
भारत के 77वें गणतंत्र दिवस का जश्न बड़े ही उत्साह और गर्व के साथ मनाया जा रहा है. गणतंत्र दिवस की परेड में न केवल भारत की सैन्य ताकत को दिखाया गया, बल्कि अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सांस्कृतिक झांकियों के जरिए देश की विविधता और समृद्ध विरासत को भी दिखाया गया. इस बीच कर्तव्य पथ पर गुज़रती हुई मणिपुर की झांकी में राज्य की पारंपरिक खेती से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक की यात्रा को दिखाया गया, जहां अब यह अपने स्थानीय, उच्च-क्वालिटी वाले कृषि उत्पादों को बेचता है.
झांकी में ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग वाले उत्पादों की भूमिका पर ज़ोर दिया गया, जिन्होंने राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों को खोलने के साथ-साथ हजारों किसानों की आजीविका में सुधार किया है. झांकी में सबसे आगे, उखरुल पहाड़ियों की चमकदार सिरारखोंग हथेई मिर्च केंद्र में थी. पारंपरिक पोशाक पहने एक महिला को इस तीखी फसल की कटाई करते हुए दिखाया गया, जो जमीनी स्तर पर सशक्तिकरण और कृषि में महिलाओं की भागीदारी का प्रतीक है.
प्रमुखता से प्रदर्शित GI टैग प्रतीक प्रामाणिकता, सुरक्षा और वैश्विक पहचान को दर्शाता है. केंद्रीय भाग में मणिपुर के सुगंधित और पौष्टिक काले चावल, चक-हाओ की पारंपरिक कटाई और ओसाई को दर्शाया गया. APEDA की पहलों के माध्यम से जापान, कोरिया, चीन और यूरोपीय संघ जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग वाला चक-हाओ, किसान आत्मनिर्भरता और मूल्य वर्धित निर्यात की दिशा में एक निर्णायक कदम को दर्शाता है.
वहीं, पीछे की ओर झांकी में पश्चिमी पहाड़ियों के पारंपरिक तारेन्ग-काई घर के सामने प्रसिद्ध तामेंगलोंग संतरे को दिखाया गया. "ऑर्गेनिक इंडिया" लोगो ने राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) के तहत 400 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में जैविक प्रमाणन को दर्शाया, जो मणिपुर के पूरी तरह से जैविक राज्य बनने की आकांक्षा को मजबूत करता है. साइड पैनल पर राज्य पक्षी, नोंग-इन (बार-टेल्ड या मिसेज ह्यूम का तीतर) की सुंदर नक्काशी दिखाई गई, जो प्रकृति, परंपरा और आर्थिक प्रगति के बीच सामंजस्य की झांकी की कहानी को पूरा करती है. (PTI)