Light Pollution : फैंसी लाइटों से हो रहा प्रकाश प्रदूषण, पेड़ और पक्षि‍यों की बिगड़ रही Life Cycle

Light Pollution : फैंसी लाइटों से हो रहा प्रकाश प्रदूषण, पेड़ और पक्षि‍यों की बिगड़ रही Life Cycle

क्या आपने कभी सोचा है कि रंग बिरंगी Fancy lights की रोशनी पेड़ पौधों को परेशान कर रही है. इन लाइट से रातों का अंधेरा मिटने के कारण रात्रिचर जीव जंतुओं का जीवन, बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. जी हां, यह सब कुछ हो रहा है. इसलिए इसे Light Pollution का नाम दिया गया है. इस प्रकाश प्रदूषण का असर अब Human Health पर भी पड़ने लगा है.

न‍िर्मल यादव
  • New Delhi,
  • Sep 18, 2024,
  • Updated Sep 18, 2024, 4:26 PM IST

शहरों से लेकर गांवों तक, हर जगह तेज रोशनी करने वाली फैंसी लाइट रात के अंधेरे को भले ही दूर कर देती हों, लेकिन इसका बुरा असर समूचे जीव जगत पर पड़ रहा है. पूरी दुनिया पानी, हवा और ध्वनि जनित प्रदूषण के संकट से उबरने में लगी है. मगर, अब प्रकाश प्रदूषण का संकट भी गहरा गया है. वैश्विक स्तर पर चल रही तथाकथित विकास की अंधी दौड़ के कारण धरती पर रात का अंधेरा लगातार कम हो रहा है. इससे उपजे Light Pollution की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इससे पेड़ पौधों में भोजन बनाने के लिए होने वाली प्रकाश संश्लेषण यानी Photosynthesis की अनिवार्य प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. इतना ही नहीं, रात के अंधेरे में सक्रिय होने वाले nocturnal animals के जीवन चक्र पर भी बुरा असर पड़ रहा है. अब, प्रकाश प्रदूषण से खतरे की जद में इंसान की सेहत भी आ गई है. पिछले कुछ सालों में इस समस्या पर Western Countries में पुरजोर बहस तेज थी. अब भारत में भी यह समस्या अदालत के संज्ञान में लाई गई है. इसके फलस्वरूप मुंबई के में अदालत के आदेश पर Fancy Lights हटाई जाने लगी है.

मुंबई में उतरने लगीं पेड़ों की फैंसी लाइट

पर्यावरण पर शोध से जुड़ी संस्था Centre for Science and Environment (CSE) की ओर से प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया में 83 फीसदी आबादी किसी न किसी रूप में प्रकाश प्रदूषण से प्रभावित हो गई है. इस समस्या से भारत भी अछूता नहीं है.

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Bombay High Court ने 10 अप्रैल को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार, बृहन्मुंबई नगर पालिका (BMC), ठाणे नगर पालिका और मीरा भयंदर नगर पालिका को नोटिस जारी कर पेड़ो पर लगाई गई कृत्रिम सजावटी लाइटों के औचित्य पर जवाब तलब किया था. इसके बाद ही इन नगर पालिका क्षेत्रों में पेड़ों से सजावटी लाइटों को हटाने का सिलसिला शुरू हुआ. इसके साथ ही देश में प्रकाश प्रदूषण पर भी बहस तेज हो गई.

मुंबई के Social Worker रोहित मनोहर जोशी ने अदालत में यह मामला PIL के माध्यम से पेश किया ह‍ै. इसमें पेड़ों पर लगाई गईं कृत्रिम सजावटी लाइटों को प्रकाश प्रदूषण से जोड़ते हुए कहा है कि‍ इससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बाध‍ित हो रही है. साथ ही पेड़ों और रात्रिचर जीवों की सेहत को भारी नुकसान हो रहा है.

