“साल 1986 में मेरी मां ने विदेश जाने वाले लोगों के लिए शुद्ध अचार और अन्य चीजें बनाना शुरू किया. क्योंकि तब हमारे आसपास से ही बहुत सारे लोग कनाडा और यूएस शिफ्ट हो रहे थे. ब्रांड का नाम दिया ज़ायका. धीरे-धीरे काम फैला और मां ने 2009 में एक स्वयं सहायता समूह बनाया. इसके बाद हमने पीछे मुड़कर नहीं देखा. हालांकि शुरूआत इतनी आसान नहीं थी, लेकिन मेरी मां ने मसालों पर काफी काम किया. मसालों पर कई प्रयोगों से उन्होंने कई खाने-पीने की चीजें बनाईं. अब हम एक कंपनी के तौर पर काम कर रहे हैं और सिर्फ पंजाब ही नहीं देश के कई राज्यों में अपने ऑर्गेनिक उत्पाद बेच रहे हैं.”