PMKSY 2.0 से बंगाल के 2.29 लाख किसानों को फायदा, 350 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं जारी

PMKSY 2.0 से बंगाल के 2.29 लाख किसानों को फायदा, 350 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं जारी

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (WDC-PMKSY 2.0) के तहत पश्चिम बंगाल के छह रेड लैटेराइट मिट्टी वाले जिलों में चल रहे 27 वॉटरशेड प्रोजेक्ट्स से 2.29 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिला है. 350.60 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना का उद्देश्य जल संरक्षण, सिंचाई विकास, टिकाऊ खेती और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करना है.

Haryana Water Tank Micro irrigation PlanHaryana Water Tank Micro irrigation Plan
क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • Oct 12, 2026,
  • Updated Oct 12, 2026, 12:39 PM IST

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (WDC-PMKSY 2.0) के वॉटरशेड डेवलपमेंट कंपोनेंट से पश्चिम बंगाल के पश्चिमी हिस्से के छह 'रेड लैटेराइट' मिट्टी वाले जिलों के 2.29 लाख से अधिक किसानों को फायदा हुआ है.

इस प्रोग्राम का फोकस जल संरक्षण, सिंचाई विकास, टिकाऊ खेती और ग्रामीण आजीविका पर है.

यह स्कीम पश्चिम बंगाल राज्य कृषि विभाग के तहत काम करने वाली 'पश्चिम बंगाल राज्य वॉटरशेड विकास एजेंसी' के जरिए बीरभूम, बांकुरा, पुरुलिया, पश्चिम बर्धमान, पश्चिम मेदिनीपुर और झारग्राम में 27 वॉटरशेड प्रोजेक्ट्स के माध्यम से लागू की जा रही है.

350.60 करोड़ रुपये की परियोजना

प्रोजेक्ट की कुल मंजूर लागत 350.60 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र का हिस्सा 210.36 करोड़ रुपये और राज्य का हिस्सा 140.24 करोड़ रुपये है.

ये प्रोजेक्ट्स लगभग 1.29 लाख हेक्टेयर जमीन को कवर करते हैं और इनके लिए केंद्र और राज्य 60:40 के अनुपात में फंड देते हैं. राज्य सरकार ने बताया कि मंजूर किए गए केंद्रीय आवंटन में से राज्य को केंद्र सरकार से 185.42 करोड़ रुपये मिल चुके हैं.

इस प्रोग्राम के तहत 2025-26 फाइनेंशियल ईयर में जारी किए गए 73.70 करोड़ रुपये का 100 प्रतिशत इस्तेमाल किया गया.

मौजूदा फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में, केंद्र और राज्य से लगभग 45.56 करोड़ रुपये मिले हैं, जिसमें से लगभग 22 करोड़ रुपये पहले ही खर्च किए जा चुके हैं.

राज्य ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के दौरान प्रोजेक्ट की बाकी जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्र से अतिरिक्त 24.94 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भी दिया है.

प्रेस नोट के अनुसार, इस स्कीम के तहत कुल खर्च लगभग 268.86 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो प्रोजेक्ट की कुल लागत का 77 प्रतिशत है.

22,308 हेक्टेयर जमीन को फायदा

स्कीम की 'एंट्री-लेवल एक्टिविटीज' के तहत, स्थानीय स्तर पर पानी की उपलब्धता और सिंचाई की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए खेत में तालाब खोदने और दोबारा खोदने, ग्राउंडवाटर रिचार्ज और वॉटर-हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर के नवीनीकरण से जुड़े 510 काम पूरे किए गए हैं. प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के तहत 5,491 काम पूरे किए गए हैं, जिनमें वॉटर-हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर, चेक डैम, सिंचाई की नहरें और पेड़-पौधे लगाने और जंगल बढ़ाने के काम शामिल हैं.

इन कामों से लगभग 22,308 हेक्टेयर बारिश पर निर्भर जमीन के विकास में मदद मिली है, जिससे पानी की उपलब्धता बेहतर हुई है और प्राकृतिक संसाधनों के टिकाऊ प्रबंधन को बढ़ावा मिला है.

इस कार्यक्रम का मकसद सामुदायिक भागीदारी और आजीविका के अलग-अलग जरिया अपनाकर ग्रामीण आजीविका को मजबूत करना भी रहा है. लगभग 5,545 स्वयं-सहायता समूहों को माइक्रो-क्रेडिट और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों के जरिए मदद मिली है.

यह योजना केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम है जिसे केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत भूमि संसाधन विभाग फंड करता है. इसका मकसद सूखा प्रभावित और बारिश पर निर्भर इलाकों में खेती करने वाले समुदायों, खासकर छोटे और सीमांत किसानों की मुश्किल हालात का सामना करने की क्षमता को बेहतर बनाना है.

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