
मध्य प्रदेश में इन दिनों बड़े हिस्से में सोयाबीन की फसल किसानों के द्वारा लगाई गई है.सोयाबीन की फसल इस समय फलन एवं पॉड निर्माण की अवस्था में है. इस दौरान लगातार बारिश, अधिक नमी और अनुकूल मौसम की स्थिति के कारण फसल में विभिन्न फफूंदजनित रोगों का खतरा बढ़ सकता है. किसानों को फसल का नियमित निरीक्षण करने और रोग के लक्षण दिखाई देने पर कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार फफूंदनाशक का उपयोग करने की सलाह दी गई है.
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय सोयाबीन में चारकोल रॉट, गर्दन सड़न, पॉड ब्लाइट और राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट जैसे रोगों पर नजर रखना जरूरी है. इन रोगों के प्रमुख लक्षण और नियंत्रण के लिए दी गई अनुशंसाएं इस प्रकार हैं.
चारकोल रॉट से संक्रमित सोयाबीन पौधों की पत्तियां छोटी और पीली होने लगती हैं तथा बाद में उनका रंग भूरा हो सकता है. रोग बढ़ने पर पौधे कमजोर होकर प्रभावित हो सकते हैं.इसके नियंत्रण के लिए दी गई अनुशंसा के अनुसार पायरोक्लोस्त्रोबिन 333 ग्राम/लीटर SC की 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर मात्रा पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
गर्म और नम वातावरण में गर्दन सड़न का प्रकोप बढ़ सकता है. इस रोग में नवजात पौधों और तनों पर सड़न तथा विल्ट के लक्षण दिखाई दे सकते हैं. प्रभावित हिस्सों पर लाल-भूरे रंग के सरसों के दाने जैसे गोल स्क्लेरेशिया दिखाई दे सकते हैं. गंभीर प्रकोप में पौधे मुरझाकर गिर सकते हैं.
नियंत्रण के लिए दी गई अनुशंसा में पायरोक्लोस्त्रोबिन 163 ग्राम/लीटर + इपॉक्सीकोनाजोल 50 ग्राम/लीटर SE की 750 मिली प्रति हेक्टेयर या कार्बेन्डाजिम 12% + मैन्कोजेब 63% की 1.25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर मात्रा पानी में घोलकर छिड़काव करने की बात कही गई है.
पॉड ब्लाइट फफूंद, बीज एवं भूमि जनित रोग है. लगातार बारिश और खेत में अत्यधिक नमी रहने पर इसके प्रकोप की स्थिति बन सकती है. इसलिए पॉड निर्माण के समय किसानों को फसल की विशेष निगरानी करने की सलाह दी गई है.
इसके नियंत्रण के लिए टेब्यूकोनाजोल 25.9 EC की 625 मिली प्रति हेक्टेयर या टेब्यूकोनाजोल 10% + सल्फर 65% की 1.25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर मात्रा से छिड़काव की अनुशंसा दी गई है.
राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट गर्म और नम वातावरण में फैल सकता है. यह भूमि एवं बीज जनित फफूंद से संबंधित रोग है.इसके प्रकोप में पत्तियों की निचली सतह पर छोटे या बड़े भूरे-लाल अण्डाकार धब्बे दिखाई दे सकते हैं.
इसके नियंत्रण के लिए टेब्यूकोनाजोल 10% + सल्फर 65% की 1.25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर या पायरोक्लोस्त्रोबिन 20% WG की 500 ग्राम प्रति हेक्टेयर मात्रा से छिड़काव की अनुशंसा दी गई है.
सोयाबीन में रोगों का नियंत्रण समय पर करना जरूरी है. किसान खेत का नियमित निरीक्षण करें और पत्तियों, तनों तथा पॉड में दिखाई देने वाले असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज न करें. रोग की सही पहचान के बाद ही संबंधित फफूंदनाशक का उपयोग करें.
ऊपर दी गई दवाओं और उनकी मात्रा विभागीय जानकारी के आधार पर है.इस्तेमाल या प्रकाशित करने से पहले स्थानीय कृषि विभाग की नई सलाह और दवा के लेबल पर फसल, रोग, मात्रा और पंजीकरण की जानकारी जरूर जांच लें.
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