
सोनभद्र में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में बड़ी अनियमितता सामने आई है. सत्यापन के दौरान पता चला कि करीब 14 हजार ऐसे लोगों को योजना का लाभ मिल रहा था जो या तो मृतक हैं, या फिर भूमिहीन हो चुके हैं. इनमें कुछ आयकर दाता और नाबालिग भी शामिल पाए गए. अधिकारियों ने बताया कि 2019 से चल रही इस योजना में कई किसानों की मृत्यु हो गई या उन्होंने अपनी जमीन बेच दी, लेकिन उनकी किस्तें जारी रहीं. फार्मर रजिस्ट्री के तहत जब घर-घर वेरिफिकेशन कराया गया तो यह खुलासा हुआ. अब इन सभी की किस्तें रोक दी गई हैं और सूची मुख्यालय भेजी जा चुकी है. हालांकि e-KYC, आधार verification और land seeding न होने से पहले ही कई किस्तें स्वतः रुक चुकी थीं.
किसान सम्मान निधि में जिला प्रशासन के द्वारा की गई जांच में खुलासा हुआ है कि 14000 से ज्यादा किसान जिनकी मृत्यु हो चुकी है, वह भी सम्मान निधि ले रहे थे. इनमें कई तो ऐसे हैं जो भूमिहीन हैं और आयकरदाता भी हैं. कृषि विभाग के द्वारा जब इनका वेरिफिकेशन किया गया तब इस राज से पर्दा उठा. हजारों की संख्या में ऐसे भी किसान हैं जिनके पास कृषि योग्य जमीन ही नहीं है या फिर वो जमीन बेच चुके हैं. 14000 के लगभग मृतक किसानों के खाते में राशि भेजी जा रही थी.
विभाग को यह पता ही नहीं चल पाया कि इनमें से कई किसान जो उस दौरान जीवित थे और इस योजना का लाभ उठा रहे थे, उनमें कई की मृत्यु हो चुकी है. किसान सम्मान निधि हर तीसरे महीने में 2000 रुपये लाभार्थियों के खाते में भेज दी जाती है. साल 2019 से इस योजना की शुरुआत हुई थी. उनके मुताबिक हर 6 महीने पर केवाईसी और आधार से जांच की जाती है. जांच के बाद ही इतनी बड़ी अनियमितता का पता चला. केवाईसी के बाद सभी का पैसा रोक दिया गया है और रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है. लाभ लेने वालों में कुछ नाबालिग भी हैं.
सोनभद्र के उप कृषि निदेशक वीरेंद्र कुमार ने कहा, हर किसान का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है. जो भी किसान किसान सम्मान निधि में पंजीकृत हैं, उन सभी को फार्मर रजिस्ट्री कराना जरूरी है. चूंकि यह 2019 से योजना चल रही है और उस समय से आज तक काफी किसानों की मृत्यु भी हो गई है, कुछ किसानों ने अपनी जमीन बेच डाली है. हर छह महीने में आधार का वेरिफिकेशन होता है, लिंकेज होता है और लैंड सीडिंग होती है. बैंक में e-KYC होती है.
यह सब प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और एक भी स्टेप छूटा तो उसकी स्वतः ही भारत सरकार के माध्यम से किस्त रोक दी जाती है. कृषि निदेशक ने कहा कि 100 परसेंट फार्मर रजिस्ट्री बनाने के लिए हमने जब किसानों का सत्यापन कराया तो कुछ मृतक निकले, कुछ भूमिहीन निकले हैं. मृतक, भूमिहीन लोगों की सूची बनाकर लखनऊ मुख्यालय भेज दिया गया है और वहां से यह सूची शासन को चली जाएगी सूची और ऐसे फर्जी लोगों का नाम कट जाएगा.
इस तरह का फर्जीवाड़ा करने वाले किसानों की संख्या 14 हजार के आसपास है. इन सभी किसानों की किस्तें रुकी हुई हैं. ये वो किसान हैं जो जब तक जिंदा थे, पीएम किसान की किस्तें ले रहे थे. तब तक ई-केवाईसी नहीं हुई थी. आधार वेरिफिकेशन भी नहीं हुआ था. यानी इसमें मृतक किसान के नाम पर भी पैसा जा रहा था. बाद में प्रशासन की तरफ से सख्ती की गई और केवाईसी, आधार सीडिंग का अभियान चलाया गया. इसमें कई लोग फेल रहे जिसके बाद पीएम किसान की किस्तें रोक दी गईं. इस तरह की गड़बड़ आगे न हो, इसके लिए फार्मर रजिस्ट्री का काम कराया जा रहा है. सभी किसानों की रजिस्ट्री कराई जाएगी. जिनकी रजिस्ट्री बाकी है, उनका कराया जा रहा है.(विधु शेखर मिश्रा का इनपुट)