
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) आज प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (India-US FTA) और अन्य मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के विरोध में देशभर में प्रदर्शन करेगा. संगठन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को एक खुला पत्र लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत-अमेरिका एफटीए पर हस्ताक्षर नहीं करने के निर्देश देने की मांग की है. मोर्चा ने आज को "एफटीए के खिलाफ किसान संकल्प दिवस" के रूप में मनाने का आह्वान किया है. SKM ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा कि भारत-अमेरिका के प्रस्तावित एफटीए और यूरोपीय संघ (EU), यूनाइटेड किंगडम (UK) और न्यूजीलैंड से जुड़े व्यापार समझौतों को लेकर किसानों में गहरी चिंता है.
संगठन ने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत-अमेरिका एफटीए पर हस्ताक्षर नहीं करने के निर्देश दिए जाएं, हस्ताक्षरित सभी एफटीए को निरस्त किया जाए और इन समझौतों के आर्थिक, कृषि तथा राष्ट्रीय हितों पर पड़ने वाले प्रभाव पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाए.
संयुक्त किसान मोर्चा के अनुसार, आज देशभर के गांवों में जनसभाएं आयोजित की जाएंगी और किसान एफटीए के विरोध में संकल्प लेंगे. विभिन्न राज्यों में एनडीए सांसदों के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किए जाएंगे. कई स्थानों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुतले भी फूंके जाएंगे. संगठन ने दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक टोल प्लाजा खोलने का भी कार्यक्रम घोषित किया है.
संयुक्त किसान मोर्चा ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की निंदा की. संगठन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को समाप्त करने और परीक्षा संबंधी कारणों से आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग का भी समर्थन किया.
मोर्चा ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि मुक्त व्यापार समझौतों पर बातचीत गोपनीय तरीके से और कॉरपोरेट दबाव में की जा रही है. संगठन का कहना है कि ऐसे समझौते देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता, संप्रभुता, किसानों और एमएसएमई क्षेत्र के हितों पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं. एसकेएम ने यह भी मांग की कि एफटीए वार्ता से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और संसद में उन पर चर्चा कराई जाए.
एसकेएम ने दावा किया कि प्रस्तावित व्यापार समझौतों के लागू होने पर अमेरिका और यूरोपीय देशों से भारी सब्सिडी वाले कृषि और औद्योगिक उत्पाद भारतीय बाजार में आएंगे, जिससे छोटे और मझोले किसानों के साथ-साथ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) भी प्रभावित होंगे. मोर्चा ने अपने पत्र में कहा कि अमेरिका में करीब 18.80 लाख किसान हैं, जबकि भारत में 14.65 करोड़ परिचालन कृषि जोतें हैं.
अमेरिका में करीब 2 प्रतिशत वर्कफोर्स खेती पर निर्भर है, जबकि भारत में 48 प्रतिशत वर्कफोर्स और 65 प्रतिशत आबादी कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों पर निर्भर है. संगठन ने पत्र में कहा कि अमेरिका में औसत कृषि जोत 469 एकड़ है, जबकि भारत में यह करीब 2.67 एकड़ है और 86 प्रतिशत किसान 5 एकड़ से कम भूमि रखते हैं. वहीं, अमेरिका में प्रति किसान औसत सब्सिडी लगभग 21.56 लाख रुपये है, जबकि भारत में यह करीब 34 हजार रुपये है.
मोर्चा ने कहा कि एफटीए लागू होने पर सब्सिडी वाले डेयरी उत्पाद, प्रोसेस्ड फूड, खाद्य तेल, वाइन, स्पिरिट और अन्य कृषि उत्पादों के आयात में बढ़ोतरी हो सकती है. इससे घरेलू बाजार में कृषि उत्पादों की कीमतों पर दबाव पड़ेगा और किसानों की आय प्रभावित होगी. संगठन का आरोप है कि भारतीय किसानों को ऐसे देशों के सब्सिडी वाले उत्पादों के साथ असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा.
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि एफटीए में प्रस्तावित बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) से जुड़े प्रावधान किसानों के पारंपरिक बीज बचाने, आपस में साझा करने और दोबारा इस्तेमाल करने के अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं. संगठन ने यह भी आशंका जताई कि दवा क्षेत्र में पेटेंट से जुड़े प्रावधानों का असर सस्ती जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता पर पड़ सकता है.