बिहार में मॉनसून अब भी कमजोर, फिर भी धान रोपनी और मक्का बुवाई में तेज उछाल

बिहार में मॉनसून अब भी कमजोर, फिर भी धान रोपनी और मक्का बुवाई में तेज उछाल

बिहार में मॉनसून सामान्य से 36% कमजोर रहने के बावजूद अगस्त की शुरुआत में हुई अच्छी बारिश से खरीफ खेती को गति मिली है. धान की रोपनी 85% और मक्का की बुवाई 94% लक्ष्य तक पहुंच चुकी है, लेकिन कई इलाकों में किसान अभी भी पानी की कमी, गिरते भूजल स्तर और बाढ़ जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं.

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बिहार में मॉनसून अब भी कमजोर, फिर भी धान रोपनी और मक्का बुवाई में तेज उछालखराब मॉनसून के बावजूद खेती में तेजी

बिहार में मॉनसून कमजोर है. बारिश अभी भी सामान्य से कम है. हालांकि अगस्त की शुरुआत के साथ मौसम के बदले मिजाज ने किसानों से लेकर आम आदमी को काफी राहत पहुंचाई है. मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अगर बात करें तो अभी तक अगस्त में सामान्य से अधिक बारिश हुई है. वहीं, धान की रोपनी अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर है. इसके साथ ही खरीफ मक्का की खेती करीब-करीब समाप्ति की ओर है. हालांकि, इन तमाम अच्छी खबरों के बीच कुछ ऐसी भी खबरें हैं, जहां अभी तक कई खेत खाली हैं. वहीं, धान की खेती कर रहे किसान, जहां पानी की किल्लत है, वहां उनकी चिंता फसल को बचाने की बढ़ गई है.

खरीफ की खेती लक्ष्य के करीब

कृषि विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 8 अगस्त तक राज्य में कुल खरीफ की खेती 42.203 लाख हेक्टेयर की तुलना में करीब 36.123 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गई है, जो करीब पूरे लक्ष्य का 85 फीसदी है. जिसमें दो मुख्य बड़ी फसलें धान और मक्का की खेती करीब-करीब अपने लक्ष्य के आसपास है. इसमें धान की रोपनी निर्धारित लक्ष्य 37.914 लाख हेक्टेयर की तुलना में 32.568 लाख हेक्टेयर से अधिक हो चुकी है, जो 85 फीसदी के आसपास है.

वहीं, मक्का की खेती निर्धारित लक्ष्य 2.703 लाख हेक्टेयर की तुलना में 2.552 लाख हेक्टेयर से अधिक, यानी 94% के आसपास हो चुकी है. इसके साथ ही दलहन की खेती निर्धारित लक्ष्य 0.080 की तुलना में 0.044 यानी 55%, तिलहन 0.130 की तुलना में 0.069 करीब 53% से अधिक है. मिलेट्स की खेती 0.413 की तुलना में 0.212 से अधिक, जो 51% के आसपास है. (यह सभी आंकड़े लाख हेक्टेयर में हैं.)

अगस्त में बदला मौसम तो खेती में उछाल

अल नीनो वर्ष में इस बार मॉनसून कमजोर है. मौसम विभाग के आंकड़ों की बात करें तो अभी तक सामान्य से करीब 36% कम बारिश हुई है. हालांकि, अगस्त के शुरुआती दिनों के साथ ही मौसम के मिजाज में काफी बदलाव देखने को मिला है और अगस्त महीने में सामान्य तौर पर बारिश 62.8 मिमी होती है, उसकी तुलना 9 प्रतिशत के आसपास अधिक बारिश हुई है.

वहीं, अगस्त के महीने में हुई बारिश की वजह से खरीफ फसल की खेती में भी रफ्तार देखने को मिली है. जहां 22 जुलाई तक खरीफ की खेती करीब 51% के आसपास हुई थी, वहीं करीब 15 से अधिक दिनों के बीच यह लक्ष्य 85 प्रतिशत के आसपास पहुंच गया है. मुख्य दो फसलों की बात करें तो धान की खेती में 36% की बढ़ोतरी हुई है, वहीं मक्का की खेती में 7 प्रतिशत, जबकि अन्य फसलों में करीब 5 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है.

फसल को बचाने की जद्दोजहद में लगा किसान

गया जिले के किसान सुनील कुमार कहते हैं कि आज से करीब 15 दिन पहले उनकी धान की रोपनी हो गई है. लेकिन हाल के दिनों में फसल को बचाना अपने आप में बहुत बड़ा चैलेंज बनता जा रहा है. जहां कभी पानी 50 से 60 फीट तक मिल जाता था, वहां हाल के दिनों में जलस्तर अतिरिक्त 10 से 20 फीट नीचे चला गया है. साथ ही रोगों का खतरा लगातार बढ़ रहा है. हालात ये हैं कि टिकारी इलाके के लोग मोरहर नदी के सहारे धान की खेती करते हैं, लेकिन हाल के समय में नदी में पानी ही नहीं है. वहीं, जो पानी है, वह नहरों में भेजा जा रहा है.

तेजस्वी यादव के विधानसभा में क्या हाल?

एक ओर जहां मॉनसून की बेरुखी की वजह से किसान परेशान हैं, वहीं वैशाली जिले के राघोपुर इलाके के करीब-करीब अधिकांश किसान खरीफ फसल की खेती इसलिए नहीं कर पाते हैं, क्योंकि बाढ़ का खतरा रहता है. फतेपुर और रामपुर गांव के किसान जोगा राम, सुरेश राय और नागेश्वर महतो कहते हैं कि हम लोग रबी में ही गेहूं और मक्का की खेती करते हैं. खरीफ में खेत खाली रहता है. क्योंकि यहां पर न तो सिंचाई की बेहतर सुविधा है और न ही बिजली समय से रहती है.

वहीं, जब उनसे हमने वैकल्पिक फसलों की खेती के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि यहां पर कोई भी कृषि विभाग का अधिकारी या वैज्ञानिक नहीं आते हैं और न ही वह हमें बताते हैं कि खरीफ में अगर हम धान की खेती नहीं करते हैं तो उसकी जगह पर कौन-सी फसल की खेती करें. इसकी वजह से इलाके का एक बहुत बड़ा भूभाग खरीफ फसल की खेती से अछूता रह जाता है.

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