कुसुम योजना में करप्शन की मार: रिश्वत और लापरवाही के कारण 9 करोड़ का सोलर प्लांट अटका

कुसुम योजना में करप्शन की मार: रिश्वत और लापरवाही के कारण 9 करोड़ का सोलर प्लांट अटका

मध्य प्रदेश के रायसेन में पीएम कुसुम ए योजना के तहत महिला किसान भारती रैकवार ने 9 करोड़ रुपये की लागत से 2 मेगावॉट का सोलर प्लांट तैयार किया, लेकिन बिजली विभाग की लापरवाही और मीटर न लगने से प्लांट शुरू नहीं हो सका. हर महीने लाखों का नुकसान झेल रहीं किसान ने इच्छा मृत्यु की मांग करते हुए प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है. अधिकारियों पर रिश्वत और मनमानी के आरोप लग रहे हैं.

Madhya Pradesh solar project corruptionMadhya Pradesh solar project corruption
क‍िसान तक
  • Raisen ,
  • Feb 18, 2026,
  • Updated Feb 18, 2026, 1:59 PM IST

केंद्र सरकार ने देश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए पीएम सूर्यघर योजना और सोलर पंप जैसी स्कीम चला रखी है. इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारें सब्सिडी भी दे रही हैं. लेकिन इस बीच एक चौंकाने वाली खबर मध्य प्रदेश के रायसेन से आई है जहां सौर ऊर्जा प्लांट लगाने की महत्वाकांक्षी योजना को प्रशासन के आला अधिकारी पलीता लगा रहे हैं. 

दरअसल, रायसेन में एक महिला किसान भारती रैकवार ने पीएम कुसुम ए के अंतर्गत 2 मेगा वॉट का सौर ऊर्जा प्लांट 9 करोड़ 20 लाख रुपये की कीमत से बनाया है जिससे 12 हजार यूनिट प्रतिदिन का बिजली उत्पादन होगा. महिला किसान ने अपनी सारी पूंजी और बैंक से लोन लेकर इस सौर ऊर्जा प्लांट को बनाया है. लेकिन आज तक यह प्लांट शुरू नहीं हो सका है जिसके चलते हर महीने लाखों का नुकसान हो रहा है. 

रायसेन में सोलर प्लांट योजना को पलीता

महिला किसान की शिकायत है कि प्लांट शुरू नहीं होने के बावजूद हर महीने 9 लाख रुपये बैंक की किस्त जा रही है. उनको हर महीने लगभग 40 हजार का नुकसान हो रहा है. प्लांट शुरू नहीं होने से परेशान महिला किसान और उसके पति इच्छा मृत्यु का आवेदन लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे हैं.

यह पूरा मामला रायसेन जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर भुसीमेटा गांव का है. यहां महिला किसान भारती रैकवार ने 9 करोड़ की लागत से 2 मेगा वॉट का सोलर प्लांट तैयार किया. इसके लिए बैंक से 6 करोड़ लोन और रिश्तेदारों से 3 करोड़ से ज्यादा की रकम ली. प्लांट पूरी तरह बनकर तैयार है. नकतरा सब स्टेशन तक बिजली पहुंचाने के लिए पोल लग गए हैं. लेकिन रायसेन विद्युत विभाग के अधिकारी की मनमर्जी से यह प्लांट अधर में लटका है. 

रिश्वतखोरी ने किसान को तोड़कर रख दिया

20 जनवरी को एमटीसीएल से विद्युत विभाग को प्लांट शुरू करने के लिए मीटर लगाने का एक पत्र आया था. यह पत्र महिला किसान को नहीं दिया गया. जब तक मीटर नहीं लगेगा तब तक प्लांट शुरू नहीं हो सकता है. अब महिला किसान को मीटर लगवाने के लिए विद्युत विभाग के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. महिला किसान की शिकायत है कि केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना को क्षेत्रीय कर्मचारी बिगाड़ रहे हैं और बदनामी हो रही है.

केंद्र की योजना के मुताबिक महिला किसान ने भारी-भरकम लोन ले लिया और प्लांट तैयार कर दिया. लेकिन क्षेत्रीय अधिकारी खुद के लाभ, लालच में इस पूरी योजना को पलीता लगा रहे हैं. अकेले रायसेन जिले में 2 मेगा वॉट के 6-7 प्रोजेक्ट लगाए गए हैं. किसानों ने अपनी 6-7 एकड़ जमीन पर प्लांट लगाए हैं. लेकिन काम पूरा हो जाने के बाद भी विद्युत विभाग के कर्मचारी मीटर नहीं लगा रहे हैं. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. 

परेशान किसान ने मांगी इच्छा मृत्यु

महिला किसान भारती रैकवार ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंच कर एडीएम मनोज उपाध्याय को आवेदन दिया जिसमें उन्होंने इच्छा मृत्यु की मांग की है. एडीएम ने तुरंत विद्युत विभाग के अधिकारी अंकुर सेठ से फोन पर बात की. अंकुर सेठ ने एडीएम को बताया कि अभी प्लांट का फाइनल निरीक्षण होना बाकी है और इसके लिए पत्र लिखे जाने की बात कही. दूसरी ओर, महिला किसान ने बिजली अधिकारी पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है.

रिश्वतखोरी ने किसान की मेहनत को किया बर्बाद

महिला किसान का आरोप है कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण उनकी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है. यदि समय रहते प्लांट चालू नहीं किया गया तो परिवार के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है. अब सवालों के घेरे में प्रशासन के अधिकारी हैं. एक सवाल ये भी है कि जब केंद्र सरकार सौर ऊर्जा की योजनाओं को जनहित में लागू कर रही है, तो जमीनी स्तर पर ऐसी लापरवाही क्यों? महिला किसान प्रशासन से न्याय की आस लगाए बैठी है.(राजेश रजक की रिपोर्ट)

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