
उत्तर प्रदेश विधानसभा का मॉनसून सत्र सोमवार (3 अगस्त) से शुरू होने जा रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोकतंत्र में संवाद अत्यंत महत्वपूर्ण है और सदन जनप्रतिनिधियों को संवाद करने का मंच प्रदान करता है. इससे निकले परिणाम जनोपयोगी होते हैं. वहीं, 9 वर्ष में विधानसभा ने पूरे देश में संसदीय कार्यप्रणाली में उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिससे लोकतंत्र मजबूत हुआ है. जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) इस 4 दिन के मॉनसून सत्र को लेकर योगी सरकार पर हमलावर है.
इसके साथ सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने भी एक्स पर एक पोस्ट के जरिए योगी सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने लिखा, ‘मानसून सत्र शुरू हो रहा है, लेकिन लगता है भाजपा सरकार को जनता के सवालों से इतना डर है कि सदन भी गिने-चुने दिनों का ही बुलाया गया है.’ शिवपाल ने सवाल उठाया कि क्या कम दिन सदन चलाकर महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की बदहाली, बिगड़ती कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और चंदा चोरी जैसे गंभीर सवाल कम हो जाएंगे? उन्होंने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी सदन में पूरी मजबूती से जनता की आवाज उठाएगी.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, सदन स्वस्थ चर्चा-परिचर्चा के लिए जाना जा रहा है. यह काम सभी दलों के नेताओं की वजह से संभव हुआ है. सकारात्मक संवाद का परिणाम है कि विगत 9 वर्ष में उत्तर प्रदेश के बारे में देश-दुनिया की धारणा बदली है.
बैठक में नेता सदन योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मॉनसून सत्र में आमजन से जुड़े मुद्दों पर स्वस्थ चर्चा होनी चाहिए. इससे प्रदेश का विकास भी होता है और जनता की समस्याओं का समाधान भी. उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि को जनता के हित से जुड़े हर मुद्दों को सदन में गंभीरता से उठाना चाहिए. सीएम ने सभी सदस्यों से अपील की कि सदन के सुचारु संचालन में सभी सदस्यों का सहयोग मिलना चाहिए, इसमें किसी भी प्रकार की बाधा न आए.
वहीं, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भी सदन के सुचारु संचालन के लिए सभी सदस्यों का सहयोग मांगा. उधर, विपक्ष के इन तीखे हमलों और सदन में हंगामे के पूरे आसार के बीच सत्ता पक्ष ने भी अपनी कमर कस ली है.
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