
नाशिक में नैताले के प्याज उत्पादक किसान संजय साठे ने अपने घर से पांच किलो प्याज लेकर अमरनाथ यात्रा की शुरुआत की. छह दिनों की ट्रेन, घोड़े और पैदल यात्रा के बाद, देश भर के प्याज किसानों की ओर से बाबा अमरनाथ (बाबा बर्फानी) को प्रसाद के रूप में पांच किलो प्याज चढ़ाया और प्रार्थना की. किसान ने बाबा से मांग की कि "प्याज की फसल को उचित मूल्य मिले, केंद्र और राज्य सरकारों को प्याज के आयात और निर्यात की सही नीति तय करने की सद्बुद्धि मिले." उन्होंने बाबा बर्फानी के दरबार में मौजूद और दिन-रात सुरक्षा कर रहे सैनिकों को प्याज का प्रसाद दिया.
किसान रवींद्र साठे ने पहलगाम से बाबा अमरनाथ गुफा तक बारिश और बर्फबारी में कठिन यात्रा कर पांच किलो प्याज साथ लिया था. सुरक्षा गार्डों ने साठे को गुफा में प्याज ले जाने से रोका था. लेकिन, साठे ने कहा कि अन्य लोग अपनी आस्था के अनुसार प्रसाद रखते हैं. इस हिसाब से मेरा मानना है कि मैं अपने खेत में उगे प्याज को प्रसाद के रूप में लेकर आया हूं. जांच के बाद उन्होंने अनुमति दे दी.
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अमरनाथ यात्रा पूरी दुनिया में मशहूर है. यह यात्रा जम्मू और कश्मीर राज्य में एक जुलाई 2023 से शुरू हो गई है. भगवान शंकर की पवित्र गुफा के रूप में इसकी बड़ी प्रतिष्ठा है. कई राज्यों से श्रद्धालु धीरे-धीरे बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए यात्रा कर रहे हैं. नैताले के प्याज उत्पादक किसान संजय साठे अमरनाथ यात्रा के लिए अपने साथ पांच किलो प्याज ले गए और पुजारियों ने बाबा बर्फानी की पवित्र गुफा के सामने दान पेटी को छुआ और उन्हें वापस दे दिया.
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साठे ने कहा कि पिछले साल से प्याज की कोई कीमत नहीं है, इसलिए उत्पादन की लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है. किसान कर्जदार हो रहे हैं. केंद्र और राज्य सरकार को ध्यान देना चाहिए और किसानों को सद्बुद्धि देनी चाहिए ताकि उन्हें अच्छा पैसा मिल सके. श्रद्धालु अपने हिसाबनुसार, पेढ़े रखते हैं, मालाएं चढाते हैं. साठे कहते हैं, मैं भी सभी भारतीय किसानों की ओर से अपने खेत में दिन-रात मेहनत कर उगाए गए प्याज को बाबा अमरनाथ की गुफा में चढ़ावा चढाया.(प्रवीण ठाकरे की रिपोर्ट)