लेयर बर्ड का पोल्ट्री फार्म. अंडे को नॉनवेज और वेजिटेरियन बताने वालों की लड़ाई कोई नई नहीं है. वेज-नॉनवेज की इस बहस से अंडा खाने वाले ही नहीं, अंडे का कारोबार करने वाले भी खासे परेशान हैं. नवंबर में हैदरबाद में हुए पोल्ट्री एक्सपो में खुद पोल्ट्री फार्मर ने यह सवाल उठाया था कि अंडा वेज है या नॉनवेज. हालांकि इसका जवाब दिया गया था. पोल्ट्री एक्सापर्ट इस बहस को बेवजह की बताते हैं. उनका कहना है कि जब अंडा देने वाली मुर्गी के दड़बे में मुर्गा ही नहीं है तो फिर अंडा नॉनवेज कैसे हुआ.
अंडा देने वाली मुर्गी अगर मुर्गे के संपर्क में आई होती तो उसे हर रोज दाने के साथ कंकड़-पत्थर का पिसा हुआ चूरा मिलाकर खिलाने की जरूरत नहीं पड़ती. यह सुनकर शायद आपको अटपटा लग रहा हो, लेकिन यह हकीकत है. बिना कंकड़-पत्थर के मुर्गियों को दाना भी नहीं खिलाया जाता है. मुर्गी में कैल्शिययम की कमी को दूर करने के लिए ऐसा किया जाता है.
पोल्ट्री एक्सपर्ट और यूपी पोल्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष नवाब अली का कहना है कि जिस तरह से एक गाय और भैंस भुस की सानी खाकर सुबह-शाम दूध देती है, ठीक उसी तरह से मुर्गियां दिन में तीन से चार बार फीड (दाना) खाकर सुबह के वक्त अंडा देती हैं. बाजार में 6 से 7 रुपये वाले अंडे को देने के लिए मुर्गियों के लिए मुर्गे के संपर्क में आना कतई जरूरी नहीं है. इसके लिए अगर कोई चीज जरूरी है तो वो है उनकी फीड. और फीड खाकर भी यह अपनी मर्जी से ही अंडा देती हैं.
पोल्ट्री फार्म संचालक मनीष शर्मा का कहना है कि जब अंडे का कारोबार शुरू किया जाता है तो पहले 4 से 5 महीने तक अंडा देने वाली मुर्गी को पाला जाता है. मुर्गी पालने के लिए चूजा (चिक्स) बेचने वाली हैचरी से एक दिन का चूजा खरीदा जाता है. इस चूजे की कीमत 40 से 45 रुपये तक होती है. न्यूट्रीशियन एक्सपर्ट के मुताबिक इन्हें शुरू से ही अच्छा फीड दिया जाता है. लेकिन इस दौरान एक बार भी इनका संपर्क मुर्गों से नहीं कराया जाता है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today