केंद्र की नीतियों के खिलाफ SKM ने दिल्‍ली में लगाई मजदूर-किसान संसद, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी

केंद्र की नीतियों के खिलाफ SKM ने दिल्‍ली में लगाई मजदूर-किसान संसद, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी

दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित मजदूर-किसान संसद में संयुक्त किसान मोर्चा और ट्रेड यूनियनों ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला. संगठनों ने कॉरपोरेट समर्थक नीतियां छोड़ने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो देशभर में संयुक्त आंदोलन तेज किए जाएंगे.

SKM Kisan Mazdoor SansadSKM Kisan Mazdoor Sansad
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Mar 09, 2026,
  • Updated Mar 09, 2026, 6:52 PM IST

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज संयुक्‍त किसान मोर्चा (SKM) ने मजदूर-किसान संसद का आयोजन किया. इसमें किसानों और मजदूराें से जुड़े कई संगठनों ने केंद्र सरकार की आर्थिक और श्रम नीतियों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी. संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में सरकार से कॉरपोरेट समर्थक और अमेरिका समर्थित नीतियां छोड़ने की मांग की गई. साथ ही SKM ने चेतावनी दी कि अगर इन नीतियों को वापस नहीं लिया गया तो देशभर में लंबे समय तक संयुक्त रूप से आंदोलन चलाए जाएंगे.

23 मार्च और 1 अप्रैल को लेकर ये ऐलान

सभा में मौजूद किसान और मजदूर संघों के नेताओं/वक्ताओं ने कहा कि किसानों और मजदूरों को बड़े पैमाने पर संघर्ष के लिए तैयार रहने के लिए कहा. इसके तहत 23 मार्च 2026 को शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस पर "साम्राज्यवाद विरोधी दिवस" मनाने का आह्वान किया. वहीं, 1 अप्रैल 2026 को चार श्रम संहिताओं के विरोध में पूरे देश में “राष्‍ट्रव्‍यापी काला दिवस” मनाने की घोषणा की. इसके अलावा अलग-अलग राज्यों में महापंचायतें आयोजित कर कॉरपोरेट विरोधी जनसंघर्ष शुरू करने की तैयारी करने की भी बात कही.

'अमेरिका के दबाव में गलत फैसले ले रही सरकार'

मजदूर-किसान संसद का आयोजन संसद सत्र के समानांतर राष्ट्रीय राजधानी में किया गया. इसमें केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, विभिन्न सेक्टोरल फेडरेशनों और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. वक्ताओं ने 12 फरवरी 2026 को हुए देशव्यापी आम हड़ताल को मजदूरों और किसानों की नीतियों के खिलाफ एक मजबूत चेतावनी बताया.

किसान-मजदूर संगठनाें ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया गया कि वह अमेरिका के दबाव में असमान और शोषणकारी भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार ढांचे को स्वीकार कर रही है. वक्ताओं ने सरकार से इस समझौते को खारिज करने और व्यापार मामलों में अमेरिकी दबाव के आगे न झुकने की अपील की. साथ ही ईरान पर जारी युद्ध को रोकने की मांग करते हुए विश्व शांति की जरूरत पर अपना पक्ष रखा. 

कृषि निर्यात पर विशेष मुआवजे की उठाई मांग

सभा में सरकार से खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीय कामगारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और खाड़ी देशों को होने वाले कृषि निर्यात पर विशेष मुआवजा देकर किसानों को लाभकारी कीमतें दिलाने की मांग की गई. मजदूर-किसान संसद ने दिसंबर 2021 में किसान आंदोलन के दौरान संयुक्त किसान मोर्चा को दिए गए लिखित आश्वासनों को लागू न करने के लिए भी सरकार की आलोचना की.

घोषणा में संसद से मांग की गई कि सभी फसलों की खरीद एमएसपी के आधार पर सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाया जाए और एमएसपी की गणना C2 लागत पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर की जाए. इसके अलावा कृषि के आधुनिकीकरण को उत्पादक सहकारिताओं और सार्वजनिक क्षेत्र की एग्रो-आधारित उद्योगों के माध्यम से बढ़ावा देने तथा कृषि में कॉरपोरेट दखल खत्म करने की मांग की गई. किसान नेताओं ने कहा कि मूल्य संवर्धन से होने वाले लाभ का हिस्सा प्राथमिक उत्पादकों को भी मिलना चाहिए.

4 लेबर कोड का किया विरोध

किसानों-मजदूरों ने सभा में चारों श्रम संहिताओं का भी विरोध किया. संगठनों ने कहा कि इन कानूनों से मजदूरों के संगठन बनाने, सामूहिक सौदेबाजी, हड़ताल करने और आठ घंटे काम के अधिकार जैसे कई अधिकार कमजोर हो सकते हैं. संगठनों ने चेतावनी दी कि अगर इन्हें लागू किया गया तो मजदूर और किसान संयुक्त रूप से बड़ा आंदोलन करेंगे.

मजदूर-किसान संसद ने केंद्र सरकार से भारत-अमेरिका व्यापार ढांचे को खारिज करने, बिजली (संशोधन) विधेयक और बीज विधेयक 2025 को वापस लेने, वीबी ग्राम जी अधिनियम को निरस्त करने और मनरेगा को बहाल कर उसे 200 दिन के काम और 700 रुपये दैनिक मजदूरी के साथ मजबूत करने की मांग भी उठाई.

सभा में राज्यों के वित्तीय अधिकारों का मुद्दा भी उठाया गया. घोषणा में कहा गया कि जीएसटी व्यवस्था के कारण राज्यों की कराधान शक्तियां सीमित हो गई हैं. इसलिए जीएसटी अधिनियम 2017 में संशोधन कर राज्यों की कराधान शक्तियां बहाल की जाएं और विभाज्य कर पूल में राज्यों की हिस्सेदारी मौजूदा 33 प्रतिशत के बजाय 60 प्रतिशत की जाए.

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