मुजफ्फरनगर में कल से पशुधन मेला, खेती से जुड़े सभी नस्लों के पशुओं का होगा जुटान 

मुजफ्फरनगर में कल से पशुधन मेला, खेती से जुड़े सभी नस्लों के पशुओं का होगा जुटान 

खेती के काम को आसान बनाने वाले और किसान की आजीविका में इजाफा करने वाले सभी पशु, कृष‍ि कार्य को पूर्णता प्रदान करते हैं. इसीलिए खेती में पशुधन, किसान का पूरक है, जिनके बिना खेती अधूरी मानी गई है. खेती में किसान के हमराही पशुओं का एक अनूठा मेला 06 अप्रैल से यूपी के मुजफ्फरनगर में शुरू हो रहा है. किसानों और पशुओं की इस महफिल में तमाम नस्ल के पशुओं का जमावड़ा होगा.

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मुजफ्फरनगर में कल से पशुधन मेला, खेती से जुड़े सभी नस्लों के पशुओं का होगा जुटानयूपी के मुजफ्फरनगर में कल से शुरू होगा पशु प्रदर्शनी एवं किसान मेला, फोटो साभार : यूपी सरकार

खेती किसानी, सामूहिक तौर पर किया जाने वाला एक सामाजिक कार्य है. खेती के अनिवार्य घटक के तौर पर किसान के साथ पशु भी खेतिहर समाज के ही अंग हैं. इनमें गाय, बैल, भैंस, भेड़, बकरी, मछली, कुक्कुट, बतख और मधुमक्खी ही नहीं, बल्कि कुत्ता एवं घोड़ा जैसे सभी पालतू पशु पक्षी शुमार हैं. इनमें से किसी एक की भी कमी, खेती के समूचे तंत्र को प्रभावित करती है. इसीलिए ये सभी जीव, किसान के लिए 'पशुधन' माने गए हैं.

यूपी के मुजफ्फरनगर में दो दिन तक चलने वाले 'पशु प्रदर्शनी एवं किसान मेले' में देश के तमाम हिस्सों से आए पशुधन की न सिर्फ प्रदर्शनी होगी, बल्कि इनके हुनर से रूबरू कराने वाली तमाम रोचक प्रतियोगितायें भी आयोजित की जाएगी. केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय द्वारा आयोजित इस मेले में किसान और वैज्ञानिक, मिल - बैठ कर खेती में पशुधन के तार्किक इस्तेमाल पर भी गंभीर मंथन करेंगे.

गडकरी करेंगे मेले का आगाज

मंत्रालय द्वारा जारी कार्यक्रम के मुताबिक इस मेले का आयोजन मुजफ्फरनगर स्थित विशालकाय प्रदर्शनी मैदान में होगा. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी इस मेले का आगाज करेंगे. इस मौके पर मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री संजीव बालियान और यूपी के कृष‍ि मंत्री सूर्यप्रताप शाही भी मौजूद रहेंगे.

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इसके बाद प्रतियोगिता एवं विचार मंथन सत्र आयोजित होगा. इसमें गोवंश, भैंस, भेड़ और बकरियों की तमाम रोचक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी. इसके साथ ही तीन अलग अलग सत्र में पशुधन के लाभप्रद उपयोग पर वैज्ञानिकों के साथ परिचर्चा होगी. इस सत्र के अंत में किसान और वैज्ञानिक, खेती में पशुधन के बेहतर इस्तेमाल को लेकर विस्तृत चर्चा करेंगे.

इसके बाद सायं कालीन सत्र में ग्रामीण संस्कृति से जुड़े लोक संगीत और रंगमंच के रोचक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे. पशु प्रदर्शनी में गोवंश की प्रमुख नस्ल साहीवाल, गिर, थारपारकर और संकर नस्ल की गायों के अलावा भैंसों की मशहूर नस्ल मुर्रा भी श‍िरकत करेगी. इसके अलावा मेले में भेड़, बकरी और घोड़ों की भी उन्नत किस्में देखने को मिलेंगी.

समापन सत्र

मेले के दूसरे और अंतिम दिन की शुरुआत में घोड़ा और गोपालकों की प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी. इसके अलावा वैज्ञानिक एवं किसानों के संवाद का दूसरा चरण होगा. इसमें पशुपालन से जुड़े वैज्ञानिक पहलुओं पर चर्चा होगी. दोपहर बाद समापन सत्र में बतौर मुख्य अत‍िथ‍ि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह का संबोधन होगा. इस दौरान यूपी के पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह और केंद्रीय राज्य मंत्री संजीव बालियान भी मौजूद रहेंगे. इस सत्र में मेले के दौरान आयोजित तमाम प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित भी किया जाएगा.

किसान सीखेंगे पशुधन प्रबंधन के गुर

मेले में किसानों और पशुपालकों को पशु धन के रख रखाव और पालन पोषण से लेकर इनके प्राथमिक स्वदेशी उपचार की तकनीक भी सिखाई जाएगी. इसके अलावा पशुधन की नस्ल सुधार को लेकर पशु गर्भाधान से जुड़ी आधुनिक तकनीकों, पशुधन के भोजन, रहन सहन और पशुओं से मिलने वाले उत्पादों की प्रसंस्करण विध‍ियों से भी किसानों को परिचित कराया जाएगा. जिससे किसान 'पशुधन प्रबंधन' के बेहतर गुर सीख कर अपनी आजीविका में इजाफा कर सकें. 

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