Light in Poultry Farm: लाइट के सही मैनेजमेंट से बढ़ता है मुर्गों का वजन, कम से हो जाते हैं बीमार

Light in Poultry Farm: लाइट के सही मैनेजमेंट से बढ़ता है मुर्गों का वजन, कम से हो जाते हैं बीमार

Light in Poultry Farm मुर्गों के वजन के हिसाब से ही मुनाफा तय होता है. इसके लिए जितना जरूरी मुर्गों को बीमारियों से बचाकर हेल्दी रखना है उतना ही जरूरी पोल्ट्री फार्म का मैनेजमेंट भी है. जैसे पोल्ट्री फार्म में दिन और रात में कब लाइट जलानी है और कब बंद करनी है. पोल्ट्री एक्सपर्ट की मानें तो लाइट मैनेजमेंट मुर्गों का वजन बढ़ाने में मददगार होता है. 

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Light in Poultry Farm: लाइट के सही मैनेजमेंट से बढ़ता है मुर्गों का वजन, कम से हो जाते हैं बीमारइस योजना का मकसद मुर्गी पालन को एक बड़े उद्योग के रूप में विकसित करना है (Image-Kisan Tak)

देश में चिकन का 50 लाख टन से ज्यादा का उत्पादन होता है. बीते दो साल से तो आंकड़ा इसी के आसपास ही है. चिकन की डिमांड को पूरा करने के लिए जिन मुर्गों को पाला जाता है तो उन्हें ब्रायलर मुर्गा कहा जाता है. पोल्ट्री एक्सपर्ट की मानें तो ब्रायलर मुर्गों की ग्रोथ और उनका बीमार होना बहुत हद तक पोल्ट्री फार्म के लाइट मैनेजमेंट पर टिका होता है. लाइट कम हो तो मुर्गे फीड सही तरह से नहीं खाते हैं. वहीं अगर लाइट तेज हो जाए तो इसका सीधा असर उनकी ग्रोथ पर पड़ता है. 

एक दिन के चूजे से लेकर 35 दिन तक के मुर्गें के लिए लाइट मैनेजमेंट अलग-अलग होता है. अगर फार्म की लाइट जलाने और बंद करने में जरा भी कोताही बरती गई तो इसके चलते मुर्गें बीमार तक हो जाते हैं. उनके खाने पर इसका असर पड़ता है. क्योंकि तेज रोशनी तनाव और आक्रामकता का कारण बनती है, जबकि मंद रोशनी फीड की मात्रा कम कर सकती है. 

लाइट मैनेजमेंट के ये होते हैं फायदे 

पोल्ट्री फार्म में होने वाली रोशनी चूजों को उनके शुरुआती दिनों में केज के अंदर फीड और पानी तलाश करने में मदद करती है. रोशनी उनकी दैनिक दिनचर्या को भी नियंत्रित करती है. जैसे आराम, एक्टीविटी और डवलपमेंट. 

  • बेहतर आहार सेवन
  • बेहतर वजन बढ़ना
  • पैरों की समस्याओं में कमी
  • मजबूत इम्यूनिटी सिस्टम
  • कम मृत्यु दर

ब्रायलर फार्मिंग में मुर्गों को हेल्दी रखने के लिए लाइट और अंधेरे दोनों की ही जरूरत होती है. लाइट एक्टीविटी और फीड के लिए चूजों को प्रोत्साहित करती है. जबकि अंधेरा मुर्गियों को आराम करने के लिए वक्त देता है. क्योंकि आराम के दौरान चूजों का शरीर हेल्दी बनता है. वहीं उनकी हड्डियां और मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं.

पोल्ट्री फार्म में ऐसे किया जाता है लाइट मैनेजमेंट 

  • दिन 0 से 7 - 23 घंटे रोशनी, एक घंटा अंधेरा
  • दिन 8 से 14 - 14 घंटे रोशनी, 10 घंटे अंधेरा
  • दिन 15 से 22 - 16 घंटे रोशनी, 8 घंटे अंधेरा
  • दिन 23 से 28 - 18 घंटे रोशनी, 6 घंटे अंधेरा
  • दिन 29 से 35 - 20 घंटे रोशनी, 4 घंटे अंधेरा
  • दिन 36 से 42 - 24 घंटे रोशनी.

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