किसानों तक आसान भाषा में पहुंचे कृषि ज्ञान, वैज्ञानिकों से हिंदी में शोध की अपील

किसानों तक आसान भाषा में पहुंचे कृषि ज्ञान, वैज्ञानिकों से हिंदी में शोध की अपील

ICAR-RCER पटना में हिंदी पखवाड़ा समारोह का समापन हुआ. इस मौके पर कृषि वैज्ञानिकों और कर्मचारियों से अपील की गई कि वे शोध, तकनीकी जानकारी और किसानों से जुड़े काम को अधिक से अधिक हिंदी में तैयार करें, ताकि कृषि विज्ञान की जानकारी किसानों तक आसान भाषा में पहुंच सके.

ICAR-RCER में हिंदी पखवाड़े का समापनICAR-RCER में हिंदी पखवाड़े का समापन
अंक‍ित कुमार स‍िंह
  • Patna,
  • Oct 01, 2026,
  • Updated Oct 01, 2026, 9:52 AM IST

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में हिंदी पखवाड़ा-2026 समारोह का समापन हुआ. इस दौरान कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों से बोलचाल के साथ-साथ अपने कार्यालयी और वैज्ञानिक कार्यों में भी हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग की अपील की गई. राजभाषा हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान संस्थान के वैज्ञानिकों और कर्मचारियों ने अलग-अलग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया.

समापन समारोह में ‘कृषि के क्षेत्र में डिजिटल मीडिया की भूमिका’ विषय पर व्याख्यान देने के लिए किसान तक के संवाददाता अंकित सिंह को सम्मानित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से हिंदी के प्रति लोगों की रुचि बढ़ती है. साथ ही, संस्थान के कार्यालयी और वैज्ञानिक कामकाज में हिंदी के इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिलता है.

हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग जरूरी

हिंदी सलाहकार समिति, भारत सरकार के सदस्य कैप्टन वीरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि हिंदी देश के अलग-अलग लोगों तक जानकारी और ज्ञान पहुंचाने का आसान और प्रभावी माध्यम है. उन्होंने कहा कि कृषि और वैज्ञानिक शोध में हिंदी का ज्यादा इस्तेमाल होने से नई तकनीक, शोध और खेती से जुड़ी जानकारी किसानों और आम लोगों तक आसानी से पहुंचाई जा सकती है. उन्होंने वैज्ञानिक और तकनीकी विषयों को सरल और समझने वाली हिंदी में पेश करने पर जोर दिया. साथ ही, सरकारी कामकाज में हिंदी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से हिंदी में हस्ताक्षर करने की अपील की.

प्रशासनिक काम हिंदी में करें वैज्ञानिक

ICAR-RCER पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास ने कहा कि संस्थान का पटना मुख्यालय और रांची केंद्र भारत सरकार के राजपत्र में अधिसूचित हैं. ऐसे में हिंदी में काम करने वाले सभी अधिकारी और कर्मचारी अपने प्रशासनिक काम ज्यादा से ज्यादा हिंदी में करें. वहीं, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने कहा कि संस्थान के वैज्ञानिक किसानों से जुड़ी ज्यादा से ज्यादा जानकारी, लेख, पुस्तिकाएं और दूसरी उपयोगी सामग्री हिंदी में तैयार करें. उन्होंने कहा कि किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाते समय आसान और सरल भाषा का इस्तेमाल होना चाहिए, ताकि कृषि शोध और नई तकनीक की जानकारी किसानों को आसानी से समझ आए और उसका फायदा उन्हें मिल सके.

विजेताओं को किया गया सम्मानित

हिंदी पखवाड़ा-2026 के दौरान आयोजित अलग-अलग प्रतियोगिताओं के विजेताओं को नगद पुरस्कार और प्रशस्ति-पत्र से सम्मानित किया गया. इसके साथ ही हिंदी कार्यशालाओं में व्याख्यान देने वाले अधिकारियों को भी प्रशस्ति-पत्र और प्रमाण-पत्र दिए गए. समारोह के दौरान प्रतिभागियों और विजेताओं का उत्साहवर्धन करते हुए कार्यालयी कार्यों में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया. कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्थान की राजभाषा कार्यान्वयन समिति के सदस्यों सहित उमेश कुमार मिश्र, वरिष्ठ तकनीकी सहायक (हिंदी अनुवादक) का सराहनीय योगदान रहा.

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