छत्तीसगढ़ के शोध को बनाया आधार

याचिकाकर्ता ने प्रकाश प्रदूषण के प्रभाव को साबित करने के लिए अदालत के समक्ष छत्तीसगढ़ में बिलासपुर के गुरू घासीदास विश्वविद्यालय में वैज्ञानिकों की शोध रिपोर्ट का हवाला दिया है. ''Street Light Pollution से पेड़ पौधों की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया पर पड़ रहे प्रभाव'' शीर्षक वाली शोध रिपोर्ट के मुताबिक रात में कृत्रिम रोशनी की अधिकता के कारण Light Pollution हो रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक प्रकाश प्रदूषण से पेड़ पौधों की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया बाधित होती है. जब पौधे लगातार कृत्रिम प्रकाश के संपर्क में रहते हैं, तब उनकी प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से भोजन बनाने की क्षमता बुरी तरह से प्रभावित होती है.

इतना ही नहीं, Biological Rhythm Research शीर्षक वाली 2018 में प्रकाशित एक अन्य रिसर्च रिपोर्ट में भी प्रकाश प्रदूषण के जैव जगत पर पड़ने वाले असर की पुष्टि हुई है. शोधकर्ता नीलिमा मेरावी और संतोष कुमार प्रजापति ने रिपोर्ट में बताया कि प्रकाश संश्लेषण की इस प्रक्रिया को ठीक से करने के लिए रात में नैसर्गिक रूप से अंधेरा होना जरूरी है. इसलिए अंधेरे को पेड़ पौधों सहित अन्य जीव जंतुओं की रात में होने वाली स्वाभाविक गतिविधियों के स्रोत के रूप में देखा जाना चाहिए.

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पक्षी भी हैं प्रकाश प्रदूषण से प्रभावित

याचिका में अदालत को बताया गया कि कृत्रि‍म रोशनी जनित प्रकाश प्रदूषण से पक्षी भी प्रभावित हो रहे हैं. रात में गैर जरूरी रोशनी से पक्षियों के Circadian Rhythm पर बुरा असर पड़ता है. सर्केडियन रिदम में 24 घंटे के दौरान जीवों द्वारा शारीरिक, मानसिक और व्यवहार में होने वाले बदलाव को महसूस किया जाता है.

गौरतलब है कि इंसानों और पेड़ पौधों सहित सभी जीव जंतुओं का अपना सर्कैडियन रिदम होता है. इसे शरीर की स्वचालित Biological Clock चलाती है. प्रकाश और अंधेरा, इस रिदम पर असर डालने वाले महत्वपूर्ण कारक हैं.

शोध में पता चला है कि इस रिदम के प्रति पक्षी ज्यादा संवेदनशील होते हैं, इसलिए प्रकाश प्रदूषण पक्षियों की जीवन चर्या को बुरी तरह प्रभावित करता है. इससे उनकी घोंसला बनाने और प्रजनन करने सहित अन्य गतिविधियां प्रभावित होती हैं.

कचराली झील से हटी लाइटें

याचिका में मुंबई के ठाणे इलाके में स्थित कचराली झील का जिक्र करते हुए बताया गया कि यहां Black Crowned Night Heron पक्षी रात के समय मछलियों को खाते हैं. झील के चारों ओर लगाई गई Flood light की तेज रोशनी ने इन पक्षियों को भ्रमित कर उनके शिकार की प्रक्रिया को बाधित कर दिया है.

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याचि‍का में कहा गया है कि इसी प्रकार शहर में गणेश उत्सव के दौरान लगे पंडालों की तेज रोशनी और इनसे उत्पन्न होने वाले शोरगुल ने चमगादड़ों को अस्थायी तौर पर इस इलाके से विस्थापित होने पर मजबूर कर दिया है. हाईकोर्ट के Chief Justice देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस आरिफ एस डॉक्टर की खंडपीठ ने याचिका में वर्णित तथ्यों के आधार पर इसे जनहित से जुड़ा मुद्दा माना है.

याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए अदालत ने सभी संबद्ध पक्षकारों से इस मामले में हलफनामा पेश कर जवाब मांगा है. अदालत का नोटिस जारी होने के कुछ दिन बाद ही बीएमसी ने मुंबई में कचराली झील सहित अन्य इलाकों में मौजूद पेड़ों पर लपेटी गईं कृत्रिम सजावटी लाइटों को हटाना शुरू कर दिया.

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