
छोटी काशी के नाम से मशहूर गाजीपुर जनपद के कोंडरी गांव में ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा. उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे के साझा प्रयास से चल रहे इस विशेष अभियान के तहत प्रदेश के 75 जिलों में किसानों तक खेती की नई तकनीक और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जा रही है. इस अभियान की कवरेज में गाजीपुर जनपद का यह 40वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया. इस दौरान जनपद के कृषि अधिकारियों ने किसानों को खेती से जुड़ी सरकार की विभिन्न लाभकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी और उनका लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया.
वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को आधुनिक खेती की नई तकनीकों, उन्नत बीज, बेहतर उत्पादन और लागत कम कर आय बढ़ाने के उपायों के बारे में बताया. वैज्ञानिकों ने किसानों को बदलती जलवायु के बीच टिकाऊ खेती के तरीकों से भी अवगत कराया. किसानों ने भी कार्यक्रम में उत्साह के साथ भाग लिया और खेती से जुड़े अपने सवाल विशेषज्ञों से पूछे. किसानों का कहना था कि ऐसे कार्यक्रमों से उन्हें नई जानकारी मिलती है, जिससे खेती को और बेहतर बनाने में मदद मिलती है.
कार्यक्रम के पहले चरण में उद्यान विभाग के निरीक्षक सुरेंद्र पाल ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से किसानों के लिए कई फसलों के बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इसके साथ ही ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना के तहत किसानों को सिंचाई के लिए पाइप 75 प्रतिशत सब्सिडी पर दिए जा रहे हैं, जबकि स्प्रिंकलर सिंचाई यंत्र 90 प्रतिशत सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं.
दूसरे चरण में उप कृषि निदेशक विजय कुमार ने बताया कि किसानों के लिए फार्मर रजिस्ट्री कराना बहुत जरूरी है. आने वाले समय में खाद-बीज लेने से लेकर किसान सम्मान निधि का लाभ लेने तक फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य हो जाएगी. उन्होंने बताया कि जनपद में 80 प्रतिशत से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री हो चुकी है. साथ ही किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त 13 मार्च को किसानों के खातों में आएगी.
तीसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ. डी.के. सिंह ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी के आवश्यक 16 पोषक तत्वों में कमी आ रही है. उन्होंने बताया कि अगर मिट्टी स्वस्थ नहीं होगी तो उत्पादन और मानव स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होंगे, इसलिए संतुलित उर्वरक और जैविक तरीकों का प्रयोग जरूरी है.
चौथे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह ने बताया कि आजादी के समय लोगों की थाली में मोटे अनाज का प्रतिशत लगभग 54 प्रतिशत था, जो अब घटकर 4 प्रतिशत से भी कम रह गया है. उन्होंने किसानों को मोटे अनाज की खेती बढ़ाने की सलाह दी, क्योंकि इसमें लागत कम और लाभ अधिक होता है.
पांचवें चरण में प्लांट प्रोटेक्शन विभाग के वैज्ञानिक डॉ. ओंकार सिंह ने किसानों को फसलों में लगने वाले मित्र और शत्रु कीटों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि कई बार किसान जानकारी के अभाव में मित्र कीटों को भी कीटनाशक से नष्ट कर देते हैं, जबकि ये कीट फसलों की रक्षा करते हैं.
छठवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र गाजीपुर के अध्यक्ष डॉ. वी.के. सिंह ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि विविधीकरण जरूरी है. उन्होंने पशुपालन, मछली पालन और अलग-अलग फसलों की खेती को अपनाने की सलाह दी. साथ ही किसानों को बीज, सिंचाई और कीटनाशकों के सही उपयोग की जानकारी रखने पर भी जोर दिया.
सातवें चरण में इफको एमसी के मंडल अधिकारी सतीश कुमार यादव ने बताया कि वर्ष 2015 में इफको एमसी की शुरुआत हुई थी. इसका उद्देश्य किसानों को अच्छी क्वालिटी के सुरक्षित कीटनाशक उपलब्ध कराना है. यह जापान की कंपनी के साथ मिलकर किसानों के लिए बेहतर उत्पाद उपलब्ध करा रही है.
आठवें चरण में पशुपालन विभाग के डॉ. सत्य प्रकाश ने बताया कि पशुओं में किलनी एक चूसक कीट है, जिससे दुग्ध उत्पादन प्रभावित होता है और पशु बीमार पड़ जाते हैं. इससे बचाव के लिए विभाग द्वारा उपलब्ध इवरमेक्टिन दवा के प्रयोग और साफ-सफाई बनाए रखने की सलाह दी.
नौवे चरण में इफको के मार्केटिंग इंचार्ज सचिन तिवारी ने किसानों को इफको के अलग-अलग उत्पादों के बारे में बताया. उन्होंने विशेष रूप से नैनो यूरिया और लिक्विड डीएपी के उपयोग और इसके लाभों पर विस्तार से जानकारी दी.
कार्यक्रम के अंत में किसानों के लिए लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 500 रुपये के 10 पुरस्कार निकाले गए. वहीं, पहला इनाम महिला किसान सुनीता को मिला, जबकि दूसरा इनाम राम लखन ने जीता.
किसान कारवां यह कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक लंबी और सार्थक यात्रा है, जो 29 दिसंबर 2025 से शुरू होकर मई 2026 के अंत तक प्रदेश भर के सभी 75 जिलों तक पहुंचेगी. किसान तक का किसान कारवां यूपी के हर जिले में पहुंचकर किसानों, ग्राम प्रधानों, प्रगतिशील किसानों और महिला किसानों को एक साझा मंच देगा. यहां खेती से जुड़ी नवीनतम तकनीकों की जानकारी मिलेगी, सरकारी योजनाओं को सरल भाषा में समझाया जाएगा और उन सर्वोत्तम कृषि प्रथाओं पर चर्चा होगी, जो आज के समय में किसानों के लिए वास्तव में उपयोगी हैं.
हमारे इस किसान कारवां में हर पड़ाव पर होंगे विशेषज्ञों के व्याख्यान, आधुनिक कृषि उपकरणों और तकनीकों की प्रदर्शनियां, प्रशिक्षण सत्र और किसान गोष्ठियां. साथ ही, उन प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने नवाचार, मेहनत और समझदारी से खेती को एक नई दिशा दी है. किसानों के लिए यह मंच अनुभव साझा करने का भी होगा और सीखने का भी.
Frequently Asked Questions (FAQs)
1. किसान कारवां क्या है?
किसानों से सीधे जुड़ने वाला किसान तक का विशेष कृषि अभियान.
2. किसान कारवां का उद्देश्य क्या है?
किसानों की समस्याएं, समाधान और नई जानकारी सामने लाना.
3. किसान कारवां किन जगहों पर हो रहा है?
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में.
4. किसान कारवां किन किसानों के लिए है?
छोटे, सीमांत, युवा, महिला और प्रगतिशील किसान-सभी के लिए.
5. किसान कारवां में क्या-क्या जानकारी मिलेगी?
खेती, लागत घटाने के तरीके, तकनीक और योजनाओं की जानकारी.
6. क्या किसान अपनी समस्या सीधे बता सकते हैं?
हां, किसान अपनी बात सीधे मंच पर रख सकते हैं.
7. क्या इसमें भाग लेने के लिए शुल्क है?
नहीं, किसानों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है.
8. किसान कारवां की जानकारी कहां मिलेगी?
किसान तक के सोशल मीडिया हैंडल और यूट्यूब चैनल https://www.youtube.com/@kisantakofficial पर