
आंवला उत्पादन के लिए प्रसिद्ध जनपद प्रतापगढ़ में ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा. उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे के संयुक्त प्रयास से चल रहे इस अभियान के तहत प्रदेश के 75 जिलों में किसानों को आधुनिक खेती की जानकारी दी जा रही है. इसी क्रम में प्रतापगढ़ इस अभियान का 35वां पड़ाव बना. कार्यक्रम में जिले के कृषि अधिकारियों ने किसानों को सरकार द्वारा चलाई जा रही अलग-अलग योजनाओं की जानकारी दी और उनसे खेती को अधिक लाभकारी बनाने की अपील की. वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नत खेती की तकनीकों और नई फसल किस्मों के बारे में विस्तार से बताया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर खेती से जुड़े सवालों के जवाब भी प्राप्त किए.
कार्यक्रम के पहले चरण में पशुपालन विभाग के चिकित्सक डॉ. अजय सिंह ने पशुपालकों को सरकार की योजनाओं के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि नंदिनी योजना के तहत 63 लाख रुपये की परियोजना पर किसानों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है. इसके अलावा मिनी नंदिनी योजना के अंतर्गत देसी नस्ल की 10 गायों के पालन पर लगभग 11.80 लाख रुपये की सब्सिडी मिलती है. इन योजनाओं से किसानों की आय बढ़ाने के साथ ही दुग्ध उत्पादन में भी वृद्धि हो रही है.
दूसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र प्रतापगढ़ के वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार सिंह ने किसानों को बताया कि खेत का समतलीकरण बहुत जरूरी है. यदि खेत समतल होगा तो फसल एक समान उगेगी, सिंचाई के पानी की बचत होगी और खाद-बीज भी सही मात्रा में हर पौधे तक पहुंचेगा. इससे उत्पादन में बढ़ोतरी होती है.
तीसरे चरण में कृषि विभाग के एडिशनल कृषि रक्षा अधिकारी वीर विक्रम सिंह ने बताया कि सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है. उन्होंने कहा कि किसान सम्मान निधि से किसानों को आर्थिक सहारा मिला है. इसके साथ ही हर किसान के पास फार्मर आईडी होना जरूरी है , जिसके जरिए भविष्य में किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा.
चौथे चरण में मुथूट फाइनेंस के ब्रांच मैनेजर अरविंद सिंह ने बताया कि उनकी संस्था पूरे देश में बड़े नेटवर्क के साथ काम कर रही है. उन्होंने बताया कि जरूरत पड़ने पर किसान या महिलाएं 20 मिनट के भीतर गोल्ड लोन प्राप्त कर सकते हैं. इसके लिए सिबिल स्कोर या अधिक औपचारिकताओं की जरूरत नहीं होती.
पांचवें चरण में कृषि विभाग के सहायक विकास अधिकारी पंकज पांडे ने किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य के महत्व के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती के कारण जमीन की सेहत प्रभावित हो रही है. ऐसे में जैविक खेती अपनाना जरूरी है. उन्होंने किसानों को बीजामृत बनाने की विधि भी समझाई.
छठे चरण में वाइफ (BAIF) की प्रोजेक्ट मैनेजर शांति मिश्रा ने बताया कि यह संस्था 1967 से देश में काम कर रही है और प्रतापगढ़ में इसके 14 केंद्र संचालित हैं. कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से पशुधन की गुणवत्ता बढ़ाने में संस्था का महत्वपूर्ण योगदान है. उन्होंने बताया कि देश के दूध उत्पादन में संस्था का लगभग 25 प्रतिशत तक योगदान है और इसमें महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है.
कार्यक्रम के सातवें चरण के दौरान जादूगर सलमान ने अपने अंदाज में किसानों को जागरूक किया और बताया कि यदि किसान समूहों और सरकारी योजनाओं से जुड़ेंगे तो बेहतर लाभ कमा सकते हैं.
कार्यक्रम के अंत में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 500 रुपये के 10 पुरस्कार वितरित किए गए. सभी पुरस्कार महिलाओं ने जीते. वहीं, प्रथम पुरस्कार शांति मिश्रा और द्वितीय पुरस्कार मीरा यादव को मिला.
किसान कारवां यह कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक लंबी और सार्थक यात्रा है, जो 29 दिसंबर 2025 से शुरू होकर मई 2026 के अंत तक प्रदेश भर के सभी 75 जिलों तक पहुंचेगी. किसान तक का किसान कारवां यूपी के हर जिले में पहुंचकर किसानों, ग्राम प्रधानों, प्रगतिशील किसानों और महिला किसानों को एक साझा मंच देगा. यहां खेती से जुड़ी नवीनतम तकनीकों की जानकारी मिलेगी, सरकारी योजनाओं को सरल भाषा में समझाया जाएगा और उन सर्वोत्तम कृषि प्रथाओं पर चर्चा होगी, जो आज के समय में किसानों के लिए वास्तव में उपयोगी हैं.
हमारे इस किसान कारवां में हर पड़ाव पर होंगे विशेषज्ञों के व्याख्यान, आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों की प्रदर्शनियां, प्रशिक्षण सत्र और किसान गोष्ठियां. साथ ही, उन प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने नवाचार, मेहनत और समझदारी से खेती को एक नई दिशा दी है. किसानों के लिए यह मंच अनुभव साझा करने का भी होगा और सीखने का भी.
Frequently Asked Questions (FAQs)
1. किसान कारवां क्या है?
किसानों से सीधे जुड़ने वाला किसान तक का विशेष कृषि अभियान.
2. किसान कारवां का उद्देश्य क्या है?
किसानों की समस्याएं, समाधान और नई जानकारी सामने लाना.
3. किसान कारवां किन जगहों पर हो रहा है?
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में.
4. किसान कारवां किन किसानों के लिए है?
छोटे, सीमांत, युवा, महिला और प्रगतिशील किसान-सभी के लिए.
5. किसान कारवां में क्या-क्या जानकारी मिलेगी?
खेती, लागत घटाने के तरीके, तकनीक और योजनाओं की जानकारी.
6. क्या किसान अपनी समस्या सीधे बता सकते हैं?
हां, किसान अपनी बात सीधे मंच पर रख सकते हैं.
7. क्या इसमें भाग लेने के लिए शुल्क है?
नहीं, किसानों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है.
8. किसान कारवां की जानकारी कहां मिलेगी?
किसान तक के सोशल मीडिया हैंडल और यूट्यूब चैनल https://www.youtube.com/@kisantakofficial पर