
उत्तर प्रदेश के 75 जनपदों में चल रहे किसान तक के विशेष अभियान के तहत 'किसान कारवां' का 52वां पड़ाव देवरिया जनपद के जासूई गांव में आयोजित हुआ. इस दौरान बड़ी संख्या में किसानों ने कार्यक्रम में भाग लेकर न सिर्फ सरकारी योजनाओं की जानकारी हासिल की, बल्कि आधुनिक खेती, पशुपालन और पोषण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों से सीधे संवाद भी किया.
पहले चरण में कृषि विज्ञान केंद्र देवरिया के डॉ. कमलेश मीणा ने कहा कि खेत को कुछ समय खाली छोड़कर मिट्टी की नमी समाप्त होने देना कीट नियंत्रण में मदद करता है. साथ ही मोटे अनाज 'श्रीअन्न' को अपनाने की सलाह देते हुए उन्होंने बताया कि इससे लागत घटती है, मिट्टी का स्वास्थ्य सुधरता है और बाजार में बेहतर दाम मिलता है.
दूसरे चरण में जिला कृषि अधिकारी उदय शंकर सिंह ने जानकारी दी कि किसानों को 50 फीसदी सब्सिडी पर उन्नत बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं. अब 6, 10, 15 और 30 किलो के छोटे पैकेट भी उपलब्ध होंगे, जिससे छोटे और सीमांत किसान भी आसानी से अपनी जरूरत के अनुसार बीज खरीद सकेंगे. इस पहल से बीज उपयोग में व्यापक बढ़ोतरी की उम्मीद है.
तीसरे चरण में जिला उद्यान अधिकारी राम सिंह ने बताया कि सरकार सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा दे रही है. स्प्रिंकलर और पाइपलाइन सिस्टम पर 90 फीसदी तक सब्सिडी दी जा रही है. इसके अलावा सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उन्नत बीज और तकनीकी सहयोग भी दिया जा रहा है.
चौथे चरण में इफको के प्रभारी अभिषेक कुमार शुक्ला ने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के फायदे बताए. उन्होंने कहा कि एक बोतल नैनो यूरिया पारंपरिक यूरिया की एक बोरी के बराबर असरदार है. बीज उपचार में नैनो डीएपी और फसल के दौरान नैनो यूरिया के उपयोग से उत्पादन बढ़ाने और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलती है.
पांचवें चरण में डॉ. सुशील कुमार ने पशुपालकों को चेताया कि नया भूसा सीधे पशुओं को न खिलाएं, इससे स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. उन्होंने ‘नंदनी योजना’ के तहत 2 से 25 देशी नस्ल के पशुओं के पालन पर मिलने वाले लाभों की जानकारी भी दी, जिससे किसानों की आय में अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है.
छठवें चरण में बजाज चीनी मिल के प्रबंधक आर.के. शर्मा ने कहा कि देवरिया में गन्ने का उत्पादन लगातार घट रहा है. किसानों को फिर से गन्ना खेती की ओर आकर्षित करने की जरूरत है. जिला गन्ना अधिकारी महेंद्र शर्मा ने बताया कि सरकार गन्ना किसानों के लिए कई प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है.
सातवें चरण में प्रगतिशील किसान सुशील कुमार शाही ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पिछले वर्षों में किसानों की आय और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे योजनाओं से जुड़कर आगे बढ़ें.
आठवें चरण में गृह विज्ञान विशेषज्ञ जयकुमार ने कहा कि आज ग्रामीण परिवारों में पोषण की कमी एक बड़ी समस्या बन रही है. उन्होंने हर घर में जैविक पोषण वाटिका विकसित करने की अपील की, जिससे हरी सब्जियों की उपलब्धता बढ़ेगी और परिवार स्वस्थ रहेगा.
नौवें चरण में डॉ. अंकुर शर्मा ने किसानों को देसी नस्ल की मुर्गी पालन के साथ-साथ जमुनापारी और बर्बरी नस्ल की बकरी पालन की सलाह दी. उन्होंने बताया कि ये कम लागत में ज्यादा लाभ देने वाले विकल्प हैं और बाजार में इनकी मांग भी अधिक है.
दसवें चरण में डॉ. मांधाता सिंह ने कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए किसानों को खेत की मेड़ चौड़ी करने और वर्षा जल को रोकने की सलाह दी. इससे भूजल स्तर सुधरेगा और फसल को लाभ मिलेगा. इसके अलावा ग्यारहवें चरण में डॉ. बी.पी. शाही ने किसानों को ढैंचा जैसी हरी खाद का उपयोग करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि इसे खेत में पलटने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और खरीफ फसल की पैदावार बेहतर होती है.
बारहवें चरण में कार्यक्रम के अंत में लकी ड्रा का आयोजन किया गया. इसमें 500 रुपये के 10 पुरस्कार वितरित किए गए. इसमें मीरा देवी ने 2000 रुपये और निर्मला देवी ने 3000 रुपये का पुरस्कार जीतकर कार्यक्रम में खुशी का माहौल बना दिया.