
केंद्र सरकार ने आज सोमवार को देश में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लागू कर दिया है. गृह मंत्रालय ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. केंद्र सरकार ने सिटीजनशिप एमेंडमेंट एक्ट यानी CAA को संसद से करीब 5 साल पहले ही पारित करा लिया था. इसे अब लागू कर दिया गया है. CAA के तहत मुस्लिम समुदाय को छोड़कर तीन मुस्लिम बहुल पड़ोसी मुल्कों से आने वाले बाकी धर्मों के लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है.
गृह मंत्रालय ने सीएए लागू करने के लिए नोटीफिकेशन जारी कर दिया है. सरकार ने सीएए से संबंधित एक वेब पोर्टल तैयार किया है. तीन मुस्लिम बहुल पड़ोसी मुल्कों से आने वाले वहां के अल्पसंख्यकों को इस पोर्टल पर अपना रजिस्टर करना होगा. सरकारी जांच पड़ताल के बाद उन्हें कानून के तहत नागरिकता दी जाएगी. इसके लिए बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए विस्थापित अल्पसंख्यकों को कोई दस्तावेज देने की जरूरत नहीं होगी. सीएए कानून के तहत मुस्लिम समुदाय को छोड़कर तीन मुस्लिम बहुल पड़ोसी मुल्कों से आने वाले बाकी धर्मों के लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है.
नागरिकता संशोधन कानून को सरकार ने संसद से 11 दिसंबर 2019 में पास कराया था. CAA लागू होने से पड़ोसी देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के उन अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने का रास्ता साफ हो जाएगा, जो काफी समय से भारत में शरण लेकर रह रहे हैं. इस कानून में किसी भी भारतीय की नागरिकता छीनने का कोई प्रावधान नहीं है. चाहे वह किसी भी मजहब का हो. केंद्र सरकार ने कहा है कि भारत के मुस्लिमों या किसी भी धर्म और समुदाय के लोगों को नागरिकता संशोधन कानून से कोई खतरा नहीं है.
नागरिक संशोधन कानून सीएए में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से भारत आए या आने के इच्छुक हिंदू, सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और पारसी समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिका देने का प्रावधना है. लेकिन, इन देशों से भारत में आकर रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों को नागरिकता देना शामिल नहीं किया गया है. विपक्षी दलों और आलोचकों ने इसे भेदभावपूर्ण बताया है. इस वजह से सीएए कानून पर विवाद है.
सरकार ने साफ किया है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) में किसी भी भारतीय की नागरिकता छीनने का कोई प्रावधान नहीं है. यानी किसी की नागरिकता पर कोई संकट नहीं है. गृह मंत्री का कहना है कि सीएए किसी की नागरिकता छीनने का कानून नहीं है. CAA के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पहले आए गैर मुस्लिम छह समुदायों को नागरिकता देने का प्रावधान किया है.