
भारत में मॉनसून की स्थिति पर चर्चा करते हुए मौसम विशेषज्ञ देवेंद्र त्रिपाठी ने अल नीनो की संभावनाओं और इसके संभावित प्रभावों पर प्रकाश डाला. अल नीनो एक बेहद महत्पपूर्ण मौसम सिस्टम है जो खेती-बाड़ी पर व्यापक असर डालता है. इस बार अनुमान जताया जा रहा है कि यह सिस्टम भारत के मॉनसून को कमजोर कर सकता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने से जून, जुलाई, अगस्त के दौरान अल नीनो की संभावना 40% से 60% तक बढ़ सकती है. यह स्थिति खरीफ फसलों पर गहरा प्रभाव डाल सकती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार पर असर पड़ेगा.
अल नीनो के दौरान मॉनसून कमजोर होने की संभावना रहती है. हालांकि, इंडियन ओशन डायपोल पॉजिटिव होने पर मॉनसून बेहतर प्रदर्शन कर सकता है. वर्तमान में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ऊपर जा रहा है, जिससे वैज्ञानिकों और किसानों के बीच चिंता बढ़ रही है. इससे अल नीनो की स्थिति बन सकती है जो सूखे का बड़ा कारण होगा.
भारत में तापमान लगातार बढ़ रहा है. 18 फरवरी को उत्तरी और मध्य भारत में बारिश के कारण तापमान थोड़ा कम हुआ, लेकिन 19 फरवरी को फिर से तापमान बढ़ने की संभावना है. दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश में तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया गया.
एक जनवरी से 19 फरवरी तक भारत में बारिश की स्थिति चिंताजनक रही है. दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से बेहतर बारिश हुई है, लेकिन मध्य और पूर्वी भारत में भारी कमी दर्ज की गई है. झारखंड, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा जैसे राज्यों में 100% बारिश की कमी रही है.
22 से 25 फरवरी के बीच दक्षिण भारत और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना है. उत्तर भारत में मौसम शुष्क रहेगा. मार्च की शुरुआत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश ला सकता है.
विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने और अपनी खेती की योजनाओं को बदलते मौसम के अनुसार तैयार करने की सलाह दी है. अल नीनो की स्थिति पर नजर रखना और कृषि गतिविधियों को इसके प्रभावों के अनुसार ढालना जरूरी है.
भारत में बढ़ते तापमान और मॉनसून पर अल नीनो के संभावित प्रभावों को देखते हुए, यह जरूरी है कि किसान और सरकार मिलकर समाधान की दिशा में काम करें.