लखनऊ गोधन समागम: आईटी प्रोफेशनल्स की अनोखी पहल, गोपालन को तकनीक से जोड़कर किसानों को सशक्त बनाने की मुहिम

लखनऊ गोधन समागम: आईटी प्रोफेशनल्स की अनोखी पहल, गोपालन को तकनीक से जोड़कर किसानों को सशक्त बनाने की मुहिम

लखनऊ में आयोजित गोधन समागम में आईटी सेक्टर के विशेषज्ञों ने गोपालन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की पहल प्रस्तुत की. कर्नाटक से आए राम सुब्रमण्यन और राजेश पुरी ने बताया कि गोबर आधारित उत्पादों और स्वदेशी प्रणालियों के जरिए किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त किया जा सकता है. गो चेतना जैसे प्रोजेक्ट के माध्यम से उत्तर प्रदेश में इस मॉडल का विस्तार करने की योजना तैयार की गई है.

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नवीन लाल सूरी
  • Lucknow,
  • Feb 23, 2026,
  • Updated Feb 23, 2026, 3:46 PM IST

लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित गोधन समागम ने एक अनोखी पहल को उजागर किया, जिसमें आईटी सेक्टर के विशेषज्ञों ने गोपालन के क्षेत्र में नई तकनीकों और विचारों को प्रस्तुत किया. इस कार्यक्रम में कर्नाटक से आए राम सुब्रमण्यन और राजेश पुरी जैसे विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए.

आईटी प्रोफेशनल्स का गोपालन में योगदान

राम सुब्रमण्यन ने बताया, "हम आईटी इंडस्ट्री के प्रोफेशनल्स हैं और गोपालन को इंडीजीनस टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं. हमारा नेटवर्क बेंगलुरु, मैसूर, चेन्नई, हैदराबाद, कोयंबटूर, तिरुनेलवेली, कलबुर्गी और जयपुर तक फैला हुआ है." उन्होंने उत्तर प्रदेश में गोपालन को बढ़ावा देने के लिए अपनी योजनाओं का भी उल्लेख किया.

किसानों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण

राजेश पुरी ने बताया कि गोपाल्स का उद्देश्य किसानों को गाय से जुड़ने और उनके उत्पादों का सही उपयोग करने के लिए प्रेरित करना है. "हम वीकेंड में गौशालाओं में जाकर स्वच्छता अभियान चलाते हैं और देसी गाय के वैज्ञानिक लाभों के बारे में जागरूकता फैलाते हैं." उन्होंने यह भी बताया कि गोबर से बने उत्पादों जैसे मूर्तियां, दंत मंजन, कुमकुम और विभूति के माध्यम से किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है.

उत्तर प्रदेश में विस्तार की योजना

दक्षिण भारत में सफल कार्यक्रमों के बाद, गोपाल्स ने उत्तर प्रदेश में अपने कार्यों को विस्तार देने की योजना बनाई है. "हम किसानों को गोबर से उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग देते हैं और उनके उत्पादों को बाजार में बेचने में मदद करते हैं," राम सुब्रमण्यन ने कहा. उन्होंने यह भी बताया कि इन उत्पादों की कीमत 25 रुपये से 300 रुपये तक होती है.

स्थानीय समुदाय और जागरुकता

कार्यक्रम में किसानों को गोपालन के महत्व और इसके आर्थिक लाभों के बारे में जागरूक किया गया. "हम गो संडे कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय समुदाय को गौशालाओं से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं," राजेश पुरी ने कहा. उन्होंने बताया कि गोबर से बने उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए 'गो चेतना' नामक प्रोजेक्ट शुरू किया गया है.

गोधन समागम ने यह साबित किया कि आईटी सेक्टर के विशेषज्ञ भी ग्रामीण भारत के किसानों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. इस पहल से न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी तकनीकों को भी बढ़ावा मिलेगा.

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