
देशभर के किसान संगठन एक बार फिर बड़े आंदोलन की तैयारी में हैं. MSP, भारत-अमेरिका ट्रेड डील और किसानों से जुड़े कई मुद्दों को लेकर ‘देश बचाओ मोर्चा’ ने 21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर महापंचायत और प्रदर्शन का ऐलान किया है. यह महापंचायत सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगी, जिसमें देश के कई राज्यों से किसान, मजदूर, व्यापारी, युवा, महिलाएं और अलग-अलग सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे. आयोजकों का दावा है कि यह महापंचायत किसानों के हितों और देश की आर्थिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर एक बड़ा मंच साबित होगी.
भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील केवल किसानों का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की आर्थिक संप्रभुता, खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से जुड़ा विषय है. उनका कहना है कि अगर ये डील हो जाती है, तो इसका सबसे अधिक असर किसानों, पशुपालकों, छोटे व्यापारियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.
गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि किसानों को आशंका है कि इस तरह के समझौते से विदेशी कृषि उत्पादों की देश में एंट्री बढ़ सकती है, जिससे भारतीय किसानों को अपनी उपज का उचित दाम मिलने में परेशानी होगी. इसके अलावा छोटे कारोबारियों और ग्रामीण उद्योगों पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. इसी वजह से किसान संगठनों ने इस मुद्दे पर देशभर के लोगों से एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की है.
उन्होंने कहा कि 21 जुलाई की किसान महापंचायत केवल विरोध प्रदर्शन नहीं होगी, बल्कि किसानों और देश के भविष्य को लेकर एक बड़ा जनसंकल्प भी होगा. इस दौरान अलग-अलग किसान संगठनों के प्रतिनिधि आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे और जरूरत पड़ने पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी.
देश बचाओ मोर्चा ने सभी प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया से इस महापंचायत की व्यापक कवरेज करने की अपील की है. संगठन का कहना है कि मीडिया किसानों की आवाज देशभर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. आयोजकों को उम्मीद है कि बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी के साथ यह महापंचायत किसानों की मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने का मंच बनेगी.