
झांसी में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर हुए बड़े फर्जीवाड़े का पुलिस ने आंशिक खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरोह ने न सिर्फ किसानों बल्कि झांसी-ललितपुर सांसद अनुराग शर्मा के नाम पर भी फर्जी दस्तावेज तैयार कर बीमा क्लेम उठाया. चौंकाने वाली बात यह है कि नदी, तालाब और चकरोड जैसी जमीनों पर भी फसल दिखाकर लाखों रुपये हड़प लिए गए. इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड अब भी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस टीमें जुटी हैं.
झांसी पुलिस ने फसल बीमा योजना में करोड़ों के घोटाले का पर्दाफाश करते हुए ऋतिक तिवारी उर्फ रानू समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनके साथ जालौन जिले के धुरवई निवासी भूपेंद्र राजपूत और पारस नायक भी पकड़े गए हैं. पुलिस के मुताबिक ये आरोपी पिछले करीब तीन महीनों से लगातार फरार चल रहे थे और गिरफ्तारी से बचने के लिए ठिकाने बदल रहे थे.
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक लाख रुपये नकद, कंप्यूटर सेट (सीपीयू, मॉनिटर, माउस) और बड़ी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं. जांच में सामने आया है कि यह गिरोह फर्जी खसरा-खतौनी और अन्य कागजात तैयार कर किसानों के नाम पर फसल बीमा कराता था और बाद में नुकसान दिखाकर क्लेम की रकम निकालकर आपस में बांट लेता था.
इस पूरे खेल का सबसे सनसनीखेज पहलू तब सामने आया जब आरोपियों ने झांसी सांसद अनुराग शर्मा की जमीन के नाम पर फर्जी बीमा कर 1.64 लाख रुपये का क्लेम उठा लिया. जब इस मामले की जानकारी सांसद को दी गई तो उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि वे किसी भी आरोपी को नहीं जानते और मामले की शिकायत कर जांच कराने की बात कही.
दिसंबर महीने में इस घोटाले का खुलासा मीडिया रिपोर्ट के जरिए हुआ था, जिसके बाद उपनिदेशक कृषि एमपी सिंह ने प्रेमनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई. जांच के दौरान सामने आया कि इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी के जरिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फर्जी पॉलिसी बनाई गई थी. आरोपी ने सांसद की जमीन के गाटा (खसरा) नंबर का इस्तेमाल कर बीमा कराया और क्लेम हासिल कर लिया.
जांच में यह भी सामने आया कि घोटालेबाजों ने सिर्फ किसानों या जनप्रतिनिधियों की जमीन ही नहीं, बल्कि नदी, तालाब, चकरोड और यहां तक कि वन भूमि पर भी फर्जी बीमा करा लिया. ग्राम सिमरिया में नदी की जमीन पर बीमा, चकरोड और तालाब पर फर्जी क्लेम, वन विभाग की जमीन पर भी बीमा कर रकम निकाली गई. इन मामलों में संबंधित विभागों के अधिकारियों ने अलग-अलग रिपोर्ट दर्ज कराई है.
पुलिस के अनुसार इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड एक बीमा कंपनी का जिला कोऑर्डिनेटर मुकेश कुमार सिंह है, जो फिलहाल फरार है. पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस घोटाले के और बड़े खुलासे हो सकते हैं.
झांसी में सामने आया यह फसल बीमा घोटाला न सिर्फ सरकारी योजनाओं की निगरानी पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह संगठित गिरोह तकनीक और दस्तावेजी खामियों का फायदा उठाकर लाखों-करोड़ों की ठगी कर रहे हैं. फिलहाल पुलिस कार्रवाई जारी है, लेकिन इस केस में अभी और बड़े नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
वहीं घटना का खुलासा करते हुए झांसी सीओ सदर अरीबा नोमान ने जानकारी देते हुए बताया कि झांसी में ‘फसल बीमा योजना’ के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े का पुलिस ने खुलासा किया है. दिसंबर 2025 में दर्ज एफआईआर के आधार पर हुई जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी जमीन दस्तावेज तैयार कर आधार और बैंक डिटेल्स के जरिए IFFCO-TOKIO पोर्टल पर गलत तरीके से बीमा क्लेम ले रहे थे.
मामले में भूपेंद्र, पारस नायक और ऋतिक तिवारी को गिरफ्तार किया गया है. गरौठा और प्रेमनगर में अब तक करीब 11.64 लाख रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जबकि मास्टरमाइंड मुकेश फरार है. पुलिस को आशंका है कि घोटाले की रकम करोड़ों तक पहुंच सकती है.(अजय झा का इनपुट)