मक्के के छिलकों पर की प्रैक्टिस, अब कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के पहले सिल्वर मेडल विजेता बने हाई जंपर सर्वेश

मक्के के छिलकों पर की प्रैक्टिस, अब कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के पहले सिल्वर मेडल विजेता बने हाई जंपर सर्वेश

महाराष्ट्र के एक किसान परिवार से निकलकर मक्के के छिलकों और कपास से बनी देसी मैट पर अभ्यास करने वाले सर्वेश कुशारे ने कॉमनवेल्थ गेम्स में हाई जंप का सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. भारत के पहले हाई जंपर बने जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर पदक जीता. जानिए उनके संघर्ष, रिकॉर्ड और सफलता की प्रेरणादायक कहानी.

Sarvesh KushareSarvesh Kushare
क‍िसान तक
  • नासिक,
  • Jul 28, 2026,
  • Updated Jul 28, 2026, 4:30 PM IST

आज का दिन भारतीय एथलिट के इतिहास में ऐतिहासिक रहा, जहां भारतीय एथलिटों ने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड और सिल्वर जीतकर नया इतिहास लिख दिया. भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हाई जंप में सर्वेश कुशारे ने सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रचा. सर्वेश ने हाई जंप प्रतियोगिता में 2.25 मीटर की छलांग लगाई. सर्वेश कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीतने वाले पहले हाई जंपर बने हैं. गोल्ड और सिल्वर जीतने वाले दोनों ने 2.25 मीटर की छलांग लगाई, क्योंकि गोल्ड मेडल जीतने वाले ब्रैडफोर्ड ने पहले अटेम्प्ट में तो सर्वेश ने तीसरे अटेम्प्ट में 2.25 मीटर की छलांग लगाई, इसलिए सर्वेश को सिल्वर मेडल मिला.

सर्वेश कुशारे महाराष्ट्र के नासिक जिले के देवरगांव के रहने वाले हैं. किसान परिवार में सर्वेश का जन्म 17 जून 1995 को हुआ था. फिलहाल वह भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर तैनात हैं. सर्वेश एक साधारण परिवार से आते हैं, लेकिन इसके बावजूद स्कूल से ही उन्होंने एथलेटिक्स को चुना. सर्वेश के पिता किसान हैं और वह ज्यादातर प्याज की खेती करते हैं. सर्वेश की स्किल देखकर स्कूल के खेल शिक्षक ने उन्हें बेसिक ट्रेनिंग दी थी.

बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझते रहे सर्वेश

हाई जंप के लिए सर्वेश को शुरुआती दिनों में बुनियादी सुविधाओं के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था. ऐसे में उन्होंने गांव में देसी जुगाड़ अपनाया. क्योंकि हाई जंप में चोट लगने की संभावना होती है इसलिए यह प्रैक्टिस मैट पर की जाती है, लेकिन सर्वेश के पास मैट की सुविधा नहीं थी. इसलिए सर्वेश के पिता ने उन्हें चोट से बचाने के लिए खेतों से निकले मक्के के छिलकों और कपास से देसी मैट बना दिया, जिस पर वह अपनी प्रैक्टिस पूरी करते थे.

सर्वेश कुशारे के माता-पिता

नासिक के निफाड़ तालुका के देवरगांव में सर्वेश के लिए हाई जंप में अपनी पहचान स्थापित करना मुश्किल लग रहा था. पहले जिला स्तर , फिर डिवीजन स्तर पर जीत हासिल कर उन्होंने राज्य स्तर पर अपना डंका बजाया. ऐसे में साल 2016 में उन्हें स्पोर्ट्स कोटे से सेना में नौकरी मिल गई. सेना में नौकरी मिलने के बाद सर्वेश की किस्मत पलट गई. यहां उन्हें प्रोफेशनल ट्रेनिंग और बेहतर संसाधन मिले, जिससे सर्वेश ने अपनी योग्यता सिद्ध करते हुए अपने खेल को निखारा और देश के लिए मेडल जीता.

सर्वेश ने 2.31 मीटर की छलांग लगाकर भारत का नेशनल रिकॉर्ड अपने नाम किया है. सर्वेश 2.30 मीटर का बैरियर पार करने वाले पहले भारतीय एथलीट भी हैं. वहीं, अब उन्होंने ग्लास्गो में सिल्वर मेडल जीतकर अपनी उपलब्धियों में एक नया पन्ना जोड़ लिया है.

सर्वेश के नाम हैं कई पदक और जीत

इसके अलावा सर्वेश ने मोनाको डायमंड लीग 2026 में 2.26 मीटर कूदकर तीसरा स्थान हासिल किया था. वह डायमंड लीग के टॉप-3 में जगह बनाने वाले पहले भारतीय हाई जंपर भी हैं. एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2023 में सर्वेश ने 2.26 मीटर की छलांग के साथ सिल्वर मेडल अपने नाम किया था. उससे पहले उन्होंने साउथ एशियन गेम्स 2019 में 2.21 मीटर कूदकर गोल्ड मेडल जीता. वहीं, 2024 म पेरिस ओलंपिक में भी सर्वेश ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था.

कुछ देर से सफलता पाने वाले कुशारे ने पहली बार 2014 की जूनियर चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था, तब वह लगभग 20 साल के थे. 2022 गुजरात नेशनल गेम्स में गोल्ड जीतते हुए उन्होंने बार की ऊंचाई एक सेंटीमीटर बढ़ाकर 2.27 मीटर कर दी. इसके बाद दो साल तक वह कोई सुधार नहीं कर पाए, लेकिन फिर टोक्यो में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में 2.18 मीटर की छलांग लगाकर छठे स्थान पर रहे. इस दौरान, वह वर्ल्ड चैंपियनशिप के पुरुषों के हाई जंप फाइनल के लिए क्वालीफाई करने वाले पहले भारतीय भी बने.(प्रवीण ठाकरे का इनपुट)

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