लेट मॉनसून, अब आफत बनकर बरस रहा पानी... क्या जुलाई-सितंबर की बारिश जून की कमी पूरी कर पाएगी?

लेट मॉनसून, अब आफत बनकर बरस रहा पानी... क्या जुलाई-सितंबर की बारिश जून की कमी पूरी कर पाएगी?

देश में मॉनसून सक्रिय हो गया है और कई राज्यों में भारी बारिश हो रही है, लेकिन जून में हुई बारिश की कमी को लेकर चिंता बरकरार है. मुंबई में बाढ़ जैसे हालात, जम्मू-कश्मीर में बादल फटना, उत्तराखंड और हिमाचल में बढ़ते खतरे के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या जुलाई से सितंबर की बारिश जून के घाटे की भरपाई कर पाएगी.

Landslide in Uttarakhand due to Heavy rain (Photo-ITG)Landslide in Uttarakhand due to Heavy rain (Photo-ITG)
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Jul 02, 2026,
  • Updated Jul 02, 2026, 1:56 PM IST

देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून आखिरकार सक्रिय हो चुका है और उत्तर भारत समेत कई राज्यों में बारिश का दौर शुरू हो गया है. हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि जिन इलाकों में अभी तक अच्छी बारिश नहीं हुई है, वहां भी अगले दो दिनों में मॉनसून के और सक्रिय होने की संभावना है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जून महीने में हुई बारिश की भारी कमी की भरपाई क्या जुलाई, अगस्त और सितंबर की बारिश कर पाएगी?

मौसम विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि जून में कम बारिश होने का मतलब हमेशा सूखा नहीं होता. पिछले वर्षों में कई बार ऐसा देखा गया है कि जून में मॉनसून कमजोर रहा, लेकिन बाद के महीनों में अच्छी बारिश ने बारिश के घाटे को काफी हद तक पूरा कर दिया. अब सभी की नजरें जुलाई से सितंबर के दौरान होने वाली बारिश पर टिकी हैं.

आफत लेकर आई बारिश

इस बीच मॉनसून की बारिश राहत के साथ आफत भी लेकर आई है. महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई और आसपास के इलाकों में भारी बारिश के चलते कई स्थानों पर जलभराव और बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं. वसई के वाघराल पाड़ा क्षेत्र में तेज बहाव वाले नाले में दो कारें बह जाने का वीडियो सामने आया है. प्रशासन ने लोगों को बारिश के दौरान जलभराव वाले क्षेत्रों और तेज बहाव वाले नालों से दूर रहने की सलाह दी है.

मुंबई के चेंबूर इलाके में भारी बारिश के दौरान सड़क किनारे खड़ा एक बड़ा पेड़ स्कूल बस पर गिर गया. इस हादसे में 11 वर्षीय छात्र विहान श्रीवास्तव की मौत हो गई, जबकि कई अन्य बच्चे घायल हो गए. बस में करीब 12 बच्चे सवार बताए गए थे.ॉ

नवी मुंबई के नेरूल इलाके में भी बारिश के दौरान हादसा हुआ, जहां बाइक से जा रही दो कॉलेज छात्राओं को करंट लग गया. दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

पहाड़ी राज्यों में तबाही शुरू

उधर, पहाड़ी राज्यों में मॉनसून ने शुरुआती दौर में ही तबाही के संकेत देने शुरू कर दिए हैं. जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में बादल फटने की घटना के बाद फ्लैश फ्लड की स्थिति बन गई. डोडा-किश्तवाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग प्रभावित हुआ है और कई संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गए हैं. प्रभावित क्षेत्रों में मलबे और पानी के कारण सामान्य जनजीवन बाधित हुआ है.

उत्तराखंड में भी मॉनसून को लेकर चिंता बढ़ गई है. पिछले वर्षों की बड़ी आपदाओं की यादें अभी ताजा हैं. उत्तरकाशी के धराली और हर्षिल क्षेत्र में पिछले साल आई विनाशकारी बाढ़ के बाद स्थानीय लोग इस बार भी सतर्क हैं. बताया जा रहा है कि आपदा के बाद बने अस्थायी जलभराव और नदी की बदलती धारा से आसपास के गांवों, होटलों, बगीचों और सरकारी भवनों पर खतरा बना हुआ है.

रुद्रप्रयाग में लगातार बारिश के कारण अलकनंदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. नदी के किनारे स्थित कई घाट जलमग्न हो चुके हैं और प्रशासन हालात पर लगातार नजर रख रहा है.

हिमाचल के चंबा में भारी नुकसान

हिमाचल प्रदेश में भी मॉनसून की पहली बारिश ने नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है. चंबा जिले के सलूणी क्षेत्र में कई घरों में मलबा और पानी घुस गया है. वहीं भूस्खलन के कारण चंबा-तीसा मुख्य मार्ग बाधित हो गया है.

विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी तीन महीने देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं. यदि जुलाई, अगस्त और सितंबर में सामान्य या उससे अधिक बारिश होती है तो जून के वर्षा घाटे की काफी हद तक भरपाई हो सकती है. लेकिन यदि बारिश का वितरण असमान रहा तो कृषि, जलाशयों, बिजली उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है. फिलहाल पूरे देश की नजर मॉनसून की अगली चाल पर टिकी हुई है.(आजतक ब्यूरो)

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