
जापान में रहने वाले भारतीय मूल के दो क्लाइमेट साइंटिस्ट ने इस गर्मी में अल नीनो के बनने की बहुत ज्यादा संभावना जताई है, जिससे भारत के लिए जरूरी दक्षिण पश्चिम मॉनसून पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा, यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-टर्म वेदर फोरकास्ट (ECMWF) ने भी बताया है कि दुनिया के कई इलाकों में मई तक अल नीनो बन सकता है और अगस्त तक तेज हो सकता है. इसके डेटा से पता चलता है कि सुपर अल नीनो की 22 परसेंट संभावना है, 80 परसेंट 'मजबूत' घटना की और 98 परसेंट 'मध्यम' अल नीनो की संभावना बन रही है.
जापान के दो वैज्ञानिकों ने अल नीनो के तेज होने की जानकारी दी है. वैज्ञानिकों ने बताया है कि इस साल एक मॉडरेट से मजबूत अल नीनो की उम्मीद है. यह अल नीनो दक्षिण पश्चिम मॉनसून के लिए अच्छा संकेत नहीं होगा क्योंकि बारिश पर नेगेटिव असर पड़ सकता है. हालांकि इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) अगर पॉजिटिव फेज में हो तो यह असर कम हो सकता है.
जापान एजेंसी फॉर मरीन-अर्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (जैम्सटेक) के डायरेक्टर स्वाधीन बेहरा ने अनुमान लगाया था कि जैसे-जैसे मौजूदा ला नीना खत्म होगा, एक मजबूत से बहुत मजबूत अल नीनो आएगा. इसके मॉडल ने एक पॉजिटिव IOD की संभावना बताई, जब वेस्ट इंडियन ओशन में समुद्र की सतह का तापमान ज्यादा गर्म होगा. जो काफी हद तक वैसा ही होगा जैसा पैसिफिक में अल नीनो या ला नीना फेज के दौरान होता है, जिससे दुनिया भर में मौसम में बदलाव आते हैं.
टोक्यो में यूनिवर्सिटी ऑफ आइजू के प्रोफेसर साजी हमीद ने भी कहा था कि यह घटना सुपर अल नीनो बन सकती है, जिसके साथ एक पॉजिटिव IOD भी होगा, जो 1997-98 की स्थिति जैसा होगा. अल नीनो साल होने के बावजूद, भारत में अच्छा मॉनसून आया था, जिसका कारण शायद साथ में पॉजिटिव IOD फेज था.
ECMWF ने अनुमान लगाया है कि पैसिफिक में ट्रेड विंड्स जो आमतौर पर पूरब से पश्चिम की ओर चलती हैं, वे उल्टी दिशा (पश्चिम से पूरब) से आने वाली पश्चिमी हवाओं से बेअसर हो सकती हैं, जिससे गर्म पानी पश्चिम से पूरब की ओर फैल सकता है. ECMWF ने बताया कि ऐसी तीन बड़ी पश्चिमी हवाएं पहले ही हो चुकी हैं, जिससे गर्म समुद्र का पानी पैसिफिक में पश्चिम से पूरब की ओर शिफ्ट हो रहा है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये सभी घटनाएं
आने वाले समय में अल नीनो के एक्टिव होने का संकेत देती हैं.
ऑस्ट्रेलिया की वेदर एजेंसी ने भी महीने भर पहले अल नीनो की जानकारी दी थी. अल नीनो एशिया, खासकर भारत में लंबे समय तक सूखा लाता है. 2023 में अल नीनो ने दक्षिण-पश्चिम मॉनसून और बदले में खेती की पैदावार पर असर डाला था. ऑस्ट्रेलिया के ब्यूरो ऑफ मेटियोरोलॉजी (BoM) ने कहा, जून से सूखे वाला अल नीनो मौसम बनने की संभावना है, जिससे तापमान में तेज वृद्धि होगी और बारिश पर विपरीत असर देखा जा सकता है.