North-East Monsoon: दक्षि‍ण भारत में पूर्वोत्‍तर मॉनसून की एंट्री पर बड़ा अपडेट, भारी बारिश का अलर्ट जारी

North-East Monsoon: दक्षि‍ण भारत में पूर्वोत्‍तर मॉनसून की एंट्री पर बड़ा अपडेट, भारी बारिश का अलर्ट जारी

अगले 2-3 दिनों में दक्षिण भारत में पूर्वोत्तर मॉनसून के पहुंचने की संभावना है. IMD के मुताबिक, 15 से 18 अक्टूबर तक केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और तटीय आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है. रायलसीमा और उत्तर आंतरिक कर्नाटक में भी अलग-अलग दिनों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है.

north east monsoon entry in south indianorth east monsoon entry in south india
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Oct 12, 2026,
  • Updated Oct 12, 2026, 5:49 PM IST

देश से कई हिस्‍सों से एक ओर दक्षि‍ण-पश्चिम मॉनसून की विदाई का दौर जारी है तो वहीं अगले 2-3 दिनों में दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में पूर्वोत्तर मॉनसून की एंट्री के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोमवार को अपने बुलेटिन में यह जानकारी दी. पूर्वोत्‍तर मॉनसून पहुंचने के बाद दक्षिण भारत के कई हिस्सों में अगले पांच से छह दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. मौसम विभाग ने 15 से 18 अक्टूबर के दौरान कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी दी है.

इन राज्यों में भारी बारिश के आसार

IMD के अनुसार, 15 से 18 अक्टूबर के बीच केरल और माहे, तटीय और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल और तटीय आंध्र प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है. वहीं, उत्तर आंतरिक कर्नाटक में 17 और 18 अक्टूबर को भारी बारिश की संभावना है. रायलसीमा में 15 और 16 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है.

दक्षिण भारत के लिए क्यों अहम है पूर्वोत्तर मॉनसून?

भारत में मुख्य रूप से दो मॉनसून प्रणालियां सक्रिय रहती हैं. दक्षिण-पश्चिम मॉनसून जून से सितंबर के बीच देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश लाता है. वहीं, पूर्वोत्तर मॉनसून अक्टूबर से दिसंबर के दौरान दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में बारिश का प्रमुख स्रोत बनता है. तमिलनाडु और दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों में इस मॉनसून की बारिश जल उपलब्धता और खेती के लिहाज से महत्वपूर्ण होती है.

दक्षि‍ण-पश्चिम मॉनसून में 12.6 फीसदी कम बारिश

IMD के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान देश में कुल 759.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 868.6 मिलीमीटर है. इस तरह देश में मॉनसून की बारिश सामान्य से 12.6 फीसदी कम रही. बारिश की इस कमी का एक प्रमुख कारण उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल नीनो परिस्थितियों को बताया गया है. ये परिस्थितियां जून से उभरनी शुरू हुई थीं और इसके बाद मजबूत हुई हैं.

क्या है अल नीनो, जिसका मॉनसून पर पड़ता है असर?

अल नीनो, अल नीनो-दक्षिणी दोलन यानी ENSO की तीन अवस्थाओं में से एक है. यह मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के समुद्री तापमान में बदलाव और वहां के वायुमंडलीय हालात में होने वाले उतार-चढ़ाव से जुड़ी जलवायु घटना है. अल नीनो की स्थिति भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की बारिश को कमजोर कर सकती है. इसके उलट, ला नीना की स्थिति आमतौर पर वैश्विक तापमान पर ठंडा प्रभाव डालती है, जबकि ENSO की तीसरी अवस्था तटस्थ होती है.

दिसंबर में चरम पर पहुंच सकता है अल नीनो

वैश्विक मौसम एजेंसियों के पूर्वानुमानों के मुताबिक, मौजूदा अल नीनो की स्थिति दिसंबर 2026 में चरम पर पहुंच सकती है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) समेत वैश्विक मौसम एजेंसियों ने इसके 1950 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद सबसे मजबूत घटनाओं में शामिल होने की आशंका जताई है. पूर्वानुमानों के अनुसार, अल नीनो की परिस्थितियां फरवरी 2027 तक बनी रह सकती हैं. (पीटीआई)

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