
मुंबई में आयोजित ‘न्याय सत्याग्रह’ के मंच से महाराष्ट्र कांग्रेस ने केंद्र और राज्य की महायुति सरकार पर तीखा हमला बोला और किसानों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाए. महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आरोप लगाया कि सत्ता में आने से पहले किसानों से किए गए वादे अब तक पूरे नहीं किए गए, जिसका सीधा असर उनकी आर्थिक हालत पर पड़ा है. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में किसानों को उनकी उपज का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है, जबकि खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है. बीज, खाद और अन्य जरूरी संसाधनों की कीमतों में वृद्धि ने किसानों पर अतिरिक्त दबाव डाला है, जिससे उनकी आय और खर्च के बीच संतुलन बिगड़ गया है.
सपकाल ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों, युवाओं और मजदूरों की अपेक्षाओं को नजरअंदाज किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में आम लोगों की आर्थिक स्थिति कमजोर हुई है और इसका असर ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक देखने को मिल रहा है.
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लेकर भी चिंता जताई और सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि विदेशी दबाव में लिए गए फैसलों का असर देश के कृषि क्षेत्र पर पड़ा है और इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसे समझौते स्थानीय किसानों के हितों को प्रभावित कर सकते हैं.
सुरक्षा और राष्ट्रीय मुद्दों का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए और विभिन्न घटनाओं का हवाला देते हुए जवाबदेही की मांग की. उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टता जरूरी है.
इस दौरान उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी का भी जिक्र किया और कहा कि वह संविधान, लोकतंत्र और देश की मूल भावना की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं. कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ताओं ने भी किसानों के समर्थन में आवाज उठाई और सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की.
इधर, कृषि इनपुट और उर्वरक क्षेत्र से जुड़े छह प्रमुख उद्योग संगठनों ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर राज्य में इंस्पेक्टर आधारित नियामक व्यवस्था को दोबारा लागू न करने की अपील की है.
संगठनों ने कहा कि कि अगर निरीक्षण-केंद्रित प्रणाली फिर से लाई जाती है तो इससे पहले किए गए सुधारों को झटका लगेगा और कारोबार करने में आसानी पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा.
उन्होंने यह भी कहा कि जून 2025 में लागू की गई इंस्पेक्टर-फ्री व्यवस्था ने विशेष रूप से एमएसएमई सेक्टर को मजबूती दी थी और कृषि इनपुट उद्योग में बेहतर कारोबारी माहौल तैयार किया था, जिसे बनाए रखना जरूरी है. (पीटीआई)