
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) एक बार फिर आंदोलन की तैयारी में है. दरअसल, SKM ने रविवार को एक प्रस्ताव पास किया, जिसमें सरकार को अमेरिका के साथ कृषि और डेयरी सेक्टर को खोलने के लिए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन करने के खिलाफ चेतावनी दी. यह प्रस्ताव किसानों के संगठन की राष्ट्रीय परिषद ने राजधानी दिल्ली में हुई एक बैठक के बाद पास किया. प्रस्ताव में किसानों और आम लोगों से अमेरिका के साम्राज्यवाद और कॉर्पोरेट ताकतों के दबाव में देश के हितों से समझौता करने के खिलाफ रैली करने का आह्वान किया गया.
इसमें कहा गया है कि किसान 2020-21 में रद्द किए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ ऐतिहासिक संघर्ष से भी बड़े पैमाने पर और उग्र संघर्ष करेंगे. SKM ने एक बयान में कहा कि बैठक में किसानों और मजदूरों से अपील किया गया है कि अगर NDA सरकार संसद के आगामी बजट सत्र में बिजली बिल पास करती है, तो पूरे भारत में तुरंत उग्र विरोध प्रदर्शन करें. साथ ही बैठक के दौरान 16 जनवरी को अखिल भारतीय प्रतिरोध दिवस विरोध प्रदर्शन में किसानों की बड़े पैमाने पर भागीदारी तय करने का फैसला लिया गया.
SKM के नए साल के संकल्प "जीत तक लगातार, एकजुट अखिल भारतीय संघर्ष बनाने" का हवाला देते हुए, बयान में कहा कि प्रतिरोध दिवस पर कई मांगों को लेकर जिला-स्तरीय प्रदर्शन और ब्लॉक या गांव-स्तरीय जनसभाएं होंगी. इनमें बिजली बिल और बीज बिल को खत्म करना और विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) और चार श्रम संहिताओं को रद्द करना शामिल है. इसके चार्ट में लंबी अवधि की मांगें शामिल भी हैं.
SKM ने बैठक में आने वाले गणतंत्र दिवस को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विरोध के अधिकार जैसे संवैधानिक अधिकारों का समर्थन करके और UAPA सहित "सत्तावादी कानूनों" को रद्द करने की मांग की. इसमें कहा गया कि आधिकारिक गणतंत्र दिवस परेड को प्रभावित किए बिना दोपहर में 'जन मार्च' निकाला जाएगा.
बैठक में 12 फरवरी को आम हड़ताल के आह्वान का समर्थन किया गया, जिसमें चार श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग की गई, और किसानों से उस दिन सड़कों पर उतरकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन आयोजित करने का आह्वान किया है. बैठक में SKM के सभी सदस्य संगठनों और राज्य समन्वय समितियों से ब्लॉक और गांव स्तर पर व्यापक संघर्ष और अभियान चलाने, मेहनतकश लोगों पर कॉर्पोरेट हमलों की श्रृंखला को समझाने और दृढ़ संकल्प के साथ बड़े पैमाने पर अखिल भारतीय संघर्षों के लिए लंबी तैयारी करने का आग्रह किया गया.
अगली राष्ट्रीय परिषद की बैठक 24 फरवरी को हरियाणा में होगी और यदि NDA सरकार मजदूरों, किसानों और कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के नेतृत्व के साथ उनकी वास्तविक मांगों पर चर्चा के लिए तैयार नहीं होती है, तो एक ठोस कार्य योजना बनाने का संकल्प लिया जाएगा. बैठक में अखिल भारतीय किसान सभा के नेता हन्नान मुल्ला ने प्रतिभागियों का स्वागत किया. अध्यक्ष मंडल में जोगिंदर सिंह उगराहां, राजन क्षीरसागर, पी कृष्णप्रसाद, प्रेम सिंह गहलावत, आशीष मिताहल, जोगिंदर सिंह नैने, सिराजुद्धीन खेड़ी, दलजीत सिंह और अशोक बैठा शामिल थे. (PTI)