
पंजाब में सत्कारयोग्य गुरु ग्रंथ साहिब एक्ट में संशोधन और बिजली संकट को लेकर उठे सवालों पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि अकाल तख्त की ओर से जो भी सुझाव और शिकायतें सरकार को मिली हैं, उन सभी पर गंभीरता से विचार किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार सभी पक्षों से बातचीत करने के बाद ही कोई उचित निर्णय लेगी.
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य में बिजली संकट की बातों को गलत बताया. उन्होंने कहा कि पंजाब में बिजली की कोई गंभीर कमी नहीं है और जो भी बातें फैल रही हैं, वे सही जानकारी पर आधारित नहीं हैं. उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले एक-दो दिनों में मानसून सक्रिय होने के बाद स्थिति और बेहतर हो जाएगी.
धान की खेती के बीच किसानों को मिल रही बिजली आपूर्ति के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां कहीं भी खेतों के लिए बिजली कम मिल रही है, वहां नहरों के पानी से सिंचाई की व्यवस्था की जा रही है. सरकार का प्रयास है कि किसानों की फसल को किसी भी तरह का नुकसान न हो और उन्हें वैकल्पिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं.
किसानों द्वारा डीजल जनरेटर चलाने की मजबूरी पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है और पहले भी किसान जरूरत पड़ने पर इसका उपयोग करते रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और किसानों की परेशानियों को कम करने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जा रहा है.
वहीं दूसरी ओर पंजाब के संगरूर जिले में धान की रोपाई के सीजन के दौरान बिजली संकट को लेकर किसानों में नाराजगी देखने को मिली. पर्याप्त बिजली न मिलने से गुस्साए किसानों ने बिजली विभाग के एसई कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया. किसानों का कहना है कि सरकार 8 घंटे बिजली देने का दावा करती है, लेकिन उन्हें केवल 4 से 5 घंटे ही सप्लाई मिल रही है.
किसानों ने आरोप लगाया कि समय पर सिंचाई न होने से धान की फसल सूखने लगी है. बिजली की कमी के कारण उन्हें मजबूरी में डीजल जनरेटर का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है. किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नियमित और पर्याप्त बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने सरकार और बिजली विभाग से मांग की है कि कृषि फीडरों पर तय समय के अनुसार निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए. उनका कहना है कि इससे धान की फसल को बचाया जा सकेगा और किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ेगा. अब किसानों की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है.
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