
भारत में इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान बारिश की कमी दर्ज की गई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, जून से सितंबर के मॉनसून सीजन में देश में सामान्य 868.6 मिलीमीटर के मुकाबले 759 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. यह सामान्य से 12.6 प्रतिशत कम है और 2001 के बाद से मॉनसून की चौथी सबसे कम बारिश बताई गई है.
मॉनसून की विदाई के बाद भी बारिश की इस कमी की भरपाई की उम्मीद फिलहाल कम दिखाई दे रही है. IMD ने 30 सितंबर को जारी अपने मौसमी आउटलुक में कहा है कि अक्टूबर 2026 में पूरे देश की बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है. अक्टूबर के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है, हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत, दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत और पूर्वी भारत के कुछ इलाकों में सामान्य से सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है.
IMD के मुताबिक, अक्टूबर 2026 में पूरे देश में मासिक बारिश दीर्घावधि औसत यानी LPA के 85 प्रतिशत से कम रहने की संभावना है. इससे मॉनसून सीजन समाप्त होने के बाद भी देश के कई हिस्सों में बारिश की कमी जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं.
अक्टूबर से दिसंबर के पोस्ट-मॉनसून सीजन को लेकर भी तस्वीर बहुत अच्छी नहीं है. IMD ने कहा है कि देश के अधिकांश हिस्सों में इस अवधि के दौरान सामान्य से कम बारिश हो सकती है. हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में बारिश सामान्य से सामान्य से अधिक रहने की संभावना है.
दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत को लेकर स्थिति कुछ अलग है. तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम, रायलसीमा, केरल और माहे और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक को मिलाकर अक्टूबर-दिसंबर की बारिश सामान्य, यानी LPA के 88 से 112 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना जताई गई है.
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का सीजन आधिकारिक रूप से जून से सितंबर तक माना जाता है. देश की खेती के साथ ही जल स्रोतों के लिए भी इस अवधि की बारिश बेहद अहम होती है. IMD ने 31 अगस्त को जारी सितंबर के पूर्वानुमान में भी उस महीने पूरे देश की बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना जताई थी.
अब मॉनसून सीजन खत्म होने के साथ अक्टूबर में भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान सामने आया है. मौसम विभाग की ओर से अक्टूबर के अंत में नवंबर 2026 की बारिश और तापमान का आउटलुक जारी किया जाएगा.
इस बीच मौसम की मौजूदा स्थिति में देश के अलग-अलग क्षेत्रों में कई मौसमी सिस्टम सक्रिय बने हुए हैं. इनका असर कुछ राज्यों में बारिश के रूप में देखने को मिल सकता है.
दिए गए IMD बुलेटिन के मुताबिक, म्यांमार के तटीय इलाकों, पूर्वोत्तर बंगाल की खाड़ी और दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश के आसपास बना डिप्रेशन कमजोर होकर वेल-मार्क्ड लो-प्रेशर एरिया में बदल गया है. 30 सितंबर की सुबह 8:30 बजे तक यह उत्तरी म्यांमार और उससे सटे दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश, मिजोरम और पूर्वोत्तर बंगाल की खाड़ी के आसपास बना हुआ था.
इसके उत्तर-उत्तर-पश्चिम की तरफ बढ़ते हुए मिजोरम, त्रिपुरा और दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश की ओर जाने और अगले 12 घंटों में और कमजोर होकर कम दबाव वाले क्षेत्र में बदलने की संभावना जताई गई है.
उत्तर हरियाणा और आसपास के इलाकों में एक पश्चिमी विक्षोभ चक्रवाती सर्कुलेशन के रूप में मौजूद है. इसके अलावा पूर्वोत्तर असम, उत्तरी तटीय तमिलनाडु, बंगाल की खाड़ी और पूर्वी-मध्य अरब सागर के आसपास भी अलग-अलग चक्रवाती सर्कुलेशन सक्रिय बताए गए हैं.
IMD के दिए गए पूर्वानुमान के अनुसार 30 सितंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना है. उत्तराखंड में 30 सितंबर से 2 अक्टूबर और इसके बाद 5 से 6 अक्टूबर के दौरान कहीं-कहीं बारिश हो सकती है.
मध्य भारत में 30 सितंबर को पश्चिमी मध्य प्रदेश और 30 सितंबर से 3 अक्टूबर के बीच पूर्वी मध्य प्रदेश में कहीं-कहीं बारिश की संभावना जताई गई है. विदर्भ में 30 सितंबर और फिर 5-6 अक्टूबर, जबकि छत्तीसगढ़ में 2 से 6 अक्टूबर के बीच बारिश हो सकती है.
पूर्वी भारत में भी मौसम सक्रिय रहने का अनुमान है. अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 30 सितंबर से 6 अक्टूबर के बीच कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना है.
झारखंड में 30 सितंबर से 2 अक्टूबर और बिहार में 30 सितंबर और 3 से 6 अक्टूबर के दौरान कहीं-कहीं बारिश होने का अनुमान दिया गया है.
बिहार में 4 से 6 अक्टूबर और ओडिशा में 30 सितंबर से 1 अक्टूबर के दौरान कुछ स्थानों पर आंधी और बिजली के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं. इनकी रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे और झोंकों के दौरान 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है.
कुल मिलाकर सितंबर की समाप्ति के साथ दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन खत्म हो रहा है, लेकिन बारिश की कमी चिंता बढ़ा रही है. अब नजर अक्टूबर और पोस्ट-मॉनसून सीजन पर होगी, जहां IMD का पूर्वानुमान देश के अधिकांश हिस्सों के लिए सामान्य से कम बारिश की तरफ इशारा कर रहा है.