
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज 21 और कल 22 फरवरी को दक्षिण तमिलनाडु और दक्षिण केरल के अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है. इसके अलावा 24 फरवरी तक तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, अंडमान-निकोबार सहित कई हिस्सों में गरज-चमक, बिजली और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. वहीं, उत्तर भारत के लिए भी राहत की खबर नहीं है, क्योंकि इस क्षेत्र में पूरे हफ्ते तापमान में बढ़ाेतरी के आसार हैं.
आईएमडी के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम भारत में अगले 7 दिनों के दौरान अधिकतम तापमान 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने के आसार हैं. मध्य भारत में भी अगले 2 दिनों में तापमान 2-3 डिग्री बढ़ सकता है. महाराष्ट्र और गुजरात में पहले हल्की बढ़ोतरी के बाद अगले सप्ताह तापमान में गिरावट संभव है. उधर, दक्षिण में बीते दिन केरल के कोट्टायम में अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि हरियाणा के नारनौल में न्यूनतम तापमान 8.5 डिग्री दर्ज किया गया.
21 फरवरी को देश के दक्षिणी हिस्सों में मौसम ज्यादा सक्रिय रहेगा. तमिलनाडु, केरल और माहे में बारिश और गरज-चमक की संभावना है. अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भी हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं. उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में मौसम शुष्क रहेगा, लेकिन सुबह के समय धुंध और हल्का कोहरा परेशान कर सकता है. वहीं, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में 22 फरवरी से एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के असर से बारिश और बर्फबारी के आसार बन रहे हैं.
आईएमडी के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में 23 फरवरी तक आसमान साफ रहने की संभावना है. सुबह के समय हल्की धुंध रह सकती है. 21 फरवरी को अधिकतम तापमान 27 से 29 डिग्री और न्यूनतम 12 से 14 डिग्री के बीच रह सकता है. 23 फरवरी तक दिल्ली में दिन का तापमान सामान्य से काफी ऊपर चला जाएगा और गर्मी का अहसास बढ़ेगा.
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 22 से 24 फरवरी के बीच बारिश और बर्फबारी हो सकती है. छत्तीसगढ़ और ओडिशा में 23 और 24 फरवरी को गरज-चमक के साथ बारिश का अनुमान है. इसके अलावा कर्नाटक के आंतरिक हिस्सों में कई दिनों तक मौसम अस्थिर बना रह सकता है. वहीं, पूर्वोत्तर राज्यों में तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है.
दक्षिण तमिलनाडु और दक्षिण केरल में संभावित भारी बारिश को देखते हुए पकी हुई धान की फसल की कटाई जल्द पूरी करें और उपज को सुरक्षित स्थानों पर रखें. खेतों में जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखें ताकि पानी भराव से नुकसान न हो. तेज हवाओं की आशंका को देखते हुए केले और सब्जियों की फसलों को सहारा देने की सलाह दी गई है.