किसानों से बात करते हुए डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदेमहाराष्ट्र के विदर्भ में बारिश के लंबे अंतराल ने सोयाबीन किसानों की चिंता बढ़ा दी है. अकोला और बुलढाणा जिले में कई खेतों में सोयाबीन की फसल खड़ी है, लेकिन किसानों के मुताबिक फलियों में दाना पूरी तरह नहीं भर रहा है. इससे इस सीजन उत्पादन में कमी की आशंका जताई जा रही है. इसी स्थिति का जायजा लेने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अकोला और बुलढाणा के खेतों में पहुंचे. उन्होंने किसानों से सीधे बातचीत की और सोयाबीन की फसल की स्थिति देखी. किसानों ने उन्हें बारिश की कमी और खेती पर बढ़ते खर्च की जानकारी दी.
किसानों की समस्याएं सुनने के बाद एकनाथ शिंदे ने आज तक से बातचीत में कहा कि इस साल किसानों के सामने बड़ा संकट है और सरकार भी बड़ी मदद करेगी. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के खेतों तक पहुंचकर उनकी समस्याएं सुन रही है और उनकी स्थिति को खुद देख रही है. शिंदे ने दशहरा और दिवाली से पहले किसानों को राहत का भरोसा भी दिया. उन्होंने कहा कि किसानों की दशहरा-दिवाली काली नहीं होने दी जाएगी और सरकार उनकी मदद के लिए खड़ी है.
अकोला-बुलढाणा के किसानों के मुताबिक कई इलाकों में लंबे समय से पर्याप्त बारिश नहीं हुई है. किसानों का कहना है कि करीब 50 दिन से बारिश का इंतजार है. बारिश के अभाव में सोयाबीन के पौधों की बढ़वार प्रभावित हुई है और कई जगह फलियों में दाना भरने की स्थिति कमजोर है. किसानों ने बताया कि बीज, खाद, दवाइयों और मजदूरी पर पहले ही बड़ी रकम खर्च हो चुकी है. फसल की पैदावार घटने पर खेती की लागत निकालना और कर्ज चुकाना मुश्किल हो सकता है.
अकोला के व्याला गांव में किसान ने उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सामने अपनी आर्थिक परेशानी बताई. किसान ने कहा कि खेती के लिए बैंक से कर्ज लिया था, लेकिन खेती के दूसरे खर्चों के लिए पैसे नहीं थे. किसान ने बताया कि खेती के लिए पैसे जुटाने के लिए उनकी पत्नी का मंगलसूत्र तक गिरवी रखना पड़ा. बारिश नहीं होने से फसल प्रभावित हुई और अब परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. अपनी स्थिति बताते हुए किसान भावुक हो गए.
किसानों ने बताया कि फसल में लाखों रुपये लगाने के बाद अब उत्पादन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. पैदावार कम होने पर आमदनी घटेगी, जबकि बैंक और निजी कर्ज चुकाने का दबाव बना रहेगा. किसानों का कहना है कि दशहरा और दिवाली जैसे त्योहार सामने हैं, लेकिन फसल खराब होने की स्थिति में परिवार का खर्च चलाना और त्योहार मनाना भी चुनौती बन सकता है.
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