
जयपुर में "भारत‑VISTAAR" के शुभारंभ के साथ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक ओर किसानों को एआई‑आधारित डिजिटल सुरक्षा कवच सौंपा, तो दूसरी ओर कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखे राजनीतिक हमले करते हुए यूपीए के दौर में हुए “किसान विरोधी निर्णयों” का विस्तृत लेखा‑जोखा भी देश के सामने रखा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों के साथ ही राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, राजस्थान सरकार के कृषि मंत्री किशोरी लाल मीणा मंच पर उपस्थित रहे.
अपने संबोधन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि एक नेता हैं, जो “पार्ट‑टाइम पॉलिटिशियन और फुल‑टाइम ड्रामेबाज़” हैं, जिन्हें न ट्रेड की समझ है, न ट्रेडिशन की और न ही गांव‑खेत की असली जिंदगी का अनुभव है. उन्होंने तंज किया कि जिन्होंने न गांव की गलियां देखी हैं, न कीचड़, न खेत की पगडंडियां, वे रोज नए आरोप गढ़कर किसानों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं.
कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने किसानों के बीच खड़े होकर पूछा कि राहुल गांधी यह बताएं कि जब स्वामीनाथन कमेटी ने लागत पर 50% मुनाफा जोड़कर MSP तय करने की सिफारिश की थी, तब कांग्रेस‑नीत यूपीए सरकार ने कोर्ट में हलफनामा देकर इसे मानने से इनकार क्यों किया. उन्होंने कहा कि जिस बात को कांग्रेस “बाजार विकृति” का नाम देकर ठुकराती रही, उसी को 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने किसानों के हित में धरातल पर उतारते हुए लागत पर 50% लाभ जोड़कर MSP तय करने का फैसला लागू किया.
सेब के मुद्दे पर उठाए जा रहे सवालों का उत्तर देते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भारत को हर साल लगभग 5.5 लाख मीट्रिक टन सेब की जरूरत होती है, जो अभी तुर्किये और ईरान जैसे देशों से भी आता है. उन्होंने कहा कि यदि इसमें से मात्र 1 लाख मीट्रिक टन सेब अमेरिका से लिया जाए और उस पर आयात मूल्य ₹80 प्रति किलो के ऊपर ₹25 शुल्क जोड़कर कोटा तय किया जाए, तो यह भारत के सेब उत्पादकों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा, बल्कि “तुर्किये से लेने के बजाय कहीं और से लेने” का मामूली बदलाव मात्र है.
सोयाबीन और मक्का पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इन पर कोई रियायत नहीं दी गई और यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस शासन में भी 20 अरब डॉलर के कृषि उत्पादों का आयात होता था, जिसमें डेयरी उत्पाद भी शामिल थे. चौहान ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने साफ निर्देश दिया है कि दूध, घी, दही, पनीर सहित कोई भी डेयरी उत्पाद भारत की धरती पर किसी भी कीमत पर आयात नहीं होने दिया जाएगा, ताकि देश के दूध उत्पादक किसानों को नुकसान न हो.
कपास के मामले में मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि घरेलू उत्पादन के मुकाबले उद्योगों की जरूरत अधिक होने से उद्योगों को कुछ कपास आयात करना पड़ता है, जिससे कपड़ा उद्योग चल सके, रोजगार बने और तैयार वस्त्रों का निर्यात बढ़े. उन्होंने बताया कि भारत का टेक्सटाइल निर्यात विभिन्न उत्पादों को मिलाकर लगभग 4 लाख करोड़ रुपये है, जिसे 45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने की क्षमता है और इसके फलस्वरूप अंततः लाभ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ही मिलेगा. उन्होंने साफ घोषणा की कि जीरा, मेथी, इसबगोल जैसी राजस्थान में पैदा होने वाली मसाला फसलों सहित भारतीय मसालों पर आयात की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी, बल्कि इन मसालों का निर्यात 0% ड्यूटी पर अमेरिका जैसे बाजारों में बढ़ाने की व्यवस्था की गई है, जिससे सीधे भारतीय किसानों को फायदा होगा.
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने “भारत‑VISTAAR" को पूछो और सीधे जवाब पाओ” वाला प्लेटफॉर्म बताते हुए कहा कि अब किसान बहनों‑भाइयों को न दफ्तरों के चक्कर लगाने होंगे, न जटिल ऐप्लिकेशन से जूझना पड़ेगा, सिर्फ मोबाइल उठाकर 155261 नंबर डायल करना होगा. उन्होंने समझाया कि फसल में रोग लगे, बुवाई का सही समय जानना हो, अगले दिन बारिश होगी या नहीं, या अलग‑अलग मंडियों के भाव चाहिए हों – किसान सिर्फ फोन पर सवाल पूछेगा और तुरंत जवाब मिलेगा कि कौन‑सी दवा डालें, कब बुवाई करें और जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, दिल्ली या मुंबई की मंडियों में क्या भाव चल रहे हैं.
चौहान ने बताया कि भारत‑VISTAAR अभी हिंदी और अंग्रेजी में शुरू हो रहा है, लेकिन इसे चरणबद्ध तरीके से 11 भारतीय भाषाओं – जैसे गुजराती, तमिल, बंगला, असमिया, कन्नड़ आदि – में विस्तारित किया जाएगा, ताकि देश के हर प्रांत का किसान अपनी भाषा में सही सलाह ले सके. उन्होंने कहा कि इस प्लेटफॉर्म पर पीएम‑किसान, फसल बीमा, सॉइल हेल्थ कार्ड, संशोधित ब्याज अनुदान, कृषि यंत्रीकरण, पर ड्रॉप‑मोर क्रॉप, पीएम कृषि सिंचाई योजना, पीएम अन्नदाता आय संरक्षण अभियान, कृषि अवसंरचना कोष और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं की जानकारी, पात्रता, आवेदन की स्थिति और शिकायत निवारण तक की सुविधा उपलब्ध रहेगी और आगे “फार्मर आईडी” के जरिए खेत, मिट्टी और फसल से जुड़ा पूरा प्रोफाइल भी एक ही जगह पर जुड़ जाएगा.