दांडी, गुजरात में तीन दिन तक सीफूड फेस्टिवल का आयोजन किया गया था.गुजरात को हमेशा से एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जाता है. इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है. गुजरात के दांडी में पहली बार सीफूड फेस्टिवल का आयोजन किया गया था. पहले दिन ही आयोजकों की उम्मीद से ज्यादा भीड़ सीफूड फेस्टिवल में पहुंच गई. जिसका नतीजा ये निकला कि झींगा, मछली और दूसरे सीफूड आइटम जो बनाकर रखे गए थे वो हाथ-ओं-हाथ बिक गए. सीफूड फेस्टिवल के आयोजकों में से एक झींगा किसान और एक्सपर्ट डॉ. मनोज शर्मा के मुताबिक दूसरे और तीसरे दिन भी उमड़ी भीड़ को देखकर सीफूड फेस्टिरवल में दुकान लगाने वाले स्थानीय मछली और झींगा पालन करने वाले खासे खुश नजर आ रहे थे.
इस फेस्टिवल का आयोजन झींगा उत्पादक, सीबा, फिश प्रोसेसिंग सेक्टर से जुड़ी कंपनियां और स्थानीय लोगों ने किया था. इसका मकसद झींगा उत्पादन को बढ़ावा देना है. साथ ही सरकार समेत दूसरे लोगों को भी ये संदेश देना है कि जब तक झींगा का लोकल बाजार तैयार नहीं किया जाएगा तो गुजरात में न तो झींगा का उत्पादन बढ़ेगा और न ही रोजगार के रास्ते खुलेंगे.
डॉ. मनोज ने किसान तक को बताया कि इस आयोजन के पीछे प्रदीप नाविक, प्रेसिडेंट गाफड़ा और पूर्व सरपंच दांडी का भी बड़ा हाथ रहा है. पहली बार हुए इस सीफूड फेस्टिवल में लोगों ने अपने घरों के सामने ही दुकानें लगाकर इसे भव्य बना दिया था. उम्मीद की जा रही थी कि पहले दिन एक से डेढ़ हजार लोग आएंगे, लेकिन भी़ आई छह से सात हजार की. जितनी भीड़ तीन दिन में आने की उम्मीद की जा रही थी वो पहले दिन ही आ गई. यही वजह थी कि पहले दिन ही छह से सात हजार डिश बिक गईं. दूसरे और तीसरे दिन इससे कहीं ज्यादा भीड़ थी.
डॉ. मनोज ने बताया कि बीते तीन दिन में जिस तरह का उत्साह लोगों ने दिखाया है उससे तो यही लगता है कि इस फेस्टिवल को वीकली मनाया जाए. इससे लोगों को घूमने-फिरने और खाने के लिए एक अच्छी जगह मिलेगी, वहीं स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा. जब 25 से 30 स्टॉल लगेंगे तो करीब 400 से 500 लोगों को रोजगार मिलेगा. झींगा पालकों को स्थानीय बाजार मिलेगा तो एक्सपोर्ट पर निर्भरता कम होगी. और बीते कई साल से झींगालाला भी यही कोशिश कर रहा है कि देश में झींगा का लोकल बाजार तैयार किया जाए. क्योंकि एक्सपोर्ट पर निर्भर रहने के चलते झींगा उत्पादकों को उनका सही दाम नहीं मिल पाता है.
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