
गाजर की खेती में सबसे बड़ी मुसीबत फसल की कटाई के बाद शुरू होती है. खेत से निकली गाजर शलजम हल्दी अरबी अदरक और मूली मिट्टी और कीचड़ से पूरी तरह ढकी होती है. इसे हाथों से रगड़-रगड़ कर धोना न केवल थका देने वाला काम है, बल्कि इसमें बहुत समय और दर्जनों मजदूरों की जरूरत पड़ती है. घंटों पानी में रहने के कारण मजदूरों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है और इतनी मेहनत के बाद भी गाजर में वह चमक नहीं आ पाती, जिससे मंडी में अच्छे दाम मिलता है. होशियारपुर के ग्राम बोहन के युवा किसान गुरचरण सिंह ने इस समस्या को गहराई से समझा. अपने 22 सालों खेती के अनुभव का उपयोग करते हुए, उन्होंने एक ऐसी 'कैरेट वॉशिंग मशीन' विकसित की, जिसमें घूमते हुए ब्रश और पानी की तेज बौछारें मिट्टी को पूरी तरह साफ कर देती हैं. इस मशीन ने घंटों की मेहनत को मिनटों में बदल दिया है. अब किसान को मजदूरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और अब इस मशीन से धुली एकदम साफ गाजर अरवी जैसी जड़ वाली सब्जियों को बाजार में ऊंचे और बेहतर दाम मिलते हैं. सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह मूली, अदरक, हल्दी और शकरकंद जैसी हर जड़ वाली सब्जी के लिए कारगर है.
किसान गुरचरण सिंह द्वारा बनाई यह मशीन आधुनिक इंजीनियरिंग और व्यावहारिक अनुभव का बेहतरीन मिश्रण है. इसे खाद्य-ग्रेड स्टेनलेस स्टील से बनाया गया है ताकि जंग न लगे और स्वच्छता बनी रहे. मशीन के भीतर मोटर से चलने वाले नायलॉन के घूमने वाले ब्रश लगे हैं, जो गाजर की सतह को नुकसान पहुंचाए बिना उसे रगड़कर साफ करते हैं. इसके साथ ही, ऊपर से निरंतर पानी का छिड़काव वॉटर जेट्स होता रहता है, जो गंदगी को तुरंत बहा देता है. मशीन में गंदे पानी और मिट्टी की निकासी के लिए अलग से ड्रेनेज सिस्टम दिया गया है, जिससे जहां पर गाजर की धुलाई होती है वहां पर कीचड़ नहीं फैलता है.
इस मशीन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी जबरदस्त कार्यक्षमता है. यह एक घंटे में 10 कुंतल से 15 कुंतल टन गाजर की सफाई और धुलाई करने में सक्षम है. यह न केवल बड़े किसानों के लिए उपयोगी है, बल्कि छोटे खेतों के लिए भी किफायती है. हालांकि इसका मुख्य डिजाइन गाजर के लिए है, लेकिन गुरचरण सिंह ने इसे इतना लचीला बनाया है कि इसमें मूली, चुकंदर, शलजम, शकरकंद और हल्दी जैसी अन्य कंद वाली फसलों को भी आसानी से धोया जा सकता है. इससे विविध सब्जियां उगाने वाले किसानों को अलग-अलग मशीनों पर खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती है
मशीन से धुलाई के बाद गाजर उपज की गुणवत्ता में काफी का अंतर आता है. मशीन से धुली गाजर पूरी तरह मिट्टी मुक्त और चमकदार दिखती है, जिससे उसकी 'मार्केट वैल्यू' बढ़ जाती है. साफ-सुथरी फसल की शेल्फ-लाइफ भी बेहतर होती है. किसान के लिए सबसे बड़ा फायदा यह है कि उसे अब दर्जनों मजदूरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिससे मजदूरी की लागत कम होती है और समय की भारी बचत होती है. कम रखरखाव खर्च और कम समय में गाजर की धुलााई के कारण यह मशीन खर्च पर बहुत उपयोगी है जिससे गाजर की बड़ी पैमाने पर खेती करने वाले किसानों को बेहतर लाभ मिलता है.
गुरचरण सिंह की यह खोज न केवल गाजर देश के उन सभी हिस्सों के लिए एक काफी फायदेमंद है, जहां जड़ वाली मूली, चुकंदर, शलजम, शकरकंद और हल्दी किसान फसलों की खेती करते हैं. काफी फायदेमंद है गुरूचरण भविष्य में इस मशीन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए वैज्ञानिक सलाह की जरूरत है. ताकि मैनुअल सफाई और मशीन की सफाई के बीच के अंतर को प्रमाणित किया जा सके. गुरचरण सिंह यह नवाचार 'पोस्ट-हार्वेस्ट मैकेनाइजेशन' का एक बेहतरीन उदाहरण है, जो कृषि क्षेत्र में वल्यू एडीशन को बढ़ावा देता है और किसानों को उपज की साफ सफाई ना होने से उनके उपज के दाम नहीं मिलते है. लेकिन अगर जड़ वाली फसलों के किसान साफ और धुलाई के परेशानी से इन फसलों की खेती नहीं करते हैं उस दिशा में नवाचार इस खेती करने के करने के लिए प्रेरित करेगा.
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