अंडों का प्रतीकात्मक फोटो. ग्राहक बाजार में अंडा खरीदते वक्त छांट-छांटकर बड़े अंडे निकालता है. जबकि दुकानदार छोटे-बड़े अंडे मिलाकर ग्राहक को बेचना चाहता है. लेकिन छोटे अंडे लेते वक्त ग्राहक को लगता है कि छोटे अंडे देकर उसे ठगा जा रहा है. जबकि दुकानदार छांट-छांटकर बड़ा अंडा लेने पर आनाकानी करता है. लेकिन पोल्ट्री मालिक ऐसा दावा करते हैं कि छोटा अंडा ही सेहत के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है. इसके पीछे वो छोटे अंडे की बहुत सारी खूबियां भी गिनाते हैं. जिम जाने वाले युवा भी छोटा अंडा खाना पसंद करते हैं. जबकि कुछ पोल्ट्री संचालकों का कहना है कि यह धारणा सिर्फ छोटा अंडा बेचने के लिए बनाई गई है.
खासतौर से अंडे को बढ़ते हुए बच्चों के लिए एक बहुत अच्छी डाइट के रूप में देखा जाता है. जिस परिवार में अंडा खाया जाता है वहां डायटिशियन और डॉक्टर बढ़ते हुए बच्चे को अंडा खिलाने की सलाह देते हैं. वहीं एम्स के डॉक्टरों की एक टीम ने नई शिक्षा नीति में बच्चों के लिए मिड-डे मील का मेन्यू सुझाते हुए उसमे अंडे को शामिल करने की सिफारिश की है.
पोल्ट्री फार्म संचालक और पोल्ट्री कंसलटेंट अनिल का कहना है, “अंडे देने वाली मुर्गी को पोल्ट्री फार्म में बचपन से पाला जाता है. एक्सपर्ट की सलाह पर उसे पौष्टिक आहार दिया जाता है. आहार में ही कैल्शियम की हाई डोज भी दी जाती है. लेकिन यह कैल्शियम दवाई के रूप में कम और इसके अलग-अलग सोर्स ज्यादा होते हैं. कैल्शियम की वजह से ही अंडे का सफेद खोल इतना मजबूत होता है कि वो जल्दी टूटता नहीं है. फिर एक वक्त के बाद मुर्गी अंडा देना शुरु करती है. शुरुआत छोटे अंडे से होती है. यह अंडा 25 ग्राम से लेकर 50 ग्राम तक का होता है. करीब 20 दिन तक मुर्गी छोटा अंडा देती है.
लेकिन इस छोटे अंडे की खासियत यह है कि मुर्गी ने बड़े होने के लिए जितना पौष्टिक आहार और कैल्शियम लिया उसका असर शुरुआत के अंडो में ही ज्यादा देखने को मिलता है. उसके बाद तो हर रोज अंडा देने के चलते मुर्गी में वक्त के साथ कैल्शियम और दूसरी चीजों की कमी होती चली जाती है और अंडा भी कमजोर हो जाता है.”
यूपी के एक अन्य पोल्ट्री संचालक ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि 130 दिन की होने पर मुर्गी अंडा देना शुरू करती है. अंडे की शुरुआत 25 ग्राम से होती है. जबकि बाजार में 56 ग्राम से लेकर 60 ग्राम तक के अंडे की डिमांड होती है. लेकिन बाजार के हिसाब से अंडे का वजन बढ़ने में कम से कम 20 दिन लग जाते हैं. ऐसे में अगर 20 दिन तक 5 हजार मुर्गी ने 4.5 हजार अंडा रोज दिया तो 90 हजार अंडे जमा हो गए. अब पोल्ट्री मालिक उन्हें फेंकेगा तो नहीं. इसलिए ऐसे अंडे को बाजार में बेचने के लिए सिर्फ यह बात बनाई जाती है कि छोटे अंडे में पोष्टिककता ज्यादा होती है. जबकि अंडा देने वाली मुर्गी को हर रोज एक जैसी ही खुराक दी जाती है.
बाजार में अंडा खरीदते वक्त् दुकानदार और ग्राहक के बीच नोंकझोंक होना आम बात है. ग्राहक चाहता है कि दुकानदार छांट-छांटकर बड़े अंडे उसके थैले में डाले. वहीं दुकानदार बड़े अंडे के साथ छोटे अंडे भी रखना चाहता है. सोशल मीडिया पर भी ग्राहक अंडों को लेकर दुकानदारों का मजाक बनाते हैं. आजकल फेसबुक पर एक पोस्ट बहुत वॉयरल हो रही है. इस पोस्ट में एक यूजर लिखता है कि “बड़ा अंडा देने में मुर्गी को इतना दर्द नहीं होता है जितना ग्राहक को देते वक्त दुकानदार को होता है.”
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today