
अभिनेता पंकज त्रिपाठी के अभिनय वाली फिल्म "कागज" की कहानी से अमूमन हर कोई परिचित है. इस फिल्म में सरकारी कागजों में उन्हें मृत घोषित कर दिया जाता है, जिसके बाद वह कागजों में खुद को जिंदा करने के लिए सरकारी कार्यालयों में दौड़ लगाते हैं. उन जैसा ही एक किरदार इन दिनों रील से उतर कर रियल जिदंगी में सरकारी कार्यालयों में दाैड़ता हुआ नजर आ रहा है. ये बड़ा इत्तेफाक है कि वह रियल किरदार भी फिल्म अभिनेता पंकज त्रिपाठी के गृह राज्य बिहार का है. जिसे जिंदा रहते हुए बिहार कृषि विभाग के सरकारी कर्मचारियों ने अपनी लापरवाही से मृत घोषित कर दिया गया.
ये मामला तब खुला, जब किसान को पीएम किसान की कई किस्त नहीं मिली. इसकी किसान ने अपने स्तर से पड़ताल की तो पता चला कि कृषि विभाग के अधिकारियों ने कागजों पर उसे मृत घोषित कर दिया है. अब आलम ये है कि वह किसान सम्मान निधि जैसे कई सरकारी नौकरी से वंचित हो गया है.
इस पूरे मामले की जानकारी के लिए आपको राज्य की राजधानी पटना से करीब 300 किलोमीटर दूर कैमूर जिला के चांद प्रखंड के कुड्डी पंचायत के पौरा गांव की ओर दिमाग केंद्रित करना होगा."किसान तक" की टीम से पौरा गांव के रहने वाले संतोष कुमार सिंह की मुलाकात एक खबर के दौरान होती है.जहां बातचीत के दौरान वह बताते हैं कि वह सरकारी भूत है. यानी वह पिछले एक साल से सरकारी कागजों में मरे हुए हैं. वह आगे बताते हैं कि पिछले एक सालों से उनका प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पैसा खाते में नहीं आ रहा है.साथ ही किसान रजिस्ट्रेशन नंबर बंद होने से डीजल अनुदान एवं पैक्स के द्वारा धान की खरीदारी भी नहीं की जा रही है.
किसान तक से बातचीत करते हुए संतोष कुमार सिंह कहते हैं कि पौरा गांव में संतोष कुमार सिंह नाम के दो व्यक्ति है,जिनमें स्वर्गीय संतोष कुमार सिंह पिता स्व मंगल सिंह की मृत्यु 28 अप्रैल 2021 को हो गई थी. वह आगे बताते हैंं कि मेरे पिता का नाम स्व सरयू सिंह है. लेकिन स्व संतोष कुमार सिंह का नाम काटने की जगह कुड्डी पंचायत के कृषि समन्वयक के द्वारा मेरा नाम काट दिया गया. कुल मिलाकर वह एक गांव में दो संतोष होने का खामियाजा उठा रहे हैं.
आगे वह बताते हैं कि इसकी जानकारी मुझे तब हुई जब पीएम किसान की मेरी सातवां क़िस्त 9 अगस्त 2021 में आने के बाद 8वां क़िस्त नहीं आई.जिसके बाद चांद प्रखंड के कृषि विभाग में जाने के बाद पता चला कि कृषि समन्वयक एवं कुड्डी पंचायत के किसान सलाहकार के द्वारा कार्य में लापरवाही के कारण एवं बिना कागजात की जांच पड़ताल के मृत संतोष कुमार सिंह पिता स्व मंगल सिंह का नाम काटने की जगह संतोष कुमार सिंह स्व सरयू कुमार सिंह का नाम काट दिया गया.
संतोष कुमार सिंह आगे कहते हैं कि उनके खाते में जब प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 8 वां क़िस्त नहीं आई.तब वह चांद प्रखंड के कृषि विभाग के ऑफिस गए. जहां उन्हें पता चला कि उनका किस्त इसलिए नहीं आई है क्योंकि उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है.और उनका आईडी बंद कर दी गई हैऔर उसी के कारण सम्मान निधि का पैसा खाते में नहीं आ रहा है.इसके साथ ही उन्हें केंद्र व राज्य सरकार के कई अन्य योजनाओं का भी लाभ नहीं मिल रहा है.आगे सिंह कहते हैं कि जब वह किसान सम्मान निधि का पैसा नहीं आने की जानकारी प्रखंड के कृषि अधिकारियों को दी.तब उन्हें वास्तविकता की जानकारी हुई.वहीं करीब एक सालों से अपने को सरकारी कागजों में जिंदा करने में लगे हुए हैं.
किसान तक कि टीम ने इस मामले में मृत संतोष कुमार सिंह के बेटे से मुलाकात की.जिनका नाम कुलदीप सिंह हैं. वह बताते हैं कि उनके पिता संतोष कुमार सिंह की मृत्यु 28 अप्रैल 2021 को हो गया था.जिंदा रहने के दौरान उनके खाते में किसान सम्मान निधि का पैसा आता था.लेकिन उनकी मृत्यु के बाद हमें इसकी जानकारी नहीं है,क्योंकि हम लोगों ने खाता बंद करवा दिया है. वहीं कुड्डी पंचायत के वार्ड पांच के सदस्य सुजीत कुमार सिंह कहते हैं कि मृत संतोष कुमार सिंह एवं दूसरे संतोष कुमार सिंह दोनों हमारे ही वार्ड में आते हैं. वहीं मेरे वार्ड में जब भी कोई सूचना देना या अधिकारियों को लेना होता है तो मुझसे ही जानकारी ली जाती है. लेकिन संतोष कुमार सिंह के मामले में कोई जानकारी हमसे नहीं मांगी गई.