
महाराष्ट्र में विपक्ष की आलोचना के बीच राज्य कैबिनेट ने मंगलवार को 'पुण्यश्लोक अहिल्या देवी होल्कर शेतकरी कर्जमुक्ति योजना 2026' के तहत उन लगभग पांच लाख किसानों को शामिल करने का फैसला किया, जो 2017 से 2019 के बीच लागू की गई कृषि लोन माफी योजनाओं से छूट गए थे. महाराष्ट्र ने इससे पहले 2019 में 'महात्मा ज्योतिबा फुले कर्जमुक्ति योजना' लागू की थी.
नाम न बताने की शर्त पर एक कैबिनेट मंत्री ने कहा, "राज्य ने छूटे हुए पांच लाख किसानों के लिए 14,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. 2017 से 2019 के बीच कई किसान पात्र थे, लेकिन उन्हें कृषि लोन माफी योजना का लाभ नहीं मिला. इन किसानों को मौजूदा लोन माफी योजना में शामिल किया जाएगा."
'पुण्यश्लोक अहिल्या देवी होल्कर शेतकरी कर्जमुक्ति योजना 2026' से 58 लाख किसानों को लाभ होगा, और राज्य के खजाने पर कुल लागत 36,585 करोड़ रुपये होने का अनुमान है. कुल 65 लाख बैंक-खाताधारक किसान हैं जिन्होंने फसल लोन लिया है, जबकि 58 लाख किसान मौजूदा कृषि लोन माफी के लिए पात्र हैं.
यह फैसला विपक्षी दलों की आलोचना के बीच आया है, जिन्होंने सरकार पर कड़ी शर्तें थोपने का आरोप लगाया है, जिससे कई योग्य किसान लो माफी का लाभ पाने से वंचित रह सकते हैं. विपक्ष ने मांग की है कि सरकार शर्तों में ढील दे ताकि सभी पात्र लाभार्थी किसान योजना के दायरे में आ सकें.
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आरोप लगाया कि बीजेपी और उसके सहयोगियों ने 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले बिना किसी शर्त का जिक्र किए कृषि लोन माफी का वादा किया था. सपकल ने कहा, "जब बीजेपी और उसके सहयोगी दलों ने 2024 के चुनावों के दौरान कृषि लोन माफी का वादा किया था, तो उन्होंने किसानों को यह नहीं बताया था कि इस योजना के साथ कड़ी शर्तें जुड़ी होंगी. अगर उन्होंने ऐसा बताया होता, तो शायद किसान कोई और फैसला लेते."
दूसरी ओर, महाराष्ट्र में प्याज किसानों के एक संगठन ने उन किसानों के लिए ज्यादा इन्सेंटिव की मांग की है जिन्होंने अपने फसल लोन का भुगतान समय पर किया है. उनका कहना है कि सरकार की हालिया लोन माफी योजना से लोन न चुकाने वालों को बढ़ावा मिलेगा.
संगठन ने एक बयान में कहा कि सरकार की 'पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर किसान लोन माफ़ी योजना' में समय पर लोन चुकाने वालों की तुलना में लोन नहीं भरने वालों को अधिक फायदा दिया गया है.
इस योजना के तहत 2 लाख रुपये तक के फसल लोन माफ किए जाएंगे. जिन किसानों ने नियमित रूप से अपने लोन चुकाए हैं, उन्हें 50,000 रुपये की अनुदान राशि मिलेगी. हालांकि, राज्य के प्याज किसान संगठन का कहना है कि लोन न चुकाने वालों को मिलने वाले फायदों की तुलना में यह राशि बहुत कम है.
संगठन ने कहा, "लोन न चुकाने वालों को 2 लाख रुपये तक की लोन माफी मिल रही है, जबकि समय पर लोन भरने वाले किसानों को इसकी तुलना में बहुत कम फायदा मिल रहा है."
संगठन ने कहा कि अगर लोन न चुकाने वाले पात्र लोगों को 2 लाख रुपये की माफी दी जाती है, तो नियमित रूप से लोन चुकाने वालों को कम से कम 2.5 लाख रुपये का अनुदान दिया जाना चाहिए.
संगठन ने कहा, "नहीं तो, इससे गलत मैसेज जा सकता है कि लोन चुकाने के बजाय लोन न चुकाना ज्यादा फायदेमंद है, जिससे भविष्य में लोन न चुकाने वाले उधारकर्ताओं की संख्या बढ़ सकती है."