदावार जैसी कई बातों के बीच वे लगातार मेहनत करते हैं. ऐसे में कंपनी ने खेत में ‘दम’ शब्द की विशाल आकृति बनाकर किसानों के इसी जज्बे को सम्मान देने का प्रयास किया है. कंपनी का कहना है कि यह रिकॉर्ड उसी मिट्टी पर बनाया गया है, जहां किसान हर दिन मेहनत करके अपनी फसल तैयार करते हैं. इस पहल के जरिए खेती और किसानों के जीवन में ट्रैक्टरों की भूमिका को भी सामने लाया गया है.
इस रिकॉर्ड को बनाने में सोनालीका की गोल्ड सीरीज के ट्रैक्टरों का इस्तेमाल किया गया. कंपनी के अनुसार, यह उसकी आधुनिक ट्रैक्टर सीरीज है, जिसे खेती के अलग-अलग कामों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. गोल्ड सीरीज में बड़े इंजन, कई गियर विकल्प और ट्रैक्टर को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं. कंपनी के मुताबिक, इस सीरीज में 3532 सीसी का E3.5 इंजन दिया गया है. इसके अलावा, मॉडल के अनुसार 16 फॉरवर्ड और 4 रिवर्स या 12 फॉरवर्ड और 3 रिवर्स गियर के विकल्प मिलते हैं.
इन सुविधाओं का उद्देश्य खेत में काम करते समय किसानों को जरूरत के अनुसार ट्रैक्टर की गति और ताकत का इस्तेमाल करने में मदद करना है. हालांकि, ट्रैक्टर की वास्तविक क्षमता और काम का प्रदर्शन खेती की स्थिति, मिट्टी और इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों पर भी निर्भर करता है.
सोनालीका के मुताबिक, उसकी गोल्ड सीरीज के ट्रैक्टर होशियारपुर स्थित कंपनी के एकीकृत ट्रैक्टर निर्माण संयंत्र में तैयार किए जाते हैं. यहां ट्रैक्टर बनाने की प्रक्रिया में रोबोट और ऑटोमेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. ऑटोमेशन का मतलब है कि उत्पादन के कुछ काम मशीनों और स्वचालित प्रणालियों की मदद से किए जाते हैं. इससे निर्माण प्रक्रिया को बेहतर तरीके से संचालित करने और गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है. कंपनी का कहना है कि आधुनिक तकनीक के जरिए ऐसे ट्रैक्टर तैयार करने पर ध्यान दिया जा रहा है, जो किसानों की जरूरतों को पूरा कर सकें. खेती में ट्रैक्टर का इस्तेमाल जुताई, बुवाई के लिए खेत तैयार करने और दूसरे कृषि कार्यों में किया जाता है. इसलिए ट्रैक्टर की क्षमता और उसमें मिलने वाली सुविधाएं किसानों के लिए महत्वपूर्ण होती हैं.
इस विश्व रिकॉर्ड पर इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर रमन मित्तल ने खुशी जताई. उन्होंने कहा कि किसानों का हौसला और कुछ नया करने की इच्छा कंपनी को लगातार बेहतर काम करने की प्रेरणा देती है. उनके मुताबिक, कंपनी के 30 साल के सफर में किसानों की मेहनत और उनकी उम्मीदों ने अहम भूमिका निभाई है. खेत में हिंदी शब्द ‘दम’ का विशाल स्वरूप बनाना इसी भावना को दिखाने का एक प्रयास है. रमन मित्तल ने कहा कि कंपनी के लिए यह खास बात है कि रिकॉर्ड किसी इमारत या दूसरे स्थान पर नहीं, बल्कि खेत की मिट्टी पर बनाया गया. उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की मेहनत कंपनी को नए विचारों और तकनीक पर काम करने की प्रेरणा देती है.
सोनालीका ट्रैक्टर्स का यह प्रयोग खेती में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की क्षमता को एक अलग अंदाज में दिखाता है. दो ट्रैक्टरों की मदद से खेत में इतने बड़े आकार में हिंदी शब्द तैयार करना तकनीक और कृषि उपकरणों के इस्तेमाल का एक अनोखा उदाहरण है. इस रिकॉर्ड के जरिए कंपनी ने अपने ट्रैक्टरों के साथ किसानों की मेहनत और हौसले को भी जोड़ने की कोशिश की है. वहीं, आधुनिक ट्रैक्टर तकनीक किसानों के लिए खेती के कामों को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. बुलंदशहर के सिकंदराबाद में बनाया गया हिंदी शब्द ‘दम’ अब सोनालीका ट्रैक्टर्स की एक खास उपलब्धि के रूप में सामने आया है. वर्ल्ड रिकॉर्ड्स इंडिया से मिली मान्यता के साथ कंपनी ने किसानों के जज्बे को एक बड़े स्वरूप में पेश किया है.
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