Goat Farming: कुछ खास तरीकों से घटाई जा सकती है बकरी के बच्चों की मृत्यु दर, जानें कैसे

Goat Farming: कुछ खास तरीकों से घटाई जा सकती है बकरी के बच्चों की मृत्यु दर, जानें कैसे

सीआईआरजी के सीनियर साइंटिस्ट के मुताबिक अब यह कोई जरूरी नहीं है कि बकरी को गर्भवती कराने के लिए उसकी मीटिंग बकरे के साथ कराई जाए. आर्टिफिशल इंसेमीनेशन तकनीक से भी बकरी गर्भवती हो सकती है. इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसकी मदद से आप बच्चे के संबंध में बहुत सारी चीजों को अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से तय कर सकते हैं. 

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Goat Farming: कुछ खास तरीकों से घटाई जा सकती है बकरी के बच्चों की मृत्यु दर, जानें कैसेऐसे करें नवजात बकरी और गर्भवती बकरी की देखभाल

गोट एक्सपर्ट का कहना है कि बकरी पालन में सबसे ज्यादा मुनाफा बकरी के बच्चों से होता है. बकरियों से जितने ज्यादा बच्चे  मिलेंगे मुनाफा उतना ही बड़ा होगा. फिर इन बच्चों  को दो से तीन महीने की उम्र पर ये एक साल तक की उम्र का करके बड़े आराम से मुनाफे के साथ बेचा जा सकता है. लेकिन बकरी पालन की एक कड़वी सच्चाई ये भी है कि जरा सी लापरवाही के चलते बकरी पालन में बच्चों  की मौत भी काफी होती है. यही वजह है कि बकरियों के बाड़े में पशुपालकों की सबसे बड़ी कोशिश यही होती है कि कैसे भी करके बकरी के बच्चों  की मृत्यु  दर को कम किया जाए. 

हालांकि केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मथुरा के गोट साइंटिस्ट इस बारे में कुछ उपाय बताते हैं जिससे बच्चोंर की मृत्यु  दर को जीरो भी किया जा सकता है. साइंटिस्ट के मुताबिक इसके लिए खासतौर पर बकरी को गाभिन कब कराना है और बच्चा होने के बाद उसकी शुरुआती खुराक पर खासतौर से नजर रखनी होती है. इतना ही नहीं बकरी के गर्भकाल के आठवें महीने से उसकी खुराक पर भी ध्यान देना होता है. 

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बकरी गाभिन कराते वक्त रखें गर्मी-सर्दी का ख्याल 

सीआईआरजी के प्रिसिंपल साइंटिस्‍ट डॉ. एमके सिंह ने किसान तक को बताया कि छोटे बच्चों के लिए मौसम सबसे बड़ा दुश्मन होता है. ज्यादा गर्मी और कड़ाके की ठंड नुकसान पहुंचाती हैं. इसलिए मौसम को देखते हुए यह जरूरी हो जाता है कि बकरियों से बच्चा कब पैदा कराएं. जैसे नॉर्थ इंडिया में बकरियों के बच्चों में सबसे ज्यादा मृत्यु दर देखी गई है. क्योंकि यहां गर्मी और सर्दी के मौसम में बड़ा उलटफेर होता है. इसलिए अच्छा होगा कि 15 अप्रैल से 30 जून तक बकरी को गाभिन कराएं.

वहीं उससे आगे की बात करें तो अक्टूबर और नवंबर में बकरी को गाभिन करा सकते हैं. ऐसा करने से जो बकरी अप्रैल से जून तक गाभिन हुई है वो अक्टूबर-नवंबर में बच्चा दे देगी. वहीं जो अक्टूबर-नवंबर में गाभिन हुई है वो फरवरी-मार्च में बच्चा देगी. मौसम के हिसाब से यह वो महीने हैं जब ना तो ज्यादा गर्मी होती है और ना ही ज्यादा सर्दी. मौसम के लिहाज से इन महीनों में बकरी के बच्चों को कोई तकलीफ नहीं होगी. बकरी पालन के लिहाज से यह वो महीने हैं जब बकरी के बच्चों को वजन तेजी से बढ़ता है.  

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बच्चा पैदा होते ही इस खास तरीके से दें खुराक

डॉ. एमके सिंह ने बकरी के बच्चों की मृत्यु् दर कम करने के लिए जो तरीके बताए उसमे यह भी शामिल है कि जैसे ही बच्चा पैदा हो उसे फौरन ही मां का दूध पिलाएं. फिर चाहें बकरी ने बच्चा देने के बाद जैर गिराई हो या नहीं. बच्चे का वजन एक किलो होने पर उसे 100 से 125 ग्राम तक दूध पिलाएं. दूध दिनभर में तीन से चार बार में पिलाएं. मौसम से बचाने के उपाय भी अपनाएं. जब बच्चा 18 से 20 दिन का हो जाए तो से पत्तियों की कोपल देना शुरू कर दें. एक महीने का होने पर पिसा हुआ दाना खिलाएं. 

बच्चा तीन महीने का हो जाए तो उसका टीकाकरण शुरू करा दें. और इस सब के बीच इस बात का खास ख्याल रखें कि जब बकरी बच्चा देने वाली हो तो उससे डेढ़ महीने पहले से बकरी को भरपूर मात्रा में हरा, सूखा चारा और दाना खाने को दें. इससे होगा यह कि पेट में पल रहे बच्चे तक भी अच्छी खुराक पहुंचेगी और जब बच्चा पैदा होगा तो उसके बाद बकरी दूध भी अच्छा और ज्यादा देगी.  

 

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