कर्नाटक में सूखे का संकट! बीजेपी ने सरकार को घेरा, किसानों के लिए उठाई ये बड़ी मांग

कर्नाटक में सूखे का संकट! बीजेपी ने सरकार को घेरा, किसानों के लिए उठाई ये बड़ी मांग

कर्नाटक में सूखे की स्थिति को लेकर सियासत तेज हो गई है. बीजेपी ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कई बड़ी मांग की है. विपक्ष का कहना है कि सूखे से किसान गंभीर संकट में हैं और सरकार को तुरंत राहत के कदम उठाने चाहिए.

सूखे का खतरासूखे का खतरा
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Jul 30, 2026,
  • Updated Jul 30, 2026, 3:34 PM IST

कर्नाटक में कम बारिश और सूखे जैसे हालात को लेकर राजनीति तेज हो गई है. विधानसभा में विपक्ष और बीजेपी के नेता आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि राज्य के कई इलाकों में फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं, लेकिन सरकार अब तक सूखे की औपचारिक घोषणा नहीं कर रही है. इससे किसानों को फसल बीमा और सरकारी राहत का लाभ नहीं मिल पा रहा है. गुरुवार को आर. अशोक ने बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ सूखा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और सरकार से तुरंत राहत देने की मांग की.

फसलें बर्बाद, लेकिन सर्वे तक नहीं हुआ

BJP नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया कि राज्य के कई जिलों में किसानों की फसलें खराब हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन ने अभी तक सही तरीके से नुकसान का सर्वे नहीं कराया है. उन्होंने कहा कि न तो डिप्टी कमिश्नर, न तहसीलदार और न ही अन्य अधिकारी गांवों में जाकर किसानों की स्थिति का आकलन कर रहे हैं. उनके अनुसार, अगर समय रहते नुकसान का सर्वे नहीं हुआ, तो किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में और देरी होगी.

सूखा घोषित करने में देरी का आरोप

बीजेपी नेता ने कहा कि सरकार जानबूझकर सूखे की घोषणा करने में देरी कर रही है. उन्होंने कहा कि जब तक किसी क्षेत्र को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया जाता, तब तक किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिल सकता. उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत सूखा घोषित करना चाहिए, ताकि किसानों को मुआवजा और बीमा का पैसा मिल सके.  

कर्जमाफी और मुआवजे की मांग

आर. अशोक ने सरकार से कई बड़ी मांगें भी रखीं. उन्होंने कहा कि किसानों का एक लाख रुपये तक का कृषि लोन तुरंत माफ किया जाए. इसके अलावा, जिन किसानों की फसलें खराब हुई हैं, उन्हें प्रति एकड़ 50 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए. उन्होंने कहा कि किसानों के सामने इस समय आर्थिक संकट है और यदि सरकार तुरंत मदद नहीं करेगी तो हालात और गंभीर हो सकते हैं.

पीने के पानी और चारे का भी संकट

उन्होंने कहा कि सूखे की वजह से कई इलाकों में पीने के पानी और पशुओं के चारे की समस्या भी बढ़ती जा रही है. आर. अशोक ने सरकार से हर तालुका के लिए तुरंत राहत राशि जारी करने और आपातकालीन व्यवस्था करने की मांग की. उन्होंने यह भी कहा कि पशुओं के लिए पर्याप्त चारे वाली गौशालाएं बनाई जाएं और पहले से चल रही गौशालाओं को भी आर्थिक सहायता दी जाए. साथ ही उन्होंने बताया कि वह पहले ही चित्रदुर्ग और दावणगेरे जिलों का दौरा कर चुके हैं और अब विजयनगर जिले का भी दौरा करेंगे. उन्होंने दावा किया कि इन जिलों में किसानों की स्थिति बेहद खराब है. बुवाई के लगभग 50 दिन बाद भी अरहर और ज्वार जैसी फसलें सूख चुकी हैं. कई किसानों ने निराश होकर अपने खेतों में जाना तक बंद कर दिया है.

सरकार पर राज्य की अनदेखी का आरोप

आर. अशोक ने मुख्यमंत्री और सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय सरकार दूसरे राजनीतिक मामलों में व्यस्त है. उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक किसानों के लिए कोई बड़ा राहत पैकेज, सिंचाई परियोजना या विशेष सहायता योजना घोषित नहीं की गई है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर अगस्त के बाद केंद्र सरकार से मदद मांगी जाएगी, तब तक काफी देर हो जाएगी क्योंकि तब तक कई किसान और मजदूर रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन कर चुके होंगे.

सूखा घोषित करने की दोहराई मांग

आर. अशोक ने कहा कि सरकार को बिना देरी किए पूरे हालात का आकलन कर प्रभावित क्षेत्रों को सूखाग्रस्त घोषित करना चाहिए. उनका कहना है कि ऐसा होने पर केंद्र सरकार भी अपनी आकलन टीम भेज सकेगी और राहत प्रक्रिया शुरू हो सकेगी. हालांकि, कांग्रेस सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. ऐसे में आने वाले दिनों में कर्नाटक में सूखे और किसानों के मुद्दे पर राजनीतिक माहौल और गर्म होने की संभावना है. (PTI)

